आरोप-प्रत्यारोप वाली राजनीति के दौर में मूलभूत मुद्दे बेदखल

राजनीतिक दलों के प्रचार में जन समस्याओं की जबरदस्त अनदेखी

* हर कोई विकास को लेकर कर रहा बडे-बडे दावे, विकास का प्रारुप किसी के पास नहीं
* साफ-सफाई, यातायात, सार्वजनिक उद्यान, क्रीडांगण, स्वच्छता गृह व शौचालय जैसे मुद्दों पर कोई बात नहीं
* नई इलेक्ट्रीक बसों को लाने व आवारा कुत्तों की समस्या को निपटाने की कोई चर्चा नहीं
अमरावती/दि.6 – इस समय महानगर पालिका के चुनाव की जबरदस्त धामधूम चल रही है और सभी राजनीतिक दलों द्वारा जोर-शोर से अपने प्रत्याशियों का प्रचार किया जा रहा है. साथ ही साथ कुछ राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरु हो चुका है. परंतु इस पूरे चुनावी शोर-गुल के बीच अमरावती शहर और यहां के आम नागरिकों की मूलभूत समस्याओं का मुद्दा कहीं पर दबा-कुचला पडा हुआ है. जिसकी लगभग सभी राजनीतिक दलों और चुनाव लड रहे प्रत्याशियों द्वारा जमकर अनदेखी की जा रही है. कहने को तो गली-मोहल्लों में भोंपू लगाकर घुम रहे प्रचार रथों के जरिए सभी राजनीतिक दलों एवं उनके प्रत्याशियों द्वारा अपने-अपने प्रभाग सहित पूरे शहर के विकास को लेकर बडे-बडे वादे और दावे किए जा रहे है. परंतु विकास को लेकर कोई स्पष्ट विजन या प्रारुप किसी के भी पास नहीं है, यह भी अपने-आप में एक खुली हकीकत है.
बता दें कि, किसी भी शहर के विकास का केंद्रबिंदू उस शहर के स्थानीय निकाय को कहा जाता है. इस लिहाज से अमरावती शहर में स्थानीय निकाय के तौर पर अमरावती महानगर पालिका की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण कही जा सकती है. चूंकि इस समय अमरावती महानगर पालिका के चुनाव की प्रक्रिया चल रही है. जिसके चलते सभी राजनीतिक दलो में मनपा की सत्ता हासिल करने हेतु जबरदस्त धामधूम व गहमा-गहमी वाला माहौल है. साथ ही नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि तक अलग-अलग राजनीतिक दलों के बीच युति व आघाडी को लेकर जबरदस्त उठापटक वाला दौर चलता रहा. जिसके चलते नामांकन दाखिल करने का समय समाप्त होने से ऐन पहले तक राजनीतिक दलों ने अपने अधिकृत प्रत्याशियों के नामों को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले थे और एक झटके के साथ बी-फॉर्म जारी करते हुए अधिकृत प्रत्याशियों के नामों की सूची घोषित की गई. परंतु खास बात यह रही कि, इस तमाम उठापटक के बीच मनपा की सत्ता मिलने के बाद अमरावती शहर के विकास के लिए कौन-कौनसे काम किए जाएंगे तथा विकास को लेकर क्या विजन होगा, इसका कहीं कोई उल्लेख नहीं हुआ और इसे लेकर किसी भी राजनीतिक दल द्वारा कोई घोषणापत्र या वचननामा भी जारी नहीं किया गया.
ऐसे में कहा जा सकता है कि, सभी राजनीतिक दलों ने चुनावी गहमा-गहमी के बीच शहर की मूलभूत सुविधाओं एवं जनसमस्याओं की अनदेखी करते हुए उन्हें लगभग हाशिए पर डाल दिया और जनता भी मूकदर्शक बनकर तमाम राजनीतिक उठापटक को तमाशे के तौर पर देखने के लिए मजबूर रही. साथ ही अब जब राजनीतिक दलों एवं उनके प्रत्याशियों द्वारा आम मतदाताओं के बीच जाकर अपना प्रचार किया जा रहा है, तो प्रचार हेतु घुमाए जा रहे भोंपूओं के जरिए और घर-घर जाकर बांटे जा रहे पॉम्पलेट के माध्यम से विकास को लेकर बडे-बडे वादे व दावे किए जा रहे है. लेकिन असल हकीकत यह है कि, ऐसे सभी वादों व दावों को हवा-हवाई कहा जा सकता है. क्योंकि इनका असल जमीनी हकीकत से कोई वास्ता नहीं है.
