अंतत: विधायक राणा के सामने भाजपा का ‘बिस्कुट नरम’
अब भाजपा ने युवा स्वाभिमान के लिए छोडी कुल 10 सीटें

* नामांकन वापसी के अंतिम दिन तीन सीटों पर युवा स्वाभिमान प्रत्याशियों को घोषित किया समर्थन
* अपने खुद के तीन प्रत्याशियों को गलती से एबी-फॉर्म दिए जाने का पत्र किया गया जारी
अमरावती /दि.3 – अमरावती शहर सहित किसी भी तरह के चुनावी इतिहास में कल अपनी तरह की पहली और बेहद अभूतपूर्व घटना घटित हुई, जब ऐन नामांकन वापसी के अंतिम दिन भाजपा ने अपने अधिकृत प्रत्याशियों की सूची में शामिल तीन नामों को लेकर जारी एबी-फॉर्म गलती से जारी हो जाने का पत्र निर्वाचन अधिकारियों के नाम लिखा. साथ ही साथ उन तीन प्रत्याशियों की बजाए उनके स्थान पर युवा स्वाभिमान पार्टी के प्रत्याशियों को अपना समर्थन रहने का संदेश भी प्रसारित किया. जिसके चलते माना जा रहा है कि, विधायक रवि राणा और युवा स्वाभिमान पार्टी के सामने भाजपा का ‘बिस्कुट’ पूरी तरह ‘नरम’ पड गया है और भाजपा पूरी तरह से विधायक रवि राणा के सामने ‘दंडवत’ होने के साथ ही ‘लंब-लेट’ भी हो गई है. हालांकि दूसरी ओर जिन तीन प्रत्याशियों को भाजपा ने रुकने हेतु कहा है, उन्होंने खुद को अपने-अपने प्रभागों से भाजपा का अधिकृत प्रत्याशी बताते हुए हर हाल में चुनाव लडने की घोषणा भी कर डाली है. ऐसे में अब भाजपा बेहद ही शर्मनाक व हास्यास्पद उलझन वाली स्थिति में फंस गई है.
बता दें कि, नामाकन प्रक्रिया के अंतिम समय तक भाजपा की जहां एक ओर शिंदे गुट वाली शिवसेना के साथ कई दौर की बातचीत चली और सीटों के बंटवारे को लेकर बात नहीं बनने की वजह से दोनों दलों के बीच युति होते-होते टूट गई. वहीं दूसरी ओर भाजपा ने युति में युवा स्वाभिमान पार्टी को शामिल कर उसे 9 सीटें देने की पहले ही घोषणा कर रखी थी. जिसे लेकर युवा स्वाभिमान पार्टी की ओर से कोई प्रतिकार भी नहीं किया गया था. परंतु जब भाजपा ने 87 में से 75 सीटों के लिए अपने अधिकृत प्रत्याशियों के नामों की सूची जारी की, तो 75 में से केवल 5 सीटें ही युवा स्वाभिमान पार्टी के लिए छोडी गई थी और 70 सीटों पर भाजपा ने अपने अधिकृत प्रत्याशियों के नाम घोषित किए थे. साथ ही दो सीटों पर युवा स्वाभिमान पार्टी के दो दावेदारों को अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाते हुए एक तरह से डैमेज कंट्रोल करने का प्रयास किया गया था. हालांकि इसके बावजूद विधायक रवि राणा ने भाजपा की ओर से छोडी गई 5 सीटों के अलावा अन्य 35-36 सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों के खिलाफ युवा स्वाभिमान प्रत्याशियों को खडा कर दिया था. जिनके नामों की अधिकृत सूची युवा स्वाभिमान पार्टी द्वारा जारी की गई थी. ऐसे में युति में रहने के बावजूद दोनों पार्टियां अधिकांश सीटों पर एक-दूसरे के खिलाफ खडी नजर आ रही थी.
खास बात यह थी कि, भाजपा और युवा स्वाभिमान पार्टी के इस अजीबो-गरीब गठबंधन और सीटों के बंटवारे को लेकर आंकडों के इस ‘झोल-झाल’ की तरफ सबसे पहले ‘अमरावती मंडल’ ने ही खबर प्रकाशित करते हुए अमरावतीवासियों को इस अजब-गजब राजनीति से अवगत कराया था. जिसके बाद युति में शामि दोनों दलों के बीच कुछ हद तक तनातनी पैदा होती नजर आई. जिसके चलते गत रोज एक दिन के लिए अमरावती के दौरे पर पहुंचे भाजपा नेता व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने विधायक रवि राणा से उनके फार्म हाउस पर बंद द्वार चर्चा की. जिसमें विधायक रवि राणा ने भाजपा के स्थानीय नेताओं द्वारा अपने साथ सीट बंटवारे को लेकर की गई धोखाधडी के बारे में जानकारी देने के साथ ही बावनकुले के समक्ष अपनी नाराजगी पेश की. जिसके बाद मंत्री बावनकुले ने विधायक राणा की नाराजगी को दूर करने हेतु एक बेहद ही अजीब पर्याय खोज निकाला. जिसके तहत शहर के तीन अलग-अलग प्रभागों की तीन सीटों पर पार्टी की ओर से अधिकृत प्रत्याशी बनाए जा चुके तीन इच्छुकों को फिलहाल रुकने का आदेश देने के साथ ही रेस से बाहर करते हुए उनके स्थान पर उन सीटों पर युवा स्वाभिमान पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों को भाजपा की ओर से समर्थन दिए जाने की घोषणा की गई. इस अजीबो-गरीब फैसले के सामने आते ही चुनावी राजनीति की समझ रखनेवाला हर व्यक्ति हैरत में है.
