कठोरा बु. ग्राम पंचायत ने बिना अनुमति के बनाई पानी की टंकी
जिलाधिकारी को जानकारी नहीं? नागरिकों ने मजीप्रा से की शिकायत

* जलजीवन’ के तहत कारनामा
अमरावती/दि.29 -समीपस्थ कठोरा बु. ग्राम पंचायत ने सोपीनाथ बाबा नगर में आरक्षित खुली जमीन पर जिलाधिकारी की अनुमति के बिना ही एक ऊंची पानी की टंकी का निर्माण किया है. हालांकि, ई-क्लास की जमीन उपलब्ध होने के बावजूद, जिला प्रशासन को आरक्षित खुली जमीन पर पानी की टंकी बनाने के काम की जानकारी नहीं है. नागरिकों ने महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के मुख्य अभियंता से इसकी शिकायत की है.
ग्राम पंचायत कठोरा बु में, 105 गांवों के लिए केंद्र प्रायोजित जलजीवन मिशन कार्यक्रम के तहत एक उच्च पानी की टंकी का निर्माण करते समय, ग्राम पंचायत ने पुरानी तारीख में ग्राम सभा का प्रस्ताव दिखाया है. पानी की टंकी के निर्माण के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र में मासिक बैठक की तारीख में भी बदलाव किया गया है और ग्राम सभा पर फर्जी होने का आरोप लगाया गया है. अनुमति पहले दी गई थी और फिर ग्राम सभा दिखाई गई. इसलिए, ग्राम सभा द्वारा दिया गया अनापत्ति प्रमाण पत्र फर्जी है. चूंकि इसे 3 साल से अधिक की अवधि के लिए स्थानांतरित किया जाना है, इसलिए महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम, 1959 की धारा 55 के अनुसार मुख्य कार्यकारी अधिकारी से पूर्व अनुमति प्राप्त करना अनिवार्य है. साथ ही, ग्राम सभा और ग्राम सभा की मासिक बैठक की मंजूरी लेना अनिवार्य है. हालांकि, दस्तावेज पर मासिक होने का दर्शाकर नकली और झूठा ग्राम पंचायत मासिक सभा प्रस्ताव दिखाकर शासन निधि का दुरुपयोग करने की शिकायत चंद्रशेखर ठाकरे, रवि सोनोने, हरीश मोहकार, सुनील जुमडे, नितिन देशमुख, रवि चोपडे, राजू वाकपंजर, राजेंद्र डवरे, सुरेश सिरसाठ, नरेंद्र तायडे ने की है.
* ठेकेदार के लिए खटपट करने का आरोप
जलजीवन मिशन के तहत 105 गांवों के लिए ग्रामीण प्रादेशिक जलापूर्ति योजना के तहत कठोरा में पंची पानी टंकी साकार करना, जलवाहिन बिछाना आदि का कार्य 222 करोड रुपये की लागत से पूरा किया जाएगा.
* 4.15 हेक्टेयर आरक्षित भूमि
नागरिकों ने सवाल उठाया है कि जब कठोरा बु. में 4.15 हेक्टेयर आरक्षित भूमि है, तो इस भूमि पर ऊंचे जल कुंभ का निर्माण क्यों नहीं किया गया. यह जल-कुंभ सोपीनाथबाबा नगर में आरक्षित खुली भूमि के बीचों-बीच बनाया गया है और ग्राम पंचायत ने उस उद्देश्य की अनदेखी की है जिसके लिए यह भूमि योजना में आरक्षित है. नगर रचना विभाग ने इस योजना को मंजूरी दी थी और आरक्षित भूमि पर जल-कुंभ बनाने से पहले जिलाधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य था, नागरिकों ने इस पर आपत्ति जताई है.
* ई-क्लास के बजाय खुली आरक्षित जगह पर निर्माण
कठोरा सोपीनाथ बाबानगर के पी. जी. गोंडेकर ने आरोप लगाया है कि मजीप्रा और ठेकेदार की शह पर ग्राम सभा ने एक प्रस्ताव पारित कर खुली आरक्षित भूमि पर अवैध रूप से पानी की टंकी का निर्माण कर