उल्लेखनीय है कि, अमरावती शहर की पहचान किसी समय शैक्षणिक व सांस्कृतिक नगरी के तौर पर रही. परंतु अनुशासनहीन व नियोजनशून्य कामकाज, मूलभूत सेवाओं व सुविधाओं की जबरदस्त अनदेखी तथा केवल अपने आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए अमल में लाई जानेवाली अतार्किक योजनाओं के चलते अमरावती शहर में कई तरह की समस्याएं पैदा होनी शुरु हुई. जिन्हें हल करने की बजाए उन्हीं समस्याओं को चुनावी मुद्दे बनाते हुए सालो-साल से राजनीति की जा रही है और इस बार भी मनपा चुनाव को ध्यान में रखते हुए उन्हीं मुद्दों को उछालकर ‘बासी कढी में उबाल लाने’ का प्रयास करते हुए आश्वासनों की थैलियां खोली जा रही है.
ध्यान दिलाया जा सकता है कि, हाल-फिलहाल के दौर में आयोजित रोजगार सम्मेलनों में नौकरी की आंस लेकर उमडे सुशिक्षित बेरोजगारों की भीड को देखते हुए समझा जा सकता है कि, अमरावती में बेरोजगारी की समस्या कितनी गंभीर है और अत्यल्प वेतनवाली निजी क्षेत्र की नौकरी हासिल करने के लिए भी बेरोजगार तैयार है. परंतु इसके बावजूद इतने गंभीर मामले पर किसी भी राजनीतिक दल द्वारा एक भी शब्द नहीं कहा जा रहा. वैसे कहने के लिए तो विगत रविवार को सीएम देवेंद्र फडणवीस ने अमरावती में अपने रोड-शो के दौरान अमरावती शहर में आईटी पार्क स्थापित करने की घोषणा कर डाली. लेकिन उन्हें भी शायद इस बात का अंदाजा नहीं है कि, ऐसी घोषणाएं अमरावतीवासी इससे पहले भी कई बार सुन चुके है. साथ ही आईटी पार्क के जरिए आईटी क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल रखनेवाले कुछ युवाओं को नौकरी मिल ही जाएगी. परंतु जिन युवाओं ने आईटी के अलावा किसी अन्य शाखा से पढाई की है, उनके रोजगार का क्या होगा. फिलहाल इसका जवाब भी किसी के पास नहीं है.
* अगले पांच वर्षों की कहीं कोई बात नहीं
ज्ञात रहे कि, इससे पहले मनपा चुनाव के समय सभी राजनीतिक दलों सहित चुनाव लडने के इच्छुकों द्वारा चुनाव की घोषणा होते ही अपने घोषणापत्रों व वचननामों को जारी किया जाता था. साथ ही अपने निर्वाचन क्षेत्र के प्रत्येक मतदाता तक अपना घोषणापत्र पहुंचना ही चाहिए, इस बात की ओर विशेष तौर पर ध्यान भी दिया जाता था. ऐसे घोषणापत्रों एवं वचननामों के जरिए मतदाताओं को बताया जाता था कि, यदि चुनाव में जीत मिलती है और मनपा की सत्ता भी प्राप्त होती है, तो अगले पांच वर्षों के दौरान कौन-कौनसे विकास कामों को करवाया जाएगा तथा क्षेत्र सहित शहर की किन-किन समस्याओं को हल किया जाएगा. परंतु इस बार किसी भी राजनीतिक दल अथवा प्रत्याशी द्वारा अपने चुनावी घोषणापत्र जारी नहीं किए गए है और किसी भी राजनीतिक दल अथवा प्रत्याशी ने शहर के विकास को लेकर अपना विजन भी मतदाताओं के सामने नहीं रखा है. जिसके चलते मतदाताओं में भी इस बार चुनाव को लेकर काफी हद तक संभ्रम देखा जा रहा है.
* अब प्रचार के लिए बचा है केवल 8 दिनों का समय
चूंकि आगामी 15 जनवरी को मनपा चुनाव हेतु मतदान कराया जाना है और मतदान का समय समाप्त होने से 48 घंटे पहले प्रत्यक्ष प्रचार का दौर खत्म हो जाएगा. जिसके बाद मतदाताओं द्वारा प्रत्याशियों से व्यक्तिगत संपर्क करने और गुप्त बैठकें करने का दौर चलेगा. जिसके चलते कहा जा सकता है कि, अब सभी राजनीतिक दलों व प्रत्याशियों के पास प्रचार हेतु महज 7-8 दिनों का समय बचा हुआ है. ऐसे में अब इतने कम समय में शहर के करीब 6.77 लाख मतदाताओं तक अपने चुनावी घोषणापत्र व वचननामे सहित विकास के विजन को पहुंचाना सभी राजनीतिक दलों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है.
* शहर की कुछ समस्याओं पर एक नजर


