यह कैसा प्रसाद, यह तो खाना है!

शिर्डी के साईं प्रसाद को लेकर सुजय विखे-पाटिल का विवादित बयान

शिर्डी /दि.29- भाजपा के पूर्व सांसद सुजय विखे-पाटिल ने एक बार फिर शिर्डी के साईं प्रसाद को लेकर विवादित बयान दिया है. पालिका चुनाव प्रचार सभा के दौरान उन्होंने कहा कि लापशी और घुगरी को प्रसाद कहा जाता है. यह जो रोटी, भात, दाल व मिठाई वाला भोजन दिया जा रहा है, यह कोई प्रसाद नहीं, बल्कि यह तो सीधे-सीधे खाना यानि भोजन है. पूर्व सांसद सुजय विखे-पाटिल के इस वक्तव्य के सामने आते ही राजनीतिक मैदान में फिर से चर्चा और नाराजगी का तापमान बढ़ गया है.
बता दें कि, पूर्व सांसद सुजय विखे-पाटिल इससे पहले भी शिर्डी में बढ़ती अपराध घटनाओं की पृष्ठभूमि पर साईं भक्तों को लेकर टिप्पणी करते हुए घिर चुके हैं. उन्होंने कहा था कि कई लोग खुद को साईं भक्त कहते हैं, रात में शराब पीकर खाना खाते हैं और सुबह फिर भक्त बनकर घूमते हैं. इस बयान पर उस वक्त विरोधियों ने उन पर तीखी प्रतिक्रिया जताई थी. अब उनके ताज़ा वक्तव्य ने फिर से विवाद को हवा दे दी है. इस बार पूर्व सांसद सुजय विखे-पाटिल ने अपने भाषण में कहा कि, एमआईडीसी के कारण रोजगार निर्माण होना चाहिए. मेरा होटल व्यवसाय चलाने के लिए मैं आवाज उठाऊं कि प्रसादालय बंद करो, ऐसा नहीं है. लेकिन जब मैंने कहा कि यह प्रसादालय बंद होना चाहिए, तो सबने मुझ पर टीका की. बोले यह प्रसाद है. अरे प्रसाद क्या होता है? प्रसाद तो लापशी और घुगरी का होता है. यह कौन-सा प्रसाद है, जिसमें रोटी, दाल-चावल व मिठाई का समावेश है, यह कोई प्रसाद नहीं, बल्कि यह तो साफ तौर पर भोजन है. जिसकी लालच में कई लोग रात में शराब पीकर लोग प्रसाद खाने जाते हैं. खाते हैं, सोते हैं और सुबह अपने काम पर लग जाते हैं. यह बंद होना चाहिए. क्योंकि इसमें से कई लोग अपराधिक तत्व वाले भी हुआ करते है. जब शिर्डी में हत्या हुई, तब लोगों ने ही कहा कि सुजय विखे सही बोलते थे. विखे का दावा है कि उनकी आलोचना तो हुई, लेकिन अब हालात देखकर जनता उनकी बातों से सहमत हो रही है.
ज्ञात रहे कि, सुजय विखे-पाटिल ने पूर्व में भी साईं संस्थान के प्रसादालय को बंद करने की मांग रखी थी. उनका कहना था कि संस्थान को भोजन पर होने वाला खर्च बच्चों के भविष्य और शिक्षा पर लगाया जाना चाहिए. इसी दौरान उन्होंने कहा था कि राज्य के सभी भिखारी मुफ्त भोजन के लिए शिर्डी में जमा हो गए हैं. इस टिप्पणी के बाद विपक्ष ने उन पर कड़ी आपत्ति जताई थी और इसे साईं भक्तों के अपमान के रूप में बताया था. विखे के ताज़ा बयान के बाद एक बार फिर राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया के संकेत मिल रहे हैं. आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ने की संभावना जताई जा रही है.

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