पालकमंत्री के सामने खोली गई शहर भाजपा के ‘कर्म-कांडों’ की ‘पोलपट्टी’
टिकट बंटवारे में हुई गडबडी को लेकर एक से बढकर एक सनसनीखेज खुलासे

* दावेदार तय करने में ‘डबल करंसी’ चलने का सबसे सनसनीखेज आरोप
* एड. प्रशांत देशपांडे को मनाने पहुंचे पालकमंत्री बावनकुले को करना पडा जबरदस्त गुस्से व असंतोष का सामना
* सांसद डॉ. बोंडे व शहराध्यक्ष डॉ. धांडे भी आरोपों को लेकर दिखे पूरी तरह से निरुत्तर
* करीब एक से डेढ घंटे तक देशपांडे के निवास पर रहे बावनकुले, देशपांडे व उनके समर्थकों को मनाने का किया प्रयास
* देशपांडे समर्थकों ने स्वीकृत सदस्य पद की ऑफर को ठुकराया, अब शहर भाजपा की कोर कमिटी में रहेंगे एड. देशपांडे
* एड. देशपांडे की देखरेख के तहत मनपा चुनाव में पार्टी करेगी अपने प्रत्याशियों का प्रचार
* कोर कमिटी में शामिल शिवराय कुलकर्णी, जयंत डेहनकर व प्रा. दिनेश सूर्यवंशी पर फुटा कार्यकर्ताओं का गुस्सा
* अब रविवार को खुद सीएम देवेंद्र फडणवीस पहुंच सकते हैं एड. देशपांडे के घर पर
अमरावती /दि.3- इस समय मनपा चुनाव को लेकर अमरावती शहर में भाजपा ही एकमात्र ऐसी पार्टी है, जिसे सबसे अधिक असंतोष और बगावत का सामना करना पड रहा है. साथ ही भाजपा में टिकट के बंटवारे को लेकर सबसे अधिक गडबडी व पक्षपात होने के आरोप भी लगाए जा रहे है. क्योंकि भाजपा ने अलग-अलग प्रभागों से टिकट के लिए बेहद प्रबल दावेदार रहनेवाले कई इच्छुकों के टिकट काट दिए है. जिसके चलते संबंधित प्रभागों में भाजपा के फैसले को लेकर बेहद आश्चर्य वाला माहौल है. खास बात यह है कि, इन सबके बीच एक ऐसे प्रबल दावेदार का नाम भी है, जिनकी टिकट कटने की चर्चा संबंधित प्रभाग में रहने के साथ-साथ पूरे शहर में है और भाजपा के इस फैसले पर उस प्रत्याशी के समर्थकों सहित विपक्षी दलों के नेताओं व पदाधिकारियों द्वारा भी आश्चर्य जताया जा रहा है. जिसके चलते नामांकन प्रक्रिया के खत्म हो जाने के बावजूद उस प्रत्याशी टिकट कटने का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है. जिसके चलते कल खुद प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता तथा राज्य के राजस्व मंत्री व जिला पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को उस प्रबल दावेदार के घर पहुंचकर पार्टी के स्थानीय नेताओं द्वारा लिए गए फैसले के बारे में चार बार माफी मांगनी पडी. साथ ही उस प्रबल दावेदार सहित उसके समर्थकों को करीब एक से डेढ घंटे तक समझाना-बुझाना भी पडा. इस दौरान पार्टी के गुस्साए समर्थकों व कार्यकर्ताओं ने शहर भाजपा के नेताओं व पदाधिकारियों के ‘कर्म-कांडों’ की मंत्री बावनकुले के सामने ऐसी पोलपट्टी खोली और ऐसे-ऐसे संगीन आरोप लगाए, जिन्हें सुनकर खुद पालकमंत्री बावनकुले भी दंग रह गए.
