अधिकांश प्रभागों में महायुति के घटक दलों के बीच ही भिडंत

भाजपा, शिंदे सेना व राकांपा के बीच सीधा मुकाबला

अमरावती/दि.14 – अमरावती महानगर पालिका का चुनाव 22 प्रभागों में 87 सदस्य पदों के लिए हो रहा है तथा 661 प्रत्याशी चुनावी मैदान में है. जिसमें से अधिकांश स्थानों पर महायुति में शामिल घटक दलों के बीच ही मुकाबला होता नजर आ रहा है. राज्य की सत्ता में साथ-साथ, लेकिन अमरावती महानगर पालिका में आमने-सामने ऐसी स्थिति महायुति के घटक दलों के बीच दिखाई दे रही है. जिसके चलते कई सीटों पर महायुति के घटक दल रहनेवाले भाजपा, शिंदे सेना और राकांपा के बीच ही मुख्य चुनावी भिडंत वाली स्थिति है. साथ ही साथ महायुति में शामिल रहनेवाली युवा स्वाभिमान पार्टी द्वारा भी अपने मित्र दलों को अच्छी-खासी चुनौती दी जा रही है. ऐसे में महायुति के समर्थक रहनेवाले मतदाताओं में इस बार प्रत्याशी चुनने और मतदान करने को लेकर काफी हद तक संभ्रमवाली स्थिति है.
बता दें कि, वर्ष 2022 में महानगर पालिका के चुनाव होना अपेक्षित था. जिसे उस समय कोविड संक्रमण, लॉकडाउन व ओबीसी आरक्षण के लंबित मामले की वजह से नहीं कराया जा सका और अब जनवरी 2026 में मनपा चुनाव का मुहूर्त निकला है. चुनाव के घोषित होते ही राजनीतिक दलों के बीच युति और आघाडी को लेकर बातचीत शुरु हुई. परंतु सीटों के बंटवारे को लेकर अंतिम समय तक किसी भी राजनीतिक गठबंधन को लेकर बात नहीं बन पाई. जिसके चलते महायुति में शामिल तीनों घटक दलों अलग-अलग चुनाव लडने का निर्णय लिया. ऐसे में लगभग सभी सीटों पर भाजपा, शिंदे सेना, राकांपा (अजीत पवार) व युवा स्वाभिमान पार्टी के बीच सीधा मुकाबला हो रहा है. वहीं कांग्रेस ने कुछ सीटों पर शिवसेना उबाठा के साथ आघाडी की है. जबकि ज्यादातर सीटों पर कांग्रेस और शिवसेना उबाठा भी आमने-सामने है. उल्लेखनीय है कि, मनपा चुनाव के लिए युति करने को लेकर भाजपा व शिंदे सेना के नेताओं के बीच 4 से 5 बार बैठकों का दौर चला, परंतु शिंदे सेना को अपेक्षा के अनुरुप सीटें नहीं मिलने के चलते युति को लेकर बात नहीं बन पाई. जिसके चलते भाजपा व शिंदे सेना के प्रत्याशी कई प्रभागों में एक-दूसरे के खिलाफ प्रचार करते दिखाई दे रहे है. यही स्थिति भाजपा व युवा स्वाभिमान पार्टी के साथ भी है. भाजपा और शिंदे सेना के बीच युति को लेकर मामला जम जाने के बाद भाजपा ने युवा स्वाभिमान पार्टी के लिए 6 सीटें छोडी थी. लेकिन इसके बावजूद युवा स्वाभिमान पार्टी ने अन्य कई सीटों पर अपने प्रत्याशियों को भाजपा प्रत्याशियों के खिलाफ चुनावी मैदान में उतार दिया. जिसके चलते भाजपा और युवा स्वाभिमान पार्टी की युति भी अब टूट गई है. वहीं दूसरी ओर राज्य की महायुति सरकार में शामिल अजीत पवार गुट वाली राकांपा ने शुरु से ही मनपा चुनाव में ‘एकला चलो’ की भूमिका अपनाई थी और 87 में से 85 सीटों पर अपने प्रत्याशी खडे किए है. जिसके चलते इन तीनों ही दलों के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है.
* मनपा के चुनावी मैदान में पार्टीनिहाय प्रत्याशी
राकांपा (अजीत पवार) – 85
कांग्रेस –  74
भाजपा – 68
शिंदे सेना – 67
वंचित बहुजन आघाडी – 47
शिवसेना उबाठा – 41
युवा स्वाभिमान पार्टी – 36
बसपा – 34
एमआईएम – 25
राकांपा (शरद पवार) – 14
आम आदमी पार्टी – 8
ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक – 7
समाजवादी पार्टी – 6
मनसे – 4
रिपाइं (गवई) – 4
रिपाइं (आठवले) – 3
पीपल्स डेमोक्रेटिक – 3
प्रहार – 3
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी – 3
मुस्लिम लीग – 2
देश जनहित पार्टी – 1
राष्ट्रीय विकास पार्टी – 1
रिपाइं (खोरिपा) – 1
रिपब्लिकन सेना – 1
आंबेडकर (रिपाइं) – 1
निर्दलिय – 120                                                                                                                                                                  * शिंदे सेना व राकांंपा (अजीत) को कई सीटों पर रेडीमेड मिले प्रत्याशी
बता दें कि, भाजपा के पास टिकट मांगनेवाले प्रत्याशियों की संख्या सबसे अधिक थी. जिसके तहत 87 में से 75 सीटों के लिए भाजपा के पास 641 दावेदार थे. वहीं दूसरी ओर भाजपा और शिंदे सेना के बीच युति की बातचीत भी चल रही थी. जो सीटों के बंटवारे को लेकर बात नहीं बन पाने की वजह से टूट गई. ऐसे में जिन-जिन दावेदारों को भाजपा से ऐन समय पर टिकट नहीं मिली, उन्होंने अपनी टिकट कटते ही शिंदे सेना का दामन थाम लिया. चूंकि शिंदे सेना के पास उम्मीदवारी मांगनेवाले दावेदारों की संख्या काफी हद तक कम थी. ऐसे में ऐन समय पर भाजपा की ओर से हुई ‘ईनकमिंग’ का शिंदे सेना ने स्वागत करते हुए भाजपा से अपने पास आए कई प्रबल दावेदारों को ‘धनुष्यबाण’ थमाकर चुनावी मैदान में उतार दिया. इसके अलावा भाजपा से नाराज रहनेवाले कई असंतुष्टों ने भाजपा के साथ महायुति की सरकार में शामिल अजीत पवार गुट वाली राकांपा का दामन थाम लिया. जिसके चलते इन दोनों ही पार्टियों को भाजपा में टिकट के प्रबल दावेदार रहनेवाले कई प्रत्याशी बैठे-बिठाए ‘रेडीमेड’ मिल गए. जिसके चलते कहा जा सकता है कि, कई सीटों पर भाजपा के अधिकृत प्रत्याशियों का सामना भाजपा के ही असंतुष्ट व बागी प्रत्याशियों से होने जा रहा है.

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