गलती से एबी-फॉर्म जारी होने का जारी किया गया पत्र
बता दें कि, भाजपा द्वारा अपने अधिकृत प्रत्याशियों की सूची जारी करते समय प्रभाग क्र. 11 रुक्मिणी नगर-फ्रेजरपुरा से शैलेश सुभाष राऊत, प्रभाग क्र. 17 गडगडेश्वर-रविनगर से मृणाल तुषार चौधरी व प्रभाग क्र. 21 जुनी बस्ती बडनेरा से गौरव बांते को कमल चुनाव चिन्ह पर पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया गया था और अन्य प्रत्याशियों की तरह इन तीनों प्रत्याशियों को भी पार्टी की ओर से एबी-फॉर्म जारी किए गए थे. जिसे इन तीनों प्रत्याशियों ने अपने नामांकन के साथ जोडकर चुनाव लडने हेतु अपनी दावेदारी पेश भी कर दी थी. परंतु गत रोज ऐन नामांकन वापसी के अंतिम दिन भाजपा शहराध्यक्ष डॉ. नितिन धांडे के हस्ताक्षर से एक पत्र जारी करते हुए स्पष्ट किया गया कि, पार्टी द्वारा इन तीनों प्रत्याशियों के नाम गलती से एबी-फॉर्म जारी हो गया था. ऐसे में पार्टी अब अपनी भूलसुधार करते हुए इन तीनों प्रत्याशियों के नाम जारी एबी-फॉर्म को निरस्त करती है तथा पार्टी ने इन तीनों प्रत्याशियों की बजाए संबंधित सीटों पर युवा स्वाभिमान पार्टी के प्रत्याशियों का समर्थन करने का निर्णय लिया है.
* पहले छोडी थी पांच सीटें, और अब तीन सीटों पर समर्थन
बता दें कि मनपा चुनाव हेतु युति के तहत भाजपा ने युवा स्वाभिमान पार्टी के लिए पहले पांच सीटें छोडी थी. जिसमें प्रभाग क्र. 18 राजापेठ-संत कंवरराम, प्रभाग क्र. 20 सूतगिरणी व प्रभाग क्र. 21 जुनी बस्ती बडनेरा की एक-एक सीट सहित प्रभाग क्र. 9 वडाली-एसआरपीएफ की दो सीटों का समावेश था. जहां पर भाजपा प्रत्याशियों के साथ पैनल में वायएसपी प्रत्याशी का समावेश किया गया था. वहीं अब भाजपा ने अपने द्वारा घोषित अधिकृत प्रत्याशियों में से प्रभाग क्र. 11 में भाजपा प्रत्याशी शैलेश राऊत के स्थान पर वायएसपी प्रत्याशी सूरज भारत चौधरी, प्रभाग क्र. 17 में भाजपा प्रत्याशी मृणाल चौधरी के स्थान पर वायएसपी प्रत्याशी प्रियंका भूषण पाटणे व प्रभाग क्र. 21 जुनी बस्ती बडनेरा में भाजपा प्रत्याशी गौरव बांते के स्थान पर वायएसपी प्रत्याशी किरण वसंत अंबाडकर को समर्थन देने की घोषणा की है.
* हास्यास्पद स्थिति में पहुंची भाजपा, जनता व मतदाताओं को बेवकुफ समझने की कर डाली भूल
यहां विशेष उल्लेखनीय है कि, भाजपा पर सहयोगी दलों के साथ युति करने अथवा नहीं करने तथा युति के तहत सीटों के बंटवारे को लेकर मनमानी करने के आरोपों के साथ-साथ खुद अपनी पार्टी के इच्छुक दावेदारों के नाम पार्टी की टिकट जारी करने और कई प्रबल दावेदारों के नाम काटने में भी जमकर मनमानी किए जाने के आरोप लगे थे. जिसके चलते पार्टी को पहले ही जबरदस्त बगावत और असंतोष का सामना करना पड रहा था. वहीं अब गत रोज भाजपा नेता व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने युति में शामिल रहनेवाले विधायक रवि राणा और उनकी युवा स्वाभिमान पार्टी की नाराजगी को दूर करने हेतु जो अजीबो-गरीब रास्ता खोजा है, उसकी वजह से पार्टी बेहद शर्मनाक व हास्यास्पद स्थिति में पहुंच गई है. साथ ही इससे यह संदेश भी निकलता प्रतित हो रहा है कि, पार्टी द्वारा अपने कार्यकर्ताओं सहित शहर के आम मतदाताओं को बेवकूफ व मुर्ख समझा जा रहा है. पार्टी शायद यह सोच बैठी है कि, उसके हर फैसले को उसके कार्यकर्ताओं सहित आम मतदाताओं द्वारा सिर झुकाकर मान लिया जाएगा और पार्टी चाहे जिसे चुनावी मैदान में आगे-पीछे करेगी. उसी लिहाज से मतदाताओं द्वारा वोटिंग की जाएगी. ध्यान देनेवाली बात यह है कि, जिन सीटों पर भाजपा ने वायएसपी प्रत्याशियों को समर्थन देने की बात कही है, उन तीनों सीटों पर भाजपा के अधिकृत प्रत्याशियों का भी नामांकन दर्ज है और उनके नाम पार्टी के चुनावी चिन्ह सहित ईवीएम मशीनों पर भी दिखाई देते रहेंगे. ऐसे में उन तीनों प्रत्याशियों को रोकने या उन्हें मैदान से हटाने के बारे में भाजपा द्वारा किया गया ऐलान पूरी तरह समझ से परे है.