बता दें कि, मनपा के आगामी चुनाव हेतु स्थानी प्रभाग क्र. 13 अंबापेठ-गौरक्षण से भाजपा की टिकट के लिए प्रबल दावेदार रहनेवाले शहर के वरिष्ठ विधिज्ञ एड. प्रशांत देशपांडे का नाम लगभग तय माना जा रहा था. साथ ही साथ अमरावती मनपा का अगला महापौर पद सर्वसाधारण वर्ग के लिए खुला रहने की स्थिति में एड. प्रशांत देशपांडे को शहर के भावी महापौर के तौर पर भी देखा जा रहा था. इसके अलावा एड. प्रशांत देशपांडे को भाजपा के कुछ स्थानीय बडे नेताओं ने उनकी टिकट पक्की रहने का शब्द भी दिया था. जिसके चलते एड. प्रशांत देशपांडे ने अपने प्रभाग में जबरदस्त तरीके से अपना प्रचार व जनसंपर्क अभियान भी शुरु कर दिया था. परंतु ऐन नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि पर भाजपा की ओर से जारी पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों की सूची में एड. प्रशांत देशपांडे का नाम ही नहीं था. यह देखकर एड. प्रशांत देशपांडे व उनके समर्थकों सहित हर कोई भौंचक रह गया. विशेष उल्लेखनीय है कि, एड. प्रशांत देशपांडे सहित शहर भाजपा की कोर कमिटी द्वारा अन्य कई प्रबल दावेदारों के भी जमकर टिकट काटे गए. जिसके चलते शहर भाजपा की कोर कमिटी द्वारा टिकट बांटने को लेकर लिए गए निर्णय पर सवालिया निशान उठाए जाने लगे. जिसमें सबसे अधिक चर्चा एड. प्रशांत देशपांडे का टिकट काटे जाने को लेकर ही हो रही थी. खास बात यह भी थी कि, जहां एक ओर अन्य प्रत्याशियों के टिकट कटने की चर्चा उनसे संबंधित प्रभागों तक ही सीमित थी. वहीं दूसरी ओर एड. प्रशांत देशपांडे का टिकट कटने को लेकर पूरे शहर में चर्चाओं का बाजार गर्म था और स्थानीय मीडिया ने भी इसे जबरदस्त तवज्जो दी थी. जिसके तहत दैनिक ‘अमरावती मंडल’ ने एड. प्रशांत देशपांडे का टिकट कटने की वजहों को लेकर विशेष आलेख प्रकाशित करते हुए पूरा राजनीतिक विश्लेषण प्रस्तुत किया था. जिसकी चर्चा भाजपा में स्थानीय स्तर से लेकर प्रदेश कार्यालय तक हुई थी.
इन्हीं तमाम बातों के मद्देनजर कल एक दिवसीय दौरे पर अमरावती आए प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता व राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने अपने व्यस्ततम दौरे में से समय निकालकर अंबापेठ परिसर स्थित एड. प्रशांत देशपांडे के निवासस्थान पर भेंट दी. जहां पर मंत्री बावनकुले के आने की सूचना मिलते ही भाजपा के निष्ठावान कार्यकर्ताओं एवं एड. प्रशांत देशपांडे के समर्थकों का अच्छा-खासा जमावडा भी लग गया था. जिन्होंने पालकमंत्री बावनकुले सहित उनके साथ उपस्थित राज्यसभा सांसद डॉ. अनिल बोंडे व भाजपा शहराध्यक्ष डॉ. नितिन धांडे को जबरदस्त तरीके से आडे हाथ लेते हुए जमकर खरी-खोटी भी सुनाई और शहर भाजपा की कोर कमिटी में शामिल रहनेवाले पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता शिवराय कुलकर्णी तथा प्रदेश पदाधिकारी जयंत डेहनकर व प्रा. दिनेश सूर्यवंशी के बारे में बेहद सनसनीखेज आरोप भी लगाए.
इस समय क्षेत्र के पूर्व भाजपा पार्षद मनीष जोशी एवं शहर के वरिष्ठ विधिज्ञ एड. चंद्रकांत डोरले के नेतृत्व में क्षेत्र के असंतुष्ट भाजपा कार्यकर्ताओं व एड. प्रशांत देशपांडे के समर्थकों ने खुले शब्दों में आरोप लगाया कि, शहर भाजपा की कोर कमिटी का हिस्सा रहनेवाले कुलकर्णी, डेहनकर व सूर्यवंशी ने खुल्ले तौर पर मनमानी करते हुए मनपा चुनाव के लिए टिकट बांटने के काम में जबरदस्त धांधली की है और कई प्रभागों में ‘डबल करंसी’ का लेन-देन करते हुए पार्टी की टिकट बेची भी गई है. इस आरोप और खुलासे को सुनकर खुद पालकमंत्री बावनकुले भी सन्न रह गए और उन्होंने अपनी ओर से पूरे मामले की जांच कराने का आश्वासन देते हुए सभी उपस्थितों को समझा-बुझाकर शांत करने का भरपूर प्रयास भी किया.
