चुनाव आयोग के रेग्युलर नियम के कारण
कई प्रभागों में एक ईवीएम पर 2 और 3 वॉर्डों के प्रत्याशी

* 1 ईवीएम पर कुल 16 नाम हो सकते हैं दर्ज, कई वॉर्डों में 2, 3 या 4 प्रत्याशी ही हैं
* प्रत्याशी संख्या के हिसाब से तय होगी ईवीएम मशीनों की संख्या
* एक वॉर्ड के प्रत्याशियों के बाद एक बटन छोडकर दूसरे वॉर्ड के प्रत्याशियों के नाम रहेंगे ईवीएम पर
* हर वॉर्ड के लिए प्रत्याशियों के नाम के बाद ‘नोटा’ की रहेगी बटन
अमरावती/दि.6 – आगामी 15 जनवरी को होने जा रहे अमरावती महानगर पालिका के चुनाव बहुसदस्यीय प्रभाग पद्धती से कराए जा रहे है. जिसकी मतदान प्रक्रिया को लेकर काफी हद तक उत्सुकता व असमंजस वाली स्थिति भी देखी जा रही है. साथ ही हर कोई यह जानने के लिए उत्सुक है कि, आखिर बहुसदस्यीय प्रभाग पद्धती के तहत होने जा रहे चुनाव में अलग-अलग वार्डों के लिए ईवीएम मशीनों की व्यवस्था किस तरह रहेगी और एक प्रभाग में शामिल अलग-अलग वार्डों के प्रत्याशियों के नाम ईवीएम मशीन पर किस तरह से दर्ज किए जाएंगे, इसे लेकर आम मतदाताओं में काफी हद तक भ्रम की स्थिति भी है. जिसे दूर करने के लिए दैनिक ‘अमरावती मंडल’ ने मनपा की निर्वाचन अधिकारी तथा आयुक्त व प्रशासन सौम्या शर्मा-चांडक से विशेष तौर पर बात की. जिन्होंने निर्वाचन आयोग के प्रचलित नियमों के नुसार की जानेवाली व्यवस्था को विस्तृत ढंग से बताया और कहा कि, बहुसदस्यीय प्रभाग पद्धती के तहत कराई जानेवाली मतदान प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी रहेगी. जिसमें मतदाताओं को कहीं पर भी किसी संभ्रम या दिक्कत का सामना नहीं करना पडेगा.
आयुक्त सौम्या शर्मा द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक मनपा चुनाव को लेकर ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) की व्यवस्था चुनाव आयोग के नियमित नियमों के अनुसार की जाएगी. चूंकि कई ऐसे प्रभाग हैं, जहाँ एक ही ईवीएम पर दो अथवा तीन वॉर्डों के प्रत्याशियों के नाम दर्ज किए जाएंगे. चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार एक ईवीएम में अधिकतम 16 प्रत्याशियों के नाम दर्ज किए जा सकते हैं. इसी नियम के तहत जिन वॉर्डों में प्रत्याशियों की संख्या कम है, वहाँ एक ही ईवीएम पर एक से अधिक वॉर्डों के उम्मीदवारों को शामिल किया जा रहा है. किसी भी मतदान केंद्र पर ईवीएम मशीनों की संख्या प्रत्याशियों की कुल संख्या के अनुसार निर्धारित की जाती है. कई वॉर्डों में केवल 2, 3 या 4 प्रत्याशी होने के कारण अलग-अलग वॉर्डों के उम्मीदवारों को एक ही मशीन में शामिल किया जा रहा है.
* ईवीएम पर नामों की व्यवस्था कैसे होगी
एक वॉर्ड के सभी प्रत्याशियों के नाम पहले क्रम से दर्ज होंगे. इसके बाद ‘नोटा’ के पर्याय वाली बटन रहेगी और फिर इसके बाद एक बटन खाली छोडते हुए अगले वॉर्ड के प्रत्याशियों के नाम इसी तरह से दर्ज रहेंगे. पहले व दूसरे वॉर्ड के प्रत्याशियों व दो नोटा बटन के बाद ईवीएम मशीन पर जगह यानि बटन खाली उपलब्ध रहने पर इसी तरह से एक बटन छोडकर तीसरे वॉर्ड के प्रत्याशियों के नाम दर्ज रहेंगे और यदि दूसरे अथवा तीसरे वॉर्ड के सभी प्रत्याशियों के नाम पहली ईवीएम मशीन पर पूरे नहीं होते है, तो शेष बचे नामों को दूसरी ईवीएम मशीन पर दर्ज करते हुए उसके बाद अगले यानि दूसरे, तीसरे अथवा चौथे वॉर्ड के प्रत्याशियों के नाम दर्ज किए जाएंगे. खास बात यह है कि, प्रत्येक वॉर्ड के प्रत्याशियों के नाम के बाद ‘नोटा’ के पर्याय हेतु बटन उपलब्ध कराते हुए अगली एक बटन को खाली छोड़ा जाएगा तथा उस खाली बटन के बाद अगले वॉर्ड के प्रत्याशियों के नाम दर्ज किए जाएंगे, ताकि मतदाताओं को वॉर्ड परिवर्तन की स्पष्ट जानकारी मिल सके.
