पुराने पन्ने पलटे तो जवाब देना मुश्किल होगा
डेप्युटी सीएम अजित पवार को मंत्री बावनकुले की सख्त चेतावनी

* बोले – 70 हजार करोड़ के मामले का फैसला अभी बाकी
पुणे/दि.6 – पुणे और पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका चुनावों की पृष्ठभूमि में भाजपा और राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट) के बीच राजनीतिक तनाव खुलकर सामने आ गया है. 70 हजार करोड़ रुपये के कथित घोटाले के मुद्दे पर उपमुख्यमंत्री अजित पवार द्वारा भाजपा पर निशाना साधे जाने के बाद अब भाजपा भी आक्रामक हो गई है. भाजपा नेता और राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने अजित पवार को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि 70 हजार करोड़ के मामले का फैसला अभी आया नहीं है, अगर हमने पुराने पन्ने पलटे तो उन्हें भी बोलने की गुंजाइश नहीं रहेगी.
* घोटाले के मुद्दे पर भाजपा की घेराबंदी
पुणे और पिंपरी-चिंचवड महापालिका चुनावों के दौरान 70 हजार करोड़ के कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है. अजित पवार ने यह कहकर भाजपा को असहज स्थिति में डाल दिया कि जिन लोगों ने आरोप लगाए, उन्हीं के साथ आज मैं सरकार में बैठा हूं. इसके बाद भाजपा की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है. मीडिया से बातचीत में मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा, यह कोई गर्व करने वाली बात नहीं है. मामला न्यायालय में विचाराधीन है. सुनवाई चल रही है और अभी उसका कोई निर्णय नहीं हुआ है. फैसला आने के बाद आगे की स्थिति साफ होगी.
* बहुत कुछ कहा जा सकता है, लेकिन यह समय नहीं
भाजपा नेता व राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने अजित पवार को संयम बरतने की सलाह देते हुए कहा कि, अजितदादा एक प्रगल्भ और अनुभवी नेता हैं. इतनी छोटी नगर निगम की चुनावी राजनीति के लिए इस तरह के बयान देकर महायुति में मतभेद पैदा करना उचित नहीं है. बहुत कुछ बोला जा सकता है, लेकिन यह वह समय नहीं है. उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए कि चुनावी लाभ के लिए ऐसे मुद्दे उछालना महायुति की एकजुटता को नुकसान पहुंचा सकता है.
* समन्वय बैठक में जो तय हुआ, वैसा ही व्यवहार करें
इसके साथ ही मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने आगे कहा कि महायुति की समन्वय बैठक में यह स्पष्ट रूप से तय हुआ था कि सार्वजनिक मंचों पर ऐसे बयान नहीं दिए जाएंगे, जिससे गठबंधन में मतभेद दिखाई दें. उन्होंने कहा कि, अजित पवार राज्य के वरिष्ठ और महत्वपूर्ण नेता हैं. मैं उन्हें ज्यादा सलाह नहीं दूंगा, लेकिन पिंपरी-चिंचवड में वे लंबे समय तक सत्ता में रहे हैं. अगर हमने पुराने रिकॉर्ड और फैसलों के पन्ने पलटे, तो उन्हें भी जवाब देना मुश्किल हो जाएगा. हमारी ऐसी कोई इच्छा नहीं है, लेकिन उन्हें तय मर्यादाओं का पालन करना चाहिए.
ऐसे में कहा जा सकता है कि, नगर निगम चुनावों के बहाने 70 हजार करोड़ का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक हथियार बनता दिख रहा है. अजित पवार के बयानों और बावनकुले की चेतावनी से यह साफ है कि महायुति के भीतर असंतोष और दबाव दोनों बढ़ रहे हैं. आने वाले दिनों में यह टकराव और तेज होगा या पर्दे के पीछे समझौता होगा-इस पर राज्य की राजनीति की नजर टिकी हुई है.