सूत्रों के अनुसार, एड. प्रशांत देशपांडे को मनाने पहुंचे पालकमंत्री बावनकुले करीब एक से डेढ़ घंटे तक उनके निवास पर मौजूद रहे. इस दौरान उन्होंने एड. प्रशांत देशपांडे तथा उनकी माताजी व भाजपा की ओर से अमरावती शहर की प्रथम महिला महापौर रह चुकी श्रीमती विद्याताई देशपांडे से मुलाकात करने के साथ ही देशपांडे के निवास पर उपस्थित उनके समर्थकों के साथ बैठक भी की. इस बैठक के दौरान सांसद डॉ. अनिल बोंडे और शहराध्यक्ष डॉ. धांडे भी मौजूद रहे, लेकिन लगाए गए आरोपों के जवाब में वे निरुत्तर नजर आए.
* ‘स्वीकृत सदस्य’ पद ठुकराया, कोर कमिटी में शामिल होने की स्वीकृती
पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले द्वारा पार्टीजनों की नाराजगी कम करने के लिए एड. प्रशांत देशपांडे को ‘स्वीकृत सदस्य’ पद की पेशकश की गई, लेकिन उनके समर्थकों ने इसे यह कहते हुए सिरे से खारिज कर दिया कि, भाजपा के स्थानीय नेताओं और कोर कमिटी में शामिल ‘तिकडी’ द्वारा अब तक अमरावती शहर में करीब 50 लोगों को स्वीकृत सदस्य पद का ‘लॉलीपॉप’ दिया जा चुका है. जिसके चलते इस आश्वासन का कोई औचित्य भी नहीं बनता. साथ ही साथ एड. प्रशांत देशपांडे जिस तरह का राजनीतिक कद व रसूख रखते है, उसके आगे स्वीकृत सदस्य पद का कोई मूल्य व महत्व भी नहीं है. ऐसे में एड. प्रशांत देशपांडे के लिए पार्टी ने किसी अन्य सम्मानजनक पर्याय पर विचार करना चाहिए. जिसके बाद हुई चर्चा पश्चात अंततः यह तय हुआ कि एड. देशपांडे शहर को भाजपा की कोर कमिटी में शामिल किया जाएगा और उन्हीं की देखरेख में आगामी मनपा चुनाव में पार्टी अपने प्रत्याशियों का प्रचार करेगी. इसके साथ ही एड. प्रशांत देशपांडे को पार्टी की प्रदेश कार्यकारिणी में शामिल करने का आश्वासन भी पालकमंत्री बावनकुले ने अपनी ओर से दिया.
* कोर कमिटी की ‘तिकडी’ पर जमकर फूटा कार्यकर्ताओं का गुस्सा
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कोर कमिटी में शामिल शिवराय कुलकर्णी, जयंत डेहनकर और प्रा. दिनेश सूर्यवंशी पर कार्यकर्ताओं का गुस्सा साफ दिखाई दिया. कार्यकर्ताओं का आरोप था कि इन्हीं के माध्यम से टिकट वितरण में मनमानी हुई और जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी की गई. साथ ही साथ यहां तक आरोप लगाए गए कि, टिकट बंटवारे के लिए ‘डबल करंसी’ का भी जमकर प्रयोग हुआ और कुछ स्थानों पर तो पार्टी के लिए सालोसाल से काम करनेवाले निष्ठावानों की अनदेखी करते हुए अन्य दलों से आयातीत प्रत्याशियों को पार्टी की टिकट दी गई. यही वजह है कि, आज पार्टी को सबसे अधिक असंतोष व बगावत का सामना करना पड रहा है और पार्टी के कई पुराने निष्ठावानों ने ऐन समय पर पाला बदलते हुए अन्य समविचारी दलों से खुद के लिए टिकट हासिल किए है. जिसका जाहीर तौर पर खुद भाजपा को ही मनपा चुनाव में नुकसान उठाना पड सकता है.
