महावितरण के बिजली क्षेत्र का निजीकरण!
13 मंडलों में फ्रेंचाइजी नियुक्ति को लेकर सीएम फडणवीस पर वादाखिलाफी का आरोप

नागपुर/दि.5 – मुख्यमंत्री एवं ऊर्जा मंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विभिन्न कामगार संगठनों को यह स्पष्ट आश्वासन दिया था कि राज्य में बिजली क्षेत्र का किसी भी प्रकार का निजीकरण नहीं किया जाएगा. लेकिन इसके विपरीत महावितरण के 13 मंडलों (सर्कल्स) में बिजली वितरण की जिम्मेदारी निजी कंपनियों को फ्रेंचाइजी आधार पर सौंपे जाने से विवाद खड़ा हो गया है. महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी वर्कर्स फेडरेशन ने इस निर्णय को प्रत्यक्ष निजीकरण करार देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर वचनभंग का गंभीर आरोप लगाया है और इस फैसले का तीव्र विरोध दर्ज कराया है.
महावितरण द्वारा जिन मंडलों में फ्रेंचाइजी नियुक्त की गई है, उनमें- जालना, छत्रपति संभाजीनगर (शहर व ग्रामीण), नांदेड, परभणी, हिंगोली, वाशिम, अकोला, बुलढाणा, यवतमाल, सोलापुर, धाराशिव और बीड शामिल हैं. फेडरेशन ने याद दिलाया कि 4 जनवरी 2023 को बिजली क्षेत्र की 27 कामगार यूनियनों द्वारा बुलाई गई राज्यव्यापी हड़ताल के दौरान मुख्यमंत्री फडणवीस ने महावितरण, महापारेषण और महानिर्मिती-तीनों कंपनियों में किसी भी प्रकार का निजीकरण नहीं करने का आश्वासन दिया था. साथ ही इन कंपनियों को आर्थिक रूप से सशक्त करने की बात भी कही गई थी. अब फ्रेंचाइजी मॉडल लागू कर उस वचन से पीछे हटने का आरोप लगाया गया है.
* फ्रेंचाइजी मॉडल पहले भी रहा है विफल
फेडरेशन के अध्यक्ष मोहन शर्मा ने कहा कि महाराष्ट्र में फ्रेंचाइजी मॉडल पूरी तरह विफल सिद्ध हो चुका है. उन्होंने बताया कि तत्कालीन औरंगाबाद (अब छत्रपति संभाजीनगर), नागपुर और जलगांव में फ्रेंचाइजी कंपनियां अनुबंध अवधि पूरी होने से पहले ही काम छोड़कर चली गई थीं. राष्ट्रीय स्तर पर भी ओडिशा और उत्तर प्रदेश में फ्रेंचाइजी प्रयोग असफल रहा है.
* जब कंपनियां मुनाफे में हैं, तो निजीकरण क्यों?
महावितरण किसानों, आदिवासियों, बीपीएल वर्ग, पावरलूम उद्योग और अन्य उपभोक्ताओं को सामाजिक उत्तरदायित्व निभाते हुए रियायती दरों पर बिजली आपूर्ति करती है. राजनीतिक हस्तक्षेप, औद्योगिक रियायतें और बकाया माफी के बावजूद महावितरण 478 करोड़ रुपये, महापारेषण 1500 करोड़ रुपये, महानिर्मिती 100 करोड़ रुपये के मुनाफे में है. ऐसे में मुनाफे में चल रही सार्वजनिक कंपनियों का निजीकरण किसके लाभ के लिए किया जा रहा है? यह सवाल फेडरेशन के अध्यक्ष मोहन शर्मा और महासचिव कृष्णा भोयर ने उठाया है.
कुल मिलाकर फ्रेंचाइजी निर्णय को लेकर कामगार संगठनों का तीव्र विरोध जारी है. इसके चलते महावितरण, राज्य सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच आने वाले दिनों में तेज संघर्ष के संकेत मिल रहे हैं.





