पिता की सामाजिक विरासत को आगे बढा रहे शेख जफर

समाज में रुतबा बढाने स्व. दादासाहेब गवई ने दिया था सहयोग

* चुनाव में मिल रहा मतदाताओं का समर्थन और प्यार
अमरावती/दि.11-शेख जब्बार एक ऐसा नाम है. जो मजलूमों का मसीहा थे. उन्होंने अपने जीवन में सामाजिक कार्य से लोगों की सहायता करने का प्रयास किया. जिसके लिए उन्हें अपनी जान तक गंवानी पडी थी. पिता की उसी सीख और विरासत के साथ केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक क्षेत्र में अग्रणी शेख जफर का नाम सर्वत्र सभी की जुबान पर है. उन्होंने पिता की विरासत को अपने सामाजिक जीवन का आधार बनाकर इस महापालिका चुनाव में जनसेवा का फिर एक बार संकल्प लिया है.
साल 1999 में महापालिका के स्वीकृत पार्षद बने स्व. शेख जब्बार ने हमेशा ही कांग्रेस का दामन थामे रखा. उन्होंने पूर्व राज्यपाल स्व. दादासाहेब गवई के सहयोग एवं उनके विचारों का सम्मान करते हुए अपने सामाजिक कार्य की नींव रखी. लोगों को विशेष कर जरुरतमंदों की सहायता के लिए शेख जब्बार हमेशा ही अग्रेसर रहे. साल 1999 में स्व. दादासाहेब गवई के निधी से उन्होंने मौलाना आजाद कॉलोनी में पहला ‘गौसिया मेमोरियल हॉल’ का निर्माण किया. जो समाज के साथ स्थानीय लोगों के लिए नि:शुल्क रखा गया था. इसी साल विधायक चुनाव में उन्होंने तत्कालीन कांग्रेस विधायक को पूरा सहयोग देते हुए उनकी जीत में अहम भूमिका निभाई. साथ ही भाजपा के गढ़ को खत्म किया था. इस दौरान स्व. शेख जब्बार के अब तक के सामाजिक कार्य को देखते हुए विधायक की रेस में उनका भी नाम लिया जा रहा था. लेकिन ऐन समय उनकी टिकट कांटी गई. लेकिन उन्होंने इस बात से नाराज न होकर अपने सामाजिक कार्य को और दुगुनी तेजी से आगे बढाया. उनके इसी कार्य को देखते हुए पूर्व राज्यपाल स्व. दादासाहेब गवई, रामकिशोर सोमाणी, सुधाकर सव्वालाखे, मनदीप सिंग मोंगा, चरणसिंग धामी, बाबू अ. सत्तार, अनिल गोंडाणे, दे.झा.वाकपांजर, पूर्व विधायक लालसिंग राठोड, मिरा रोड मुम्बई कांग्रेस के पूर्व विधायक मुजफ्फर हुसैन, पूर्व मंत्री अनिस अहमद का भी उन्हें सहयोग मिलता रहा. इस कारण उन्होंने 80 व 90 के दशक में शहर में रक्तदान का अभियान शुरु किया था. साथ ही उस समय नि:शुल्क एम्बुलेंस सेवा भी शुरु की. जिसका आज भी लोग लाभ ले रहे है.
स्व. शेख जब्बार का नाम तथा उनका कार्य नमुना परिसर से शहर के हर कोने-कोने में बच्चों से लेकर बडे बुढों की जबान पर था. लेकिन मरहूम शेख जब्बार भाई की मृत्यु के बाद मरहूम शेख जब्बार के परिवार को महापालिका चुनाव में मौका मिलना चाहिए. यह जनता की चाहत थी. इस चाहत को पुरा करते हुए कांग्रेस ने साल 2002 के चुनाव में मरहूम शेख जब्बार की बेगम आबेदाबी को टिकट दी. उन्होंने साल 2007 तक पार्षद के रुप में क्षेत्र के विकास पर ध्यान केंद्रित किया. इसी बीच साल 2004-05 में उनके बेटे