* 4 को सीएम फडणवीस भी पहुंच सकते हैं एड. देशपांडे के घर पर
जहां एक ओर गत रोज भाजपा नेता व राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने एड. प्रशांत देशपांडे के घर पहुंचते हुए उनकी नाराजगी को दूर करने का प्रयास किया. जिसके बाद एड. देशपांडे समर्थकों द्वारा लगाए गए आरोपों के चलते भाजपा के भीतर चल रहा घमासान और भी मुखर होकर सामने आया. वहीं दूसरी ओर भाजपा संगठन में मचे इस घमासान के बीच अब यह चर्चा तेज हो गई है कि कल रविवार 4 जनवरी को अमरावती मनपा क्षेत्र में भाजपा के प्रचार अभियान का शुभारंभ करने हेतु अमरावती पहुंच रहे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी खुद एड. प्रशांत देशपांडे के निवास पर पहुंच सकते हैं. यदि ऐसा होता है तो इसे संगठन में डैमेज कंट्रोल की बड़ी कवायद के रूप में देखा जाएगा. कुल मिलाकर, अमरावती शहर भाजपा में टिकट बंटवारे को लेकर उठे सवालों ने संगठन की अंदरूनी कलह को सार्वजनिक कर दिया है. अब देखना होगा कि शीर्ष नेतृत्व इस संकट से पार्टी को कैसे उबारता है और नाराज कार्यकर्ताओं को किस तरह साधता है.
* पूर्व पार्षद तुषार भारतीय का नाम भी उछला बैठक में
पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के साथ एड. प्रशांत देशपांडे के घर पर हुई बैठक के दौरान शहर भाजपा के कद्दावर नेता व पूर्व पार्षद रहने के साथ ही अब एक बार फिर साईनगर प्रभाग से भाजपा के प्रत्याशी रहनेवाले तुषार भारतीय का नाम भी एक बार उछला, जब यह आरोप लगाया गया कि, एड. प्रशांत देशपांडे द्वारा भाजपा नेत्री व पूर्व सांसद नवनीत राणा के शंकर नगर स्थित निवासस्थान ‘गंगा-सावित्री’ पर भेंट दिए जाने के चलते तुषार भारतीय ने एड. प्रशांत देशपांडे से का था कि, ‘तुम पूर्व सांसद नवनीत राणा के घर पर गए थे, तो अब तुम्हारा टिकट कटना तय है.’ उल्लेखनीय है कि, पूर्व पार्षद तुषार भारतीय सहित भाजपा की कोर कमिटी में शामिल रहनेवाले पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता शिवराय कुलकर्णी की बडनेरा निर्वाचन क्षेत्र के विधायक रवि राणा के साथ विगत लंबे समय से अदावत चली आ रही है. जिसके चलते इन दोनों को राणा दंपति का धूर व कट्टर विरोधी माना जाता है. साथ ही राणा दंपति से किसी भी तरह की नजदिकी रखनेवाला कोई भी व्यक्ति कुलकर्णी व भारतीय की आंखों में नहीं सुहाता. जिसके चलते माना जा रहा है कि, किसी भी तरह की गुटबाजी से दूर रहते हुए भाजपा के सभी नेताओं व पदाधिकारी सहित समाज के सभी तबकों के साथ बेहद नजदिकी व घनिष्ट संबंध रखनेवाले एड. प्रशांत देशपांडे की टिकट गुटबाजी में भरोसा रखनेवाले कुछ नेताओं द्वारा जान-बुझकर काट दी गई. ताकि उन्हें ‘गंगा-सावित्री’ निवासस्थान पर जाने और राणा दंपति के साथ नजदिकी संबंध रखने हेतु सबक सिखाया जा सके.

