महज 21 वर्ष की उम्र में महापालिका में प्रवेश

लक्ष्मी हत्तीठेले बनीं ‘जेन-जी’ की आवाज

नागपुर /दि.17- नागपुर महानगरपालिका में मात्र 21 वर्ष की आयु में लक्ष्मी हत्तीठेले नगरसेविका बनी हैं. ‘जनरेशन ज़ेड’ की आवाज के रूप में पहचानी जा रही लक्ष्मी ने बेहद रोमांचक मुकाबले में जीत दर्ज कर युवा नेतृत्व की ताकत साबित की है. नागपुर महानगरपालिका के सतरंजीपुरा ज़ोन अंतर्गत प्रभाग क्रमांक 5-ए से भाजपा उम्मीदवार लक्ष्मी हत्तीठेले की जीत न केवल पार्टी के लिए, बल्कि शहर के राजनीतिक इतिहास में भी खास मानी जा रही है. 21 वर्ष दो माह की उम्र में वे नागपुर महापालिका की सबसे कम उम्र की नगरसेविका बनी हैं. जीत के बाद लक्ष्मी ने कहा, मैं अपने मतदाताओं, विशेषकर ‘जनरेशन ज़ेड’ के युवाओं की आभारी हूं जिन्होंने समय निकालकर मुझे वोट दिया. मैं अपनी क्षमता के अनुसार सर्वश्रेष्ठ कार्य करूंगी और पार्टी तथा मतदाताओं की अपेक्षाओं पर खरी उतरूंगी.
महापालिका चुनाव 2025 की पृष्ठभूमि में लक्ष्मी हत्तीठेले विकास के नए संकल्प के साथ जनता के बीच उतरी थीं. मूलभूत सुविधाएं, स्वच्छता, सड़कें, पानी की आपूर्ति और सर्वसमावेशी विकास उनके प्रमुख मुद्दे रहे. बी.ए. (मनोविज्ञान) के पांचवें सेमेस्टर की छात्रा लक्ष्मी ने नाटकीय वापसी करते हुए जीत हासिल की. मतगणना के शुरुआती 12 दौर में वे पिछड़ती नजर आईं और पराजय लगभग तय लग रही थी. हालांकि, 13 वें दौर से उन्होंने 181 मतों की बढ़त बनाते हुए जोरदार वापसी की और अंततः 1,024 मतों के अंतर से जीत दर्ज की. मतगणना की प्रक्रिया किसी थ्रिलर से कम नहीं रही.
लक्ष्मी हत्तीठेले राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले परिवार से आती हैं. उनके दिवंगत पिता राजू हत्तीठेले और माता दुर्गा हत्तीठेले दोनों नागपुर महानगरपालिका के पूर्व नगरसेवक रहे हैं. उनकी माता दुर्गा पहले नगरसेविका रहीं, लेकिन जाति प्रमाणपत्र से जुड़े विवाद के कारण बाद में उन्हें अपात्र ठहराया गया था. प्रचार के दौरान लक्ष्मी ने अपने पिता के कार्यों का संदर्भ लिया, लेकिन अपने अभियान को स्थानीय मुद्दों, नागरिक सुविधाओं तथा युवाओं और महिलाओं की अपेक्षाओं पर केंद्रित रखा. घर-घर जाकर संवाद, संयमित प्रचार शैली और सीधा संपर्क उनकी पहचान बनी. पारिवारिक चुनौतियों के बावजूद इतनी कम उम्र में चुनावी मैदान में उतरकर उन्होंने स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं में युवा नेतृत्व के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित किया है.
21 वर्ष की उम्र में मिली नगरसेविका की जिम्मेदारी लक्ष्मी हत्तीठेले के लिए केवल एक अवसर नहीं, बल्कि अपनी कार्यशैली और नेतृत्व क्षमता साबित करने की कसौटी भी है. अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि वे महापालिका के कामकाज में कैसी अलग पहचान बनाती हैं.

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