बोदेगांव में जात पंचायत ने एक परिवार पर लगाया सामाजिक बहिष्कार

अदालत में मामला पहुंचते ही 7 आरोपियों पर अपराध दर्ज

बुलढाणा/दि.14 – सामाजिक समानता और रूढ़िवादी परंपराओं का विरोध करने वाली राजमाता जिजाऊ की जयंती जिलेभर में 12 जनवरी को मनाई जा रही थी, लेकिन उसी दौरान बुलढाणा जिले से समाज को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है. बुलढाणा तालुका के बोदेगांव गांव में जात पंचायत द्वारा एक परिवार पर सामाजिक बहिष्कार थोपे जाने का गंभीर मामला उजागर हुआ है. कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल युग में भी जात पंचायत की अमानवीय कार्यप्रणाली सामने आने से जिले में तीव्र आक्रोश व्याप्त है. इस प्रकरण में बुलढाणा स्थित विशेष जिला एवं सत्र न्यायालय के आदेश पर धाड पुलिस थाने में 7 आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. प्रारंभ में पुलिस द्वारा शिकायत लेने से इनकार किए जाने के बाद पीड़ित परिवार को न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा.
प्राप्त प्राथमिक जानकारी के अनुसार बोदेगांव गांव में हनुमान संस्थान नामक एक अपंजीकृत एवं अवैध संस्था के माध्यम से चंदा और दान की राशि एकत्र की जाती थी. इस राशि को गांव में ब्याज पर वितरित किया जाता था. समय पर ब्याज न चुकाने पर संबंधित व्यक्ति से प्रतिदिन एक हजार रुपये का जुर्माना वसूला जाता था. इसी क्रम में शिकायतकर्ता भाऊसाहेब पंडितराव दांडगे ने 20 हजार रुपये का कर्ज लिया था. उन्होंने मूल राशि से दोगुनी रकम यानी 40 हजार रुपये पंचायत के समक्ष चुका दी, लेकिन विलंब शुल्क देने से इनकार करने पर जात पंचायत के नाम पर उनके और उनके परिवार पर सामाजिक बहिष्कार थोप दिया गया.
आरोप है कि पंचायत द्वारा फरमान जारी कर गांव की किराना दुकानों से सामान न देने, नाई द्वारा बाल न काटने, ऑटो-रिक्शा में बैठने से मना करने, आटा चक्की, मजदूरी सहित मूलभूत सेवाओं पर प्रतिबंध लगाया गया. यहां तक कि पीड़ित परिवार के छोटे बच्चों को भी दुकानों से खाद्य सामग्री देने से इनकार किया गया. इस सामाजिक बहिष्कार के खिलाफ दांडगे परिवार ने आवाज उठाई, लेकिन धाड पुलिस द्वारा शिकायत दर्ज न करने पर उन्होंने बुलढाणा न्यायालय का सहारा लिया. न्यायिक मजिस्ट्रेट (कोर्ट क्रमांक 4) पी. ए. खंडारे के आदेशानुसार बोदेगांव निवासी लहाने व उबाले परिवार के सात सदस्यों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. आरोपियों में राजेंद्र बाबुराव उबाले, अमोल माणिकराव उबाले, कैलास शेनफड उबाले, रामेश्वर देवीदास उबाले, शीतल नरेंद्र उबाले, किरण रावसाहेब लहाने और रावसाहेब नायबराव लहाने शामिल हैं.
इस मामले से जात पंचायत के नाम पर अवैध आर्थिक लेन-देन, अमानवीय ब्याज वसूली और सामाजिक बहिष्कार जैसे गंभीर अपराध उजागर हुए हैं. घटना ने सामाजिक समानता और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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