उपरोक्त जानकारी देते हुए मनपा की निर्वाचन अधिकारी सौम्या शर्मा ने मनपा क्षेत्र के मतदाताओं से अपील की है कि वे मतदान से पहले ईवीएम पर प्रदर्शित वॉर्ड नंबर और प्रत्याशी नाम ध्यानपूर्वक पढ़ें, ताकि किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न बने. यह व्यवस्था पूरी तरह से चुनाव आयोग के नियमों के अनुरूप है और इससे चुनाव प्रक्रिया को सुचारु एवं पारदर्शी बनाए रखने में मदद मिलेगी.
* नियम क्या कहता है?
चुनाव आयोग के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार एक ईवीएम पर अधिकतम 16 प्रत्याशियों के नाम दर्ज किए जा सकते हैं. प्रत्याशियों की संख्या 16 से कम होने पर दो, तीन या चार वॉर्डों के प्रत्याशियों को एक ही मशीन पर शामिल किया जा सकता है. ईवीएम की संख्या वॉर्ड नहीं, बल्कि कुल प्रत्याशी संख्या के आधार पर तय होती है.
* क्यों जरूरी हुई यह व्यवस्था?
इस बार कई प्रभागों में चुनावी दिलचस्पी अपेक्षाकृत कम दिखाई दी है. अनेक वॉर्ड ऐसे हैं जहाँ केवल 2 से 4 प्रत्याशी ही चुनाव मैदान में हैं. अलग-अलग वॉर्डों के लिए अलग ईवीएम लगाना व्यावहारिक और आर्थिक रूप से अनुचित माना गया. मशीनों, कर्मचारियों और सुरक्षा व्यवस्था का अनावश्यक विस्तार रोकने के लिए वॉर्डों का संयोजन किया गया. यानी यह व्यवस्था संसाधन बचत और प्रशासनिक दक्षता दोनों को ध्यान में रखकर की गई है.
* ईवीएम पर नामों की तकनीकी संरचना
मतदाता की सुविधा और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ईवीएम पर प्रत्याशियों की प्रस्तुति को विशेष तरीके से डिजाइन किया गया है. पहले एक वॉर्ड के सभी प्रत्याशियों के नाम क्रम से दर्ज होंगे. इसके बाद एक बटन खाली छोड़ा जाएगा, जो वॉर्ड बदलने का संकेत देगा. फिर अगले वॉर्ड के प्रत्याशियों के नाम दिखाई देंगे. हर वॉर्ड के प्रत्याशियों के अंत में अलग से ‘नोटा’ का बटन अनिवार्य रूप से रहेगा, ताकि मतदाता के अधिकारों में कोई कटौती न हो.
* मतदाताओं के सामने संभावित चुनौतियाँ
हालाँकि यह व्यवस्था नियमसम्मत है, लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ चुनौतियाँ भी सामने आ सकती हैं. कम जागरूक मतदाता गलत वॉर्ड के प्रत्याशी को वोट दे सकते हैं. नामों की अधिकता से पहली बार मतदान करने वालों में भ्रम की स्थिति बन सकती है. बुजुर्ग और कम शिक्षित मतदाताओं को अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी.
* चुनाव आयोग की तैयारी
इन्हीं आशंकाओं को देखते हुए चुनाव विभाग ने मतदान कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया है. मतदान केंद्रों पर वॉर्डवार चार्ट और संकेतक लगाने के निर्देश दिए हैं. मॉक पोल और मतदान से पहले मतदाताओं को मौखिक मार्गदर्शन देने की व्यवस्था की है.
* चुनावी असर क्या होगा?
विश्लेषकों के अनुसार कम प्रत्याशी वाले वॉर्डों में मत प्रतिशत पर असर पड़ सकता है. प्रत्याशी और उनके एजेंटों को मतदाताओं को अतिरिक्त समझाइश करनी पड़ेगी. सही जानकारी देने वाला प्रत्याशी रणनीतिक बढ़त हासिल कर सकता है. एक ईवीएम पर कई वॉर्डों की व्यवस्था तकनीकी, प्रशासनिक और आर्थिक संतुलन का परिणाम है. यह व्यवस्था तभी सफल होगी जब मतदाता जागरूक हों और चुनाव प्रशासन पूरी पारदर्शिता के साथ इसका क्रियान्वयन करे. सही जानकारी के अभाव में भ्रम, और सही मार्गदर्शन से सुचारु मतदान, यही इस व्यवस्था की असली कसौटी होगी.





