विधानसभा में तुकडेबंदी शिथिल करने वाला विधेयक मंजूर

3 करोड नागरिकों को बडी राहत

नागपुर/दि.10 – राज्य की नगरीय बस्तियों में गुंठेवारी या छोटे भूखंडो पर रहने वाले लगभग 60 लाख परिवारोें, यानी करीब 3 करोड नागरिको को बडी राहत देनेे वाला तुकडेबंदी कानून के कडे नियम शिथिल करने वाला महाराष्ट्र जमीन महसूल संहिता (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2025 मंगलवार 9 दिसंबर को विधानसभा में मंजूर किया गया. इस विधेयक के लागू होने से छोटे भूखडों की खरीद-फरोख्त आसान होगी और संबंधित मालिको के नाम सातबारा उतारे पर स्वतंत्र रूप से दर्ज होने का रास्ता खुल जाएंगा.
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने यह विधेयक विधानसभा में प्रस्तुत किया. कई वर्षो से नगरीय क्षेत्रो में 5-10 गुंठे या इससे कम जमीन पर घर बनाकर रहने वाले नागरिको को मालिकी हक से जुडी तकनीकी अडचनों का सामना करना पड रहा था. जमीन के गैरकृषि (एनए) उपयोग के लिए बार-बार जिलाधिकारी की अनुमति लेना जरूरी था. इस नए विधेयक के बाद, विकास योजना (डीपी) या क्षेत्रीय योजना (आरपी) मंजूर होने वाले क्षेत्रो में अलग से एनए की अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होंगी. इसके स्थान पर वन-टाइम प्रीमियम (एक बार का अधिमूल्य) भरकर प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी.
शिवसेना (उबाठा) के विधायक भास्कर जाधव ने आरोप लगाया कि इससे गरीबो के बजाय बिल्डर लॉबी को ज्यादा लाभ मिल सकता हैं. वहीं कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने कहांं कि शहरों की विकास योजनाएं तैयार न होने पर केवल भूखंड नियमित करने से काम नही चलेंगा- 9 मीटर सडको व नालियों की व्यवस्था कैसे होगी, इसका भी विचार जरूरी हैं. इसके अलावा विधायक नाना पटोले, सुरेश धस, प्रवीण दटके, अंमित देशमुख, राहुल कुल, कृष्णा खोपडे, हिरामन खोसकर, प्रशांत सोलंखे, अभिजीत पाटिल,संजय गायकवाड, रवि राणा आदि ने भी कई मुद्दे उठाएं. विधायक चंद्रदीप नरके, विक्रम पाचपुते, और रमेश बोरनारे, ने मांग की कि यह निर्णय सिर्फ शहरो तक सीमित न रखकर ग्रामीण क्षेत्राेंं में भी लागू होना चाहिए वहीं विधायकोे ने यह भी बताया कि पश्चिम महाराष्ट्र सहित कई जगह बांध क्षमता कम होने के कारण खरीद- फरोख्त में अडचने आती हैं.

बिल्डरो के नहीं, 60 लाख परिवारोे के लिए
राजस्व मंत्री बावनकुले ने स्पष्ट किया कि यह कानून किसी बिल्डर को फायदा देने के लिए नहीं बल्कि छोटे भूखंडो पर घर बनाकर रहने वाले 60 लाख परिवारों को वैध मालिकी हक देने के लिए हैं. इस निर्णय से किसी भी आरक्षण को नुकसान नहीं होगा. बल्कि आम आदमी अब अपनी जमीन का कानूनी मालिक बनेगा. 15 अक्तूबर 2024 के बाद कोई भी नया तुकडा (प्लाट) नहीं बनाण जा सकेगा. पंरतु उससे पहले के नागरिको को बडे पैमाने पर लाभ मिलेगा.

तुकडा बंदी कानून का विधायक रवि राणा ने किया समर्थन

विधान मंडल के शीतसत्र में मंगलवार 9 दिसंबर को विधानसभा में तुकडा बंदी विधेयक पर चर्चा के दौरान विधायक रवि राणा ने सामान्य नागरिको के हितो और लंबे संमय से लंबीत जमीन विवादो की समस्याओं का उल्लेख करते हुए इस विधेयक का जोरदार समर्थन किया. विधायक राणा ने कहां कि नगर पंचायत, नगर पालिका और महानगर पालिका की सीमाओ मेे कई वर्षो से बडी संख्या में प्लॉट मालिको को जमीन के तुकडे काटकर बेचे गए. इनमेें से अधिकांश व्यवहार केवल नोटरी के आधार पर हुए हैं, जिससे उनमें फेरबदल संभव नहीं होता हैं. और इसका सीधा नुकसान नागरिको को ही उठाना पडता हैं. उन्होंने स्पष्ट कहां, नोटरी आधारित व्यवहारो पर रोक लगाने और अनियमित तुकडो पर नियंत्रण रखने के लिए कानून में कडे प्रावधान आवश्यक हैं. राजस्व मंत्री की पारदर्शी भूमिका की सराहना करते हुए विधायक राणा ने कहां कि राजस्व मंत्री ने साफ और जनहितेैषी भावना से यह कानून प्रस्तुत किया हैं. इस कानून से सामान्य जनता को बडी राहत मिलेगी. उन्होेंने आगे कहां कि किसी भी तुकडे पर स्थायी विकास अनुमति देने से पहले संबंधित प्राधिकरणो की एनओसी, क्षेत्र का प्रकार रहिवासी, ग्रीन जोन, विकास योजना (डीपी) या आरक्षित भूखंड की संपूर्ण जांच अनिवार्य होना चाहिए.
लेआाउट डेवलपर्स पर कार्रवाई की मांग : विधायक राणा ने ध्यान दिलाया कि अनेक डेवलपर्स ने बडे लेआउट बनाकर तुकडे बेचे, लेकिन विकास आराखडे के बडे रास्ते (डीपी रोड)जाते समय जमीन का वास्तविक मालिक बदलता नहीं हैं, जिससे नुकसान प्लॉट खरीदने वाले नागरिको को होता हैं. शासन के प्रकल्पो से मिलने वाला मुआवजा प्लॉट धारको को ही मिले, ऐसे स्पष्ट प्रावधान कानून में होने चाहिए

विधेयक की प्रमुख बाते
– नगरीय क्षेत्रों में जमीन के अकृषक उपयोग (एनए) के लिए अब जिलाधिकारी की पूर्व-अनुमति आवश्यक नहीं
– नियोजन प्राधिकरण (प्लानिंग अथॉरिटी) की अनुमति को ही एनए माना जाएगा.
– गुंठेवारी और छोटे भूखंडो की खरीदी -फरोख्त सरल होगी.
– 60 लाख परिवारोें के सातबारा पर अलग-अलग नाम दर्ज होने का मार्ग सुगम

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