मनपा चुनाव में टिकट वितरण को लेकर भाजपा में नाराजगी….
क्या हम सिर्फ झंडे और बैनर ही उठाते रहे ?

* भाजपा शहराध्यक्ष डॉ. धांडे के निवास पर भारी हंगामा
* टिकट से वंचित कई कार्यकर्ता भावुक होकर रो पडे
अमरावती/ दि. 31 – मनपा चुनाव में टिकट वितरण को लेकर भाजपा में भारी नाराजगी देखने को मिली. नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन भाजपा शहराध्यक्ष डॉ. नितिन धांडे के निवास स्थान पर एबी फॉर्म वितरित किए गये. जिन्हे टिकट मिला, वे जय श्रीराम के नारे लगाते हुए खुशी- खुशी निकल गये. लेकिन जिन्हें एबी फॉर्म नहीं मिला, वे आक्रमक और बेहद संतप्त दिखाई दिए. उन्होंने कहा कि पार्टी के लिए हमने जेल की सजा तक भुगती और टिकट किसी और को दे दी गई. तो क्या हम सिर्फ झंडे और बैनर ही उठाते रहे ? इस तरह के शब्दों में कई लोगों ने अपना रोष व्यक्त किया तो कुछ भावुक होकर रो पडे.
एक महिला इच्छुक उम्मीदवार ने तो इतना उग्र रूप धारण किया कि, अब कल आप मेरी लाश उठाने ही आना, जैसा चेतावनी भरा बयान दे डाला. वही टिकट न मिलने पर कई महिला इच्छुक उम्मीदवारों की आंखों से आंसू झलक पडे. अनुशासित पार्टी के रूप में पहचानी जानेवाली भाजपा में इस तरह के हंगामे से राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है. अमरावती मनपा के 22 प्रभागों की 87 सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया जारी है. 23 दिसंबर से नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी. राजनीतिक दलों और इच्छुक उम्मीदवार वेट एंड वॉच की भूमिका में थे. लेकिन मंगलवार 30 दिसंबर को अचानक हालात बदल गये.
डॉ. नितिन धांडे के निवास पर एबी फार्म वितरण किए गये. जिन इच्छुकों को पार्टी ने उम्मीदवार बनाया, उन्हें एबी फार्म के लिए सूचना देकर शहराध्यक्ष डॉ. नितिन धांडे के निवास पर बुलाया गया. इस समय प्रभारी विधायक संजय कुटे, चुनाव प्रमुख जयंत डेहनकर, शहराध्यक्ष डॉ. नितिन धांडे, भाजपा प्रवक्ता शिवराय कुलकर्णी, पूर्व पालकमंत्री प्रवीण पोटे, प्रा. रवीन्द्र खांडेकर के साथ अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित थे. जिन्हें एबी फार्म दिए गये. उन्हें नामांकन दाखिल करने के निर्देश दिए गये. इसके चलते डॉ. धांडे के निवास पर उम्मीदवारों, इच्छुकों और उनके समर्थकों की भारी भीड उमड पडी. जैसे ही पार्टी द्बारा घोषित उम्मीदवारों के नाम सामने आए. इच्छुकों में भारी बेचैनी फैल गई.
भाजपा के कई पुराने, स्थापित नेताओं के टिकट काटकर नये चेहरों को मौका दिया, जिससे पार्टी के भीतर नाराजी का माहौल बन गया. नाराज लोगोंं का कहना रहा कि हमने पार्टी के लिए जी- जान से मेहनत की. जरूरत पडी तो जेल भी गये. लेकिन टिकट देने के वक्त माला किसी ओर के गले में डाल दी गई. तो क्या हम सिर्फ झंडे उठाने के लिए ही है ? इस सवाल के साथ कई लोगों ने पार्टी के पदाधिकारियों सेे जवाब मांगा.





