राज्य में 5 वर्ष दौरान बाघों के हमले से 248 लोगों की मौत
चंद्रपुर सबसे ज्यादा प्रभावित जिला

नागपुर/दि.27 – महाराष्ट्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है. राज्य में पिछले पांच वर्षों के दौरान वन्यप्राणियों के हमलों में कुल 420 लोगों की मौत हुई है, जिनमें से 248 लोगों की जान बाघों के हमले में गई है. वहीं 104 लोगों की मृत्यु तेंदुए के हमलों में हुई है. यह जानकारी राज्य के वन मंत्री गणेश नाईक ने विधानसभा सत्र के दौरान दी.
राज्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष का सबसे अधिक असर चंद्रपुर जिले में देखने को मिल रहा है. राज्य में मौजूद कुल बाघों में से 250 से अधिक बाघ अकेले चंद्रपुर जिले में पाए जाते हैं, जिसके कारण यहां बाघ-मानव संघर्ष की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 से 2025 के बीच केवल चंद्रपुर जिले में ही बाघों के हमलों में 91 लोगों की मौत दर्ज की गई है. वहीं वर्ष 2025 में वन्यप्राणियों के हमलों में जिले में 47 लोगों की जान गई. नियमानुसार मृतकों के परिजनों को कुल 8 करोड़ 27 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है. इसी प्रकार जुन्नर वन विभाग क्षेत्र में पिछले सात वर्षों के दौरान तेंदुए के हमलों में 27 लोगों की मौत हुई. इनमें से 26 मामलों में मृतकों के कानूनी वारिसों को 5 करोड़ 53 लाख रुपये मुआवजा दिया गया है, जबकि एक प्रकरण में कार्रवाई जारी है.
वन मंत्री गणेश नाईक ने बताया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए क्षेत्रीय स्तर पर विभिन्न उपाय किए जा रहे हैं. वन विभाग द्वारा गश्ती दल गठित कर संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित निगरानी की जा रही है तथा वन्यप्राणियों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है. मानव जीवन के लिए खतरनाक साबित होने वाले वन्यप्राणियों को वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत पकड़ने की कार्रवाई भी की जा रही है. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने 150 तेंदुओं की नसबंदी के प्रस्ताव को केंद्र सरकार के पास भेजा है. वहीं जुन्नर क्षेत्र में पांच मादा तेंदुओं को पकड़कर नसबंदी करने की अनुमति केंद्र सरकार से मिल चुकी है और इस पर अध्ययन कार्य अगले छह महीनों में पूरा किया जाएगा.
वन क्षेत्रों में वन्यप्राणियों के लिए कृत्रिम जलस्रोत और वन तालाब भी बनाए जा रहे हैं ताकि पानी की कमी के कारण जानवर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर न आएं. इसके अलावा संयुक्त वन प्रबंधन समितियों और स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद से स्थानीय लोगों को जागरूक किया जा रहा है. हालांकि विधानसभा में इस मुद्दे को लेकर विधायक संदीप जोशी, प्रवीण दरेकर सहित करीब 21 विधायकों ने सवाल उठाए. सदस्यों ने आरोप लगाया कि मंत्री के जवाब में पश्चिम महाराष्ट्र की योजनाओं का अधिक उल्लेख किया गया, जबकि चंद्रपुर और नागपुर जिलों में बढ़ते मानव-बाघ संघर्ष से निपटने के लिए विशेष उपायों और निधि प्रावधानों पर स्पष्ट जानकारी नहीं दी.





