अभी भी 30 प्रतिशत माल पडा, कपास खरीदी केन्द्र बंद

विदर्भ के सैकडों किसान दिक्कत में

* सीसीआई ने कहा- सरकारी खरीद की अवधि पूर्ण
अमरावती/ दि.18 – भारतीय कपास बोर्ड सीसीआई की कपास खरीदी अवधि पूर्ण हो जाने से विदर्भ के सैकडों किसान दिक्कत में आ गये हैं. स्लॉट बुकिंग भी नहीं हो रही है. 15 मार्च से सरकारी खरीदी रोक दी गई है. जबकि मार्केट के जानकारों के अनुसार अभी भी 25-30 प्रतिशत उत्पादन किसानों के खेत खलिहानों में पडा है. रेट की बात करें तो एमएसपी से काफी कम दाम पर कपास खरीदी हो रही है. 7600-7650 रूपए प्रति क्विंटल के रेट बाजार में कपास के चल रहे हैं. जिससे कहा जा रहा है कि किसानों को प्रति क्विंटल 400-500 रूपए कम दाम मिल रहे हैं.
* देरी से शुरू हुई कटाई
कपास की बुआई बारिश देरी से आने के कारण प्रलंबित हुई थी. ऐसे में पहली कटाई का कपास गीला होकर खराब हो गया. कपास के फूल खिलने में भी वक्त लगा. समय पर कपास चुनने श्रमिक नहीं मिलने से किसानों को दिक्कत गई. अब सीसीआई के केन्द्रों पर पूर्व पंजीयन करने के साथ कपास लाया जारहा है तो सरकारी खरीद की अवधि पूर्ण हो जाने की बात कही जा रही है. किसानों का आरोप है कि सीसीआई ने खरीदी सेंटर देरी से शुरू किए. उसी प्रकार किसान अ‍ॅप पर पंजीयन अनिवार्य किया गया. सभी किसानों के पास स्मार्ट फोन न होने से वे पंजीयन न करवा सके थे.
* सरकी के रेट ठीक
कपास से निकलनेवाली सरकी का उठाव बाजार में अच्छा देखा जा रहा है. तेल निकालने के लिए सरकी की डिमांड होती है. देश में सरकी अर्थात खली का रेट 4 हजार- 4200 रूपए प्रति क्विंटल बोला जा रहा है. आनेवाले दिनों में दाम और बढने की संभावना भी जताई गई. कपास की रूई की 355 किलो की गाठ लगभग 55 हजार रूपए का रेट है. वैश्विक मार्केट में भी कपास की रेट 65 सेंट प्रति पाउंड बोले जा रहे हैं.
* लागत निकलना मुश्किल
किसानों को सीसीआई से कपास की खरीदी की उम्मीद थी. इधर मार्केट में प्रति क्विंटल 500-600 रूपए का दाम कम मिल रहा है. जिससे उनकी लागत निकलना मुश्किल बताया जा रहा है. किसान संगठन सरकारी खरीदी केन्द्र की अवधि बढाई जाने की मांग कर रहे हैं.

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