नशे के आदि 3404 मरीज नशामुक्ति केंद्र में इलाज कराने भर्ती हुए

3222 सुरक्षित लौटे, नशे की तडप में 116 केंद्र छोडकर भागे

* संभाग के नशामुक्ति केंद्रो का लेखा-जोखा
अमरावती /दि 11 – राज्य सरकार द्वारा संचालित विविध नशामुक्ति केंद्रो में वर्ष 2024- 2025 के दौरान बडी संख्या में नशे के आदि मरीजो ने इलाज के लिए प्रवेश लिया. उपलब्ध आंकडो के अनुसार अमरावती संभाग के विविध जिलो के नशामुक्ति केंद्रो में कुल 3,404 मरीज भर्ती हुए, जिनमें से 3,322 मरीजो का उपचार सफलता पूर्वक हुआ. जो कि नशे के दलदल के फसकर मौत के मुह से वापस लोैटे हैं.
वहीं 116 मरीज इलाज के दौरान केंद्रो से उपचार पूरा किए बिना भाग गए. विशेष तौर पर नशामुक्ति केंद्र में उपचार के लिए दाखिल हुए. मरीज में 80 फीसदी युवाओं का समावेश रहा. जिनकी आयु 18 से 30 वर्ष तक रही. नशे की लत में कई लोगोें के परिवार बर्बाद हुए हैं. नशामुक्ति केंद्रो में उपचार की सफलता दर संतोषजनक रही हैं. हालांकि, इलाज के दौरान कुछ मरीजो का केंद्र से भाग जाना चिंता का विषय बना हुआ हैं. प्रशासन द्वारा भविष्य में ऐसे मामलो को रोकने के लिए सुरक्षा ओैर परामर्श व्यवस्थाओं को ओैर मजबूत करने की आवश्यकता जताई जा रही हैं.

भागने की कई वजह होती हैं
नशामुक्ति केंद्रो से लोगो के भागने की कई वजहो को लेकर जानकारी लेने पर पता चला कि लोगो पर नशा हावी होना यह एक गंभीर समस्या हैं. और आम तौर पर इसमें कई कारण शामिल होते हैं. नशामुक्ति केंद्र से लोगो के भागने की वजह देखी गई हैं. जिसमें इलाज की सख्ती के तहत कुछ केंद्र बहुत सख्त दिनचर्या और अनुशासन का पालन करते हैं. कुछ मरीजो को नशे की तीव्र तलब एक बिमारी हैं. और जब व्याक्ति को तीव्र तलब लगती हैं तोे वे केंद्र के नियमो को तोडकर भागने की कोशिश करते हैं. कई नशेडी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं जैसे डिप्रेशन या चिंता से भी जूझ रहे होते हैं. जो उनके भागने का कारण बन सकता हैं. परिवार या दोस्तो की याद, इलाज की प्रति प्रेरणा की कमी ऐसे विभिन्न कारण देखे गए हैं.

पुलिस को भी इनपुट इनफॉरमेशन
सुत्रो से मिली जानकारी के मुताबिक नशा मुक्ति केंद्र में शराब के अलावा गांजा, ड्रग्स, के नशे मे पूरी तरह से चूर हुए मरीज पिछले कुछ वर्षो से दाखिल हो रहे हैं. जबकि नशामुक्ति केंद्र को लेकर उन मरीजो को नशे से दूर करने की पुरजोर कोशिश अब तक सफल रही हैं. लेकिन इसी माध्यम से मादक पदार्थ तस्कारी को लेकर भी इन्हीं मरीजो के जरीए कई बडे तस्करोें के राज खुलने के साथ महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने लगी हैं..

* पुनर्जन्म का होता है एहसास
नशामुक्ति केंद्र से ठीक होकर आए लोगो के अनुभव बहुत ही प्रेरणादायक होते हैं. सही उपचार और समर्थन से किसी भी व्यक्ति का जीवन बेहतर हो सकता हैं. नशामुक्ति केंद्र से ठीक होकर गए लोगो से बातचीत करनेे पर उन्हें एक पुनर्जन्म का एहसास होता हैं. कई लोग महसूस करते है कि उन्होंने एक नया जीवन शुरू किया हैं. वे कहते हैं कि इलाज के दौरान और बाद में उन्हें अपने परिवार के प्यार और समर्थन की असली कीमंत समझ में आती हैं. वे अपने रिश्तो को फिर से मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं. नशा छोडने के बाद उनमें अपनी समस्या का सामना करने ओर उनका समाधान ढूढंने का आत्मविश्वास बढता हैं.

* जिला निहाय आंकडे इस प्रकार हैं
अमरावती : जिले में कुल 811 मरीज पिछले दो वर्षो में नशामुक्ति केंद्र में भर्ती हुए, जिनमें से 789 मरीज ठीक होकर केंद्र से बाहर निकले , जबकि 22 मरीज इलाज अधुरा छोडकर भाग गए.
अकोला : जिले में 792 मरीजो को नशामुक्ति केंद्र में दाखल किया गया इनमें सर्वाधिक 790 मरीजो का उपचार सफल रहा. जबकि 36 मरीज बगैर उपचार करें भाग गए.
यवतमाल: जिले में पिछले दो वर्षो में 804 मरीज भर्ती हुए जिनमें से 786 मरीज ठीक होकर अपने घर लोैटे. वहीं 18 मरीज भाग गए.
बुलढाणा: जिले में 433 मरीजो का विभिन्न केंद्रो पर उपचार के लिए पंजीयन किया गया जिसमें से दो वर्ष के भीतर 412 मरीजों ने इलाज पूरा किया वहीं 21 मरीज केंद्र छोडकर चले गए.
वाशिम : जिले में 564 मरीज भर्ती हुए इनमें 554 का इलाज सफल रहा और 19 मरीज चुपचाप नशामुक्ति केंद्र को चकमा देकर भाग गए.
18 दिन से 6 महीने के होते हैं विविध कोर्स
वैसे तो राज्य सरकार द्वारा राज्य के अमरावती, नागपुर जैेसे कई महानगरों में सरकारी और नीजी नशामुक्ति केंद्र स्थापित किए गए हैं. जिसकी फीस 25 हजार से 3लाख रूपए सुविधा के अनुसार होती हैं. विशेष तौर से उपचार के भी कोर्स 18 दिन से लेकर 6 महीने तक होते हैं. जबकि नशामुक्ति केंद्र को लेकर कुछ चुनिंदा लोगो ने अपनी दुकानदारी भी शुरू कर रखी हैं. जिनका पर्दाफाश सरकार ने समय पर किया हैं. इसके अलावा हमेशा केंद्र से भागने वाले लोगोे की जानकारी तुरंत संबंधित पुलिस तथा उनके परिजनो को दी जाती हैं.

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