मराठी शालाओं के संवर्धन के लिए क्या कर रहे हो?
हाईकोर्ट का सवाल, 27 जनवरी तक मांगा जवाब

नागपुर/दि.14 – मराठी शाला का संवर्धन और मराठी भाषा को प्रोत्साहन देने के लिए राज्य सरकार क्या कर रही हैैं, ऐसा सवाल मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने सोमवार को किया है और इस पर आगामी 27 जनवरी तक जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं.
मराठी शाला बचाने के लिए अखिल भारतीय दुर्बल समाज विकास संसाधन संस्था ने जनहिता याचिका दायर की है. इस पर न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोडे के सामने सुनवाई की. न्यायालय में मराठी भाषिक राज्य में ही मराठी की तरफ अनदेखी किए जाने से निराशा व्यक्त की हैं. राज्य की राजभाषा मराठी हैं. इस कारण राज्य को मराठी भाषा समझनेवाले अधिकारी की आवश्यकता है. ऐसे अधिकारी न रहने पर राज्य चलाना ही कठिन होगा, अंग्रेजी का मराठी में भाषांतर करनेवाले कर्मचारी नियुक्त करने पडेंगे, भविष्य में ऐसे कर्मचारी भी मिलेंगे या नहीं यह कहा नहीं जा सकता, ऐसा मत न्यायालय ने उपरोक्त निर्देश देते हुए व्यक्त किया. नागपुर मनपा की मराठी शाला में सिखे हुए विद्यार्थी विविध स्थानों पर उच्च पद पर कार्यरत हैं. लेकिन फिलहाल इन शालाओं की बुरी अवस्था हैं इस कारण इन शालाओं में आवश्यक सुविधा उपलब्ध कर दी जाए, शालाओं को अत्याधुनिक स्वरूप दिया जाए, गुणवत्ताप्राप्त शिक्षकों की नियुक्ति की जाए, ऐसा याचिकाकर्ता का कहना है. याचिकाकर्ता की तरफ से एड. आशुतोष धर्माधिकारी ने पक्ष रखा.