* मंत्री बावनकुले के सामने ‘अमरावती मंडल’ की रही विशेष चर्चा
विशेष उल्लेखनीय है कि, दैनिक ‘अमरावती मंडल’ ने भाजपा की शिवसेना (शिंदे) व युवा स्वाभिमान पार्टी के साथ युति व सीट बंटवारे को लेकर एक सप्ताह तक चली मैराथॉन बैठकों के बावजूद भाजपा-शिंदे सेना की युति अंतिम समय में टूट जाने तथा भाजपा द्वारा युवा स्वाभिमान पार्टी के साथ कुछ सीटों का बंटवारा करते हुए अन्य सीटों पर अपने प्रत्याशी तय करने को लेकर अंतिम समय तक मची रहनेवाली अफरा-तफरी के संदर्भ में लगातार दो दिनों तक तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के साथ ही ऐन समय पर एड. प्रशांत देशपांडे की टिकट काट दी जाने की वजहों को लेकर राजनीतिक विश्लेषण प्रकाशित किया था. उन सभी खबरों की चर्चा बीती रात एड. प्रशांत देशपांडे के निवास पर पालकमंत्री बावनकुले के साथ हुई बैठक के समय हुई. इस दौरान एड. प्रशांत देशपांडे ने पालकमंत्री बावनकुले के समक्ष दैनिक ‘अमरावती मंडल’ के विगत दो-तीन दिनों के अंक सामने रखते हुए उन्हें बताया कि, शहर भाजपा को लेकर इन दिनों स्थानीय मीडिया द्वारा स्वसंज्ञान लेते हुए किस तरह की खबरे प्रकाशित की जा रही है और इसके चलते मनपा क्षेत्र के नागरिकों व आम मतदाताओं में किस तरह का संदेश जा रहा है. इस समय पालकमंत्री बावनकुले ने दैनिक ‘अमरावती मंडल’ में प्रकाशित खबरों का गंभीरतापूर्वक अवलोकन किया तथा वे ‘अमरावती मंडल’ के अंकों को अपने साथ भी लेकर गए. गलती हो गई, माफ कीजिए लेकिन भाजपा के साथ ही रहिए
ब्लंडर मिस्टेक हो गई, सच में गलती हुई है. इस गलती के लिए हमें माफ करें. आप हमारे अपने हैं, ऐसे शब्दों में मंत्री बावनकुले ने नाराज कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने का प्रयास किया. एड. प्रशांत देशपांडे के निवास पर हुई बैठक के दौरान पालकमंत्री बावनकुले ने एड. देशपांडे सहित उनके समर्थकों के समक्ष हाथ जोड़कर कहा कि हमसे वास्तव में गलती हुई है, इसका हमें पछतावा है. साथ ही उन्होंने अपील की कि महानगरपालिका चुनाव में सभी कार्यकर्ता सकारात्मक भूमिका निभाते हुए भाजपा को मजबूत करें.
* चुनाव न लड़ने वालों ने तय किए उम्मीदवार
कार्यकर्ताओं का कहना था कि उम्मीदवार चयन समिति में शामिल कई लोगों ने कभी कोई चुनाव नहीं लड़ा, फिर भी उन्होंने मनमाने तरीके से निष्ठावान कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर बाहरी लोगों को टिकट दिया. कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि महानगरपालिका चुनाव में उम्मीदवार तय करने की जिम्मेदारी जिन नेताओं पर थी, उन्होंने कई लोगों से पैसे लेकर टिकट बांटे. यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला जलाने वालों को भी भाजपा की उम्मीदवारी दिए जाने का आरोप लगाते हुए कार्यकर्ताओं ने गहरा रोष व्यक्त किया. इसके साथ ही यह आरोप भी लगाया गया कि, एक भी चुनाव लडने का अनुभव नहीं रहनेवाले शिवराय कुलकर्णी, दिनेश सूर्यवंशी और जयंत डेहनकर को चुनाव लडनेवाले प्रत्याशियों के चयन की जिम्मेदारी दी गई. जिन्होंने खुले तौर पर मनमानी की तथा इन तीनों ने उम्मीदवार चयन समिति में शामिल प्रो. रविंद्र खांडेकर और किरण पातुरकर को दरकिनार कर फैसले लिए.





