महायुति नेताओं के बयान के यही हैं मायने…

अमरावती में भाजपा, राकांपा व वायएसपी की सत्ता बनेगी

* भाजपा का होगा महापौर, शिंदे सेना भी साथ रहेगी
अमरावती/दि.20 – अमरावती महानगर पालिका के चुनाव में जनता द्वारा दिए गए मिले-जुले जनादेश के चलते किसी भी राजनीतिक दल को स्पष्ट जनादेश नहीं मिल पाया है. जिसके चलते महानगर पालिका में अबकी बार किसकी सरकार बनेगी इसे लेकर माथापच्ची जारी रहने के साथ ही जबरदस्त उत्सुकता भी बनी हुई है. इसी बीच महायुति में शामिल घटक दलों के नेताओं की ओर से दिए जा रहे बयानों को देखते हुए यह संभावना बनती नजर आ रही है कि, संभवत: अमरावती महानगर पालिका में भारतीय जनता पार्टी, अजीत पवार गुट वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी तथा विधायक रवि राणा के नेतृत्ववाली युवा स्वाभिमान पार्टी के गठबंधन की मिली-जुली सत्ता रहेगी. जिसमें शिंदे गुट वाली शिवसेना भी शामिल होगी. साथ ही इस गठबंधन के तहत महापौर का पद भाजपा के पास रहेगा.
बता दें कि, 87 सदस्यीय अमरावती मनपा के चुनाव में 25 सीटों पर जीत दर्ज करते हुए भारतीय जनता पार्टी सबसे बडा राजनीतिक दल बनकर उभरी है. वहीं राज्यस्तर पर भाजपा के साथ महायुति में शामिल रहनेवाली युवा स्वाभिमान पार्टी ने 15 सीटों पर सफलता हासिल की है. जबकि अजीत पवार गुट वाली राकांपा ने 11 और शिंदे गुट वाली शिवसेना ने 3 सीटों पर जीत दर्ज की है. चूंकि अमरावती महानगर पालिका में सत्ता स्थापित करने हेतु स्पष्ट बहुमत के लिए 44 सीटों का जादुई आंकडा किसी के पास नहीं है. जिसके चलते अब चुनाव पश्चात किए जानेवाले गठबंधन की ओर ध्यान दिया जा रहा है और समविचारी दलों के साथ गठबंधन करने पर विचार-विमर्श का दौर चल रहा है. क्योंकि राज्यस्तर पर महायुति में शामिल भाजपा के पास अमरावती मनपा में 25, युवा स्वाभिमान के पास 15, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के पास 11 व शिंदे गुट वाली शिवसेना के पास 3 सीटें है. ऐसे में यदि महायुति के इन चारों घटक दलों द्वारा मनपा में गठबंधन कर लिया जाता है, तो युति के तहत सदस्यों की संख्या 54 पर पहुंच जाएगी. साथ ही इस गठबंधन को बसपा के 3, उबाठा के 2 व वंचित बहुजन आघाडी के 1 सदस्यों का भी यदि समर्थन मिलता है, तो इस गठबंधन की सदस्य संख्या 60 पर भी पहुंच सकती है. जिसकी बदौलत पूरे पांच साल तक महानगर पालिका की सत्ता को स्थिर तरीके से चलाना संभव रहेगा. इस बात को ध्यान में रखते हुए महायुति में शामिल घटक दलों के वरिष्ठ नेताओं द्वारा अब अमरावती मनपा में किए जानेवाले गठबंधन के मामले की ओर पूरा ध्यान दिया जा रहा है.
ध्यान दिलाया जा सकता है कि, भले ही अमरावती मनपा के चुनाव में सभी राजनीतिक दलों ने अलग-अलग हिस्सा लेते हुए अपनी-अपनी राजनीतिक ताकत को अजमाया था, परंतु चुनावी नतीजे घोषित होते ही सबसे पहले युवा स्वाभिमान पार्टी ने भाजपा के साथ सत्ता में शामिल होने के लिए गठबंधन करने की भूमिका अपनाई थी और भाजपा का ही महापौर रहने की शर्त पर भाजपा को अपना समर्थन देने की बात भी कही थी. वहीं दूसरी ओर अजीत पवार गुट वाली राकांपा प्रदेश उपाध्यक्ष व विधायक संजय खोडके ने स्पष्ट किया था कि, यदि भाजपा के साथ विधायक राणा व युवा स्वाभिमान पार्टी का गठबंधन में समावेश रहता है, तो वे उस गठबंधन में शामिल नहीं होंगे. साथ ही विधायक खोडके ने अपने बयान के साथ यह बात भी जोडी थी कि, इस बारे में पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व की ओर से दिए जानेवाले निर्देशों का पालन होगा. जिसका सीधा मतलब है कि, यदि पार्टी नेतृत्व यानि राज्य के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार द्वारा अमरावती में भाजपा व युवा स्वाभिमान के समावेश वाले गठबंधन में शामिल होने का निर्णय लिया जाता है, तो उस स्थिति में विधायक संजय खोडके द्वारा अपने व्यक्तिगत कारणों के चलते किए जानेवाले राणा विरोध का कोई अर्थ नहीं बचेगा और उस स्थिति में अजीत पवार गुट वाली राकांपा भी भाजपा व वायएसपी के साथ गठबंधन में शामिल होगी. साथ ही साथ महज तीन सीटें हासिल करनेवाली शिंदे सेना भी नाहक ही विपक्ष में रहने की बजाए सत्ता सुख का लाभ लेने के लिए इस गठबंधन में निश्चित ही शामिल होगी और इस गठबंधन में सबसे बडा दल रहने के नाते महापौर पद पर भाजपा का ही दावा सबसे मजबूत भी रहेगा, ऐसे स्पष्ट आसार फिलहाल दिखाई दे रहे है. इसके चलते अब सभी का ध्यान मनपा चुनाव पश्चात शहर में चल रही राजनीतिक उठापटक पर लगा हुआ है.

Back to top button