साफ-सफाई – स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में 3 से 10 लाख की जनसंख्या वाले शहरों के गुट में अमरावती शहर ने राष्ट्रीय स्तर पर अव्वल स्थान हासिल किया. जबकि हकीकत यह है कि, अमरावती शहर में जगह-जगह कचरे व गंदगी के ढेर लगे हुए है और घरों से निकलने वाले गंदे पानी व कचरे के निस्सारण की व्यवस्था बुरी तरह से चरमराई हुई है.


– यातायात – अमरावती शहर में सार्वजनिक यातायात व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब है. क्योंकि शहर बस सेवा को स्थानीय जनसंख्या के लिहाज से अपर्याप्त कहा जा सकता है. शहर में नियोजनपूर्ण पार्किंग का अभाव है. साथ ही वाहनों की नियोजनशून्य व गैर अनुशासित आवाजाही के चलते शहर के प्रमुख मार्गो पर ट्रैफिक जाम की समस्या हमेशा ही बनी रहती है. जिसके चलते अमरावती के लिए स्वतंत्र यातायात प्रारुप तैयार किए जाने की जरुरत है.


– सार्वजनिक उद्यान व क्रीडांगण – अमरावती मनपा क्षेत्र में सार्वजनिक उद्यान बुरी तरह से दुरावस्था का शिकार है. साथ ही सुसज्जित क्रीडांगणों का भी शहर में अभाव है. इसके अलावा रास्तों के किनारे किसी वृक्ष के तने के पास पेवींग ब्लॉक लगाते समय वृक्ष की सुरक्षा एवं सौंदर्यीकरण को लेकर सामान्य नियमों का भी पालन नहीं होता.


– औद्योगिक वसाहत – अमरावती शहर की तीन औद्योगिक वसाहतों में अब भी बडे उद्योगों के आने की प्रतीक्षा है. पीएम मित्रा मेगा टेक्सस्टाइल पार्क जब शुरु होगा तब होगा. लेकिन स्थानीय लोगों को रोजगार कब उपलब्ध होगा, यह इस समय की सबसे बडी समस्या है.


– मूलभूत सुविधाएं – अमरावती शहर में सार्वजनिक स्थलों पर महिलाओं व पुरुषों के लिए स्वतंत्र व साफ-सुथरे स्वच्छता गृहों का जबरदस्त अभाव है, शहर बस सेवा के नाम पर पुरानी व खटारा बसे चलाई जा रही है. लंबे समय से नई इलेक्ट्रीक बसों के आने की बात कही जा रही है, परंतु नई बसे कब आएंगी किसी को नहीं पता है. ऐसे में कहा जा सकता है कि, शहरवासियों की मूलभूत सुविधा की ओर मनपा प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है.


– आवारा कुत्तों की समस्या – अमरावती शहर में सडकों पर घुमनेवाले आवारा कुत्तों को पकडकर उनकी नसबंदी करने का काम विगत लंबे समय से बंद पडा है. जिसके चलते शहर में आवारा कुत्तों की संख्या बेतहाशा बढती जा रही है और शहर की सडकों पर घुमते आवारा कुत्तों द्वारा कई बार लोगों पर धावा भी बोला जाता है. जिसके चलते अब तक कई लोग श्वान दंश का शिकार भी हो चुके है. नागरिकों की सुरक्षा व सलामती के लिहाज से इस समस्या की ओर भी ध्यान दिया जाना बेहद जरुरी है.

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