भाजपा अंबा मंडल के वर्तमान और पूर्व अध्यक्ष की बगावत

मनीष चौबे की पत्नी जवाहर गेट प्रभाग से राष्ट्रवादी की उम्मीदवार

* राजा खारकर ने भी उठाया धनुष्य बाण
अमरावती/ दि. 30- भारतीय जनता पार्टी को जिस बात का अत्यधिक डर था, वहीं बात अर्थात पार्टी में बगावत जमकर होती नजर आ रही है. बीजेपी वरिष्ठ पदाधिकारियों सहित वर्षो से निष्ठावान बने कार्यकर्ताओं ने महापालिका रण का उम्मीदवार नहीं बनाए जाने से बगावत कर दी. उनमें अंबा मंडल के पूर्व अध्यक्ष और वर्तमान अध्यक्ष सहित शहर भाजपा के महासचिव और अन्य पदों पर रहे कई बडे नाम बताए जा रहे हैं.
चौबे और खारकर हुए बागी
जवाहर गेट के प्रतिष्ठापूर्ण प्रभाग 14 से भाजपा को बडा विद्रोह देखने मिल रहा है. बडी बात यह है कि परिस्थितियां तेजी से बदली है. पार्टी में न केवल विद्रोह हुआ बल्कि अन्य दलों की हाथों हाथ उम्मीदवारी भी ले ली गई. जिससे पार्टी द्बारा उन्हें मनाए जाने के चांस भी कम हो गये हैं. इसी बीच कई बडे नामों ने बगावत का मार्ग न अपनाते हुए पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा कायम रहने का उदाहरण दिया है. भाजपा अंबा मंडल के अध्यक्ष मनीष चौबे ने सुबह पार्टी की टिकट न मिलने की भनक लगते ही हाथों संजय खोडके के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लिया. राकांपा को तुरंत उनकी पत्नी अनीषा को घडी की उम्मीदवारी दे दी. उधर पूर्व अध्यक्ष राजा खारकर ने भी उम्मीदवारी न मिलने पर शिवसेना शिंदे गट की धनुष्यबाण की टिकट फाइनल करने की जोरदार चर्चा है. वे भी जवाहर गेट- बुधवारा प्रभाग से चुनाव लडने जा रहे हैं. इसी प्रभाग से शिवसेना शिंदे ने जिला प्रमुख संतोष बद्रे की पत् नी कोमल बद्रे को टिकट दिया है. सुनंदा राजेंद्र पांढरे को भी टिकट दी गई है.


बीजेपी में एक और बगावत मोरबाग प्रभाग 6 से देखने मिली्र. जहां पूर्व शहर जिला महासचिव सतीश करेसिया बागी हुए. करेसिया ने कमल की उम्मीदवारी न मिलते देख तुरंत होटल ग्रैंड महफिल जाकर सीधे मंत्री संजय राठोड से भेंट की. शिवसेना शिंदे गट ने सतीश करेसिया को चर्चा के बाद मोरबाग प्रभाग से एबी फार्म दे दिया. इस प्रभाग में करेसिया की पत्नी सोनाली करेसिया पिछले मनपा सदन में भाजपा नगरसेविका थी. धनुष्यबाण ने इस प्रभाग े ज्योति साहू और परमलाल अहेरवार को भी उम्मीदपार घोषित किया र्है. आज ही उन्होंने कार्यालय जाकर नामांकन दायर कर दिया.
बडे प्रमाण मेें विद्रोह, उसी क्रम में निष्ठा के भी उदाहरण
भारतीय जनता पार्टी केन्द्र और राज्य में सत्तासीन होने से एवं पिछले मनपा सदन में भी पार्टी का बहुमत होने से सर्वाधिक इच्छुकोें की संख्या पार्टी के पास रही. ऐसे में विद्रोह को टालने की पार्टी की अंतिम क्षणों तक चली कोशिश के बावजूद कई प्रमुख नाम बगावत कर गये. वहीं कई नाम वंत इच्छुकों ने समय पर पार्टी की उम्मीदवारी न मिलने पर भी अपने निष्ठा कायम रखी हैं. समाचार लिखे जाने तक कुछ पदाधिकारियों ने विद्रोह का झंडा उठा रखा था. वहीं कुछ नामों ने फिलहाल मौन साध रखा है. कुछ नेताओं को अन्य दलों में भी समय पर पहुंचने के कारण उम्मीदवारी नहीं मिल सकी. उन्हें फिलहाल मन मसोसकर रह जाना पडा है.


दीपक साहू सम्राट कमल नहीं पाना लेकर मैदान में
भारतीय जनता पार्टी में बगावत का विस्फोट हो रखा है. इसी कडीर में मोरबाग प्रभाग 6 के दावेदार दीपक साहू समा्राट ने कमल की उम्मीदवारी हेतु आवेदन किकया था. उन्हें अब भाजपा ने टिकट नहीं दिया. दीपक सम्राट ने आनन-फानन में विधायक रवि राणा की पार्टी युवा स्वाभिमान से दावा कर दिया है. वे उम्मीदवारी आवेदन दाखल कर चुके र्हैं. पाना निशानी पर मनपा के रण में उतरेंगे.
भाजयुमो अध्यक्ष भी विद्रोह की राह पर
भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा के अध्यक्ष विजय उर्फ विक्की शर्मा ने भी जवाहर गेट प्रभाग से उम्मीदवारी न मिलने पर अब विद्रोह की सोच रहे हैं. खबर है कि उन्होंने पत्नी मोनिका शर्मा का निर्दलीय के रूप में नामांकन दायर किया हैै. इसी से माना जा रहा है कि शर्मा ने बगावत का झंडा उठाया है. बता दे कि जवाहर गेट प्रभाग में बीजेपी को झटके पर झटके लग रहे हैं.

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