प्रधान सचिव के दौरे की रिपोर्ट अदालत में

बाल रोग और स्त्री रोग विशेषज्ञों के पदों को भरने के निर्देश

* 19 जनवरी को होने वाली सुनवाई की तरफ टिकी निगाहें
अचलपुर/दि.3-मेलघाट के चिखलदरा और धारणी तहसील के स्वास्थ्य केंद्रों में बाल रोग विशेषज्ञों और स्त्री रोग विशेषज्ञों के रिक्त पदों को एक सप्ताह के भीतर तुरंत भरा जाए, यह निर्देश मुंबई हाई कोर्ट ने दिया. जिस पर स्वास्थ्य विभाग ने बहुप्रतीक्षित रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए इस बात पर सहमति जताई कि मेलघाट में सभी रिक्त पद भरे जाएंगे.
चिखलदरा, धारणी और चुरणी के अस्पतालों में स्वास्थ्यकर्मियों का तबादला पद भरे जाने से पहले ही कर दिया गया. चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. अब सवाल उठ रहा है कि क्या स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी वाकई कुपोषण, शिशु और मातृ मृत्यु दर को कम करना चाहते हैं?
मेलघाट के आदिवासियों के लिए बुनियादी सुविधाओं की मांग करते हुए मुंबई उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई थी. उस याचिका के अनुसार, न्यायालय ने प्रधान सचिव के अधिकारियों को मेलघाट का मौके पर निरीक्षण करने का आदेश दिया था. 5 दिसंबर को विभिन्न विभागों के तीन अधिकारियों ने वहां निरीक्षण किया. प्रधान सचिव ने मेलघाट का दौरा किया था. उस घटना की रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग के सचिव डॉ. नीपूण विनायक ने 18 दिसंबर को अदालत में प्रस्तुत की. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा आवश्यक उपाय किए जाएंगे.
गौरतलब है कि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि शिशु मृत्यु दर में वृद्धि हुई है. धुलघाट रेलवे, बैरागड, हतरू, कलमखार, साद्राबाडी और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में एक सप्ताह के भीतर बाल रोग विशेषज्ञों और स्त्री रोग विशेषज्ञों की नियुक्ति करने का निर्देश दिया. हालांकि, मुंबई स्थित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने चिखलदरा, धारणी और चुरणी के अस्पताल में महिला अधिपरिचारिका, पुरुष अधिपरिचारिका, प्रयोगशाला वैधानिक अधिकारी, एक्स-रे टेक्निशियन, सफाई कामगार आदि आरोग्य कर्मचारियों के तबादले कर दिए थे. एक ओर तो अदालत को यह आश्वासन देना कि मेलघाट में बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी और दूसरी ओर स्वास्थ्यकर्मियों के तबादलों से पदों को खाली रखना, क्या यह अदालत का अपमान नहीं है? यही सवाल अब उठ रहा है. इसलिए सबकी निगाहें 19 जनवरी को अदालत में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं.
* मेलघाट में नियमबाह्य तबादले
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मेलघाट कर्मचारियों के तबादलों के बाद, कुछ कर्मचारियों को उस आदेश के बावजूद स्थानांतरण कर दिया गया जिसमें कहा गया था कि तबादलों के बाद कर्मचारियों को तब तक स्थानांतरण नहीं किया जाना चाहिए जब तक वे अपना कार्यभार ग्रहण न कर लें. मेलघाट में पहले से ही रिक्त पद मौजूद होने के बावजूद, इस नियम की अनदेखी करते हुए कर्मचारियों को बर्खास्त करना कितना उचित हो सकता है? इसलिए, क्या मुंबई में बैठे स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी वास्तव में कुपोषण, शिशु और मातृ मृत्यु दर को कम करना चाहते हैं? यह सवाल अब उठ रहा है.
वरिष्ठ स्तर से तबादले किए गए. इसलिए, उन्हें मुक्त कर दिया गया है. रिक्त पदों पर शीघ्र ही नियुक्तियां की जाएंगी.
-डॉ. विनोद पवार, जिला शल्य चिकित्सक,
अमरावती.

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