शेख जफर अपनी मां के सामाजिक कार्य में हाथ बटाने आगे आये. उस दौर में शहर में विधायक के चुनाव में शेख जफर का कांग्रेस विधायक को मुस्लीम क्षेत्र की दृष्टी से मिला सहयोग तत्कालीन विधायक के लिए एक यादगार और शानदार जीत का सबब बना. साल 2007 में मरहूम शेख जब्बार की बेगम ने खुद की बजाय इस बार उनके बेटे शेख जफर को मौका दिया जाये, ऐसी गुजारिश की. कांग्रेस ने उन्हें साल 2007 और 2012 में पार्टी से टिकट देकर जीत का सेहरा उनके सिर पर सजाया. साल 2012 में जब पूर्व राष्ट्रपति के पुत्र रावसाहेब शेखावत को विधायक चुनाव की टिकट दी गई. उस समय भी शेख जफर ने कांग्रेस का साथ नहीं छोडा. उनकी इसी वफादारी के चलते साल 2012 में उन्हें उपमहापौर पद की जिम्मेदारी सौंपी गयी. लगातार दो बार वे इस पद पर विराजमान रहे.
साल 2017 का चुनाव आसान नहीं था. क्योंकि उस समय मुस्लिम बहुल क्षेत्र में कांग्रेस का वर्चस्व कम करने एमआईएम ताकदवर बनाने की कोशिश की गई. इसके लिए एमआईएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी की दो सभाएं तक ली गई, लेकिन शेख जफर ने हार नहीं मानी. पूरी ताकत के साथ केवल खुद नहीं बल्कि कांग्रेस के पुरे पैनल को विजयी बनाया. इतने सालों तक मरहूम शेख जब्बार व उनके पश्चात पिता की विरासत को आगे बढाते हुए शेख जफर ने कांग्रेस के साथ इमानदारी से काम किया. लेकिन इस मनपा चुनाव में उन्हीं की पार्टी ने अनदेखा करने से आखिरकार उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजीत पवार गुट) के विधायक संजय खोडके का साथ देने तथा उनके साथ काम करने की इच्छा जाहीर की. उन्होंने भी मरहूम शेख जब्बार व पूर्व पार्षद शेख जफर के काम को देखते हुए इस बार राकांपा (अजीत पवार गुट) से शेख जफर को उम्मीदवारी घोषित की है.
शेख जफर को उनके प्रभाग में विविध मान्यवरों का सहयोग मिल रहा है. जिसमें अख्तर हुसैन साहब, मौलवी लियाकत साहब इमाम (छायानगर मस्जीद), अब्दुल रज्जाक उर्फ रज्जुभाई, हाजीर नईम टिम्बर मर्चन्ट, पूर्व पार्षद अयुब भाई, डॉ. इब्राहिम (मेहंदिया कॉलोनी), मिर्जा एजाज बेग (मौलाना आजाद कॉलोनी), हाजी बशीर आर्यन मर्चन्ट (जाकीर कॉलोनी), हाजी नजीर डिस्कवाले, हाजी अब्दुल जब्बार (मोटर पार्टवाले पाकिजा कॉलोनी), जावेद मन्सुरी, (मोटर पार्टवाले), मुन्नाभाई टायरवाले, मजहर मास्टर, अशफाक मास्टर, एड. शब्बीर हुसैन, पूर्व पार्षद नुर खां, अब्दुल मन्नान मैकेनिक (हबीब नगर), अब्दुल मतीन (दावत किराणा), नदीम खान (नौशाद किराणा), मो. शाहिद ट्रक ओनर समेत अन्य ने भी उन्हें समर्थन दिया है. उनके साथ और भी लोग जुडने लगे है. वे आज भी अपने मरहूम पिता शेख जब्बार की याद में हर साल मधुसुदन वृद्धाश्रम, जिला सामान्य अस्पताल, जिला महिला अस्पताल में फल वितरण के साथ मरीजों को सहयोग देते हैं.

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