व्याघ्र प्रकल्प द्वारा देवस्थान बंद किए जाने के चलते आदिवासियों में रोष की लहर
पूर्व विधायक राजकुमार पटेल ने सौंपा जिलाधीश व वन विभाग को ज्ञापन

* देवस्थान शुरु नहीं करने पर भविष्य में तनाव व टकराव वाली स्थिति पैदा होने की जताई संभावना
अमरावती/दि.20 – आदिवासी बहुल मेलघाट क्षेत्र के एक बडे भूभाग पर अधिग्रहण करते हुए सरकार द्वारा व्याघ्र प्रकल्प स्थापित किया गया है. जिसके लिए कई आदिवासी गांवों को पुनर्वसित कर दिया गया. लेकिन उन गांवों में आज भी सैकडों वर्षों से स्थापित आदिवासियों के श्रद्धास्थल है. जहां पर अब पुनर्वसित गांवों में रहनेवाले आदिवासी समाजबंधु कुछ विशिष्ट पर्व एवं त्यौहारों के समय जाकर पूजा-अर्चना करते है. परंतु वन विभाग द्वारा व्याघ्र प्रकल्प अंतर्गत रहनेवाले पांच देवस्थानों पर अब आदिवासियों के प्रवेश को प्रतिबंधित कर दिया गया है और आदिवासियों को वहां पर पूजा-अर्चना करने हेतु जाने से रोका जा रहा है. इसके चलते आदिवासियों में सरकार एवं प्रशासन के खिलाफ जबरदस्त रोष व संताप की लहर व्याप्त है. ऐसे में यदि उन पांच देवस्थानों पर प्रवेश हेतु लगाए गए प्रतिबंध को नहीं हटाया गया, तो मेलघाट क्षेत्र के आदिवासियों का गुस्सा किसी भी समय फूट सकता है तथा इस क्षेत्र में आदिवासियों व प्रशासन के बीच तनाव व टकराव वाली स्थिति बन सकती है. अत: समय रहते ऐहतियाती कदम उठाए जाए तथा उन पांचों देवस्थानों पर आदिवासियों को पूजा-अर्चना हेतु आने-जाने की अनुमति प्रदान की जाए, इस आशय की मांग का ज्ञापन मेलघाट निर्वाचन क्षेत्र के पूर्व विधायक राजकुमार पटेल द्वारा आज जिलाधीश तथा व्याघ्र प्रकल्प के क्षेत्र संचालक को सौंपा गया.
सौंपे गए ज्ञापन में पूर्व विधायक राजकुमार पटेल ने बताया कि, व्याघ्र प्रकल्प अंतर्गत सेमाडोह के भुमका बाबा देवस्थान व शिव पिंड देवस्थान, हतरु के डवरादेव बाबा देवस्थान, तारुबांदा के कांदी बाबा देवस्थान व कोकमार के नरसिंग बाबा देवस्थान विगत अनेक दशकों व शतकों से आदिवासियों के श्रद्धास्थान रहे है. जहां पर कई पीढियों से क्षेत्र के आदिवासियों द्वारा पूजा-अर्चना की जाती रही है. परंतु अब इन देवस्थानों को संरक्षित व अति संरक्षित क्षेत्र में बताते हुए वन विभाग एवं व्याघ्र प्रकल्प के अधिकारियों द्वारा आदिवासियों का उन देवस्थानों पर प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है. जिसके चलते मेलघाट के आदिवासियों में व्याघ्र प्रकल्प, वन विभाग एवं प्रशासन के खिलाफ तीव्र आक्रोश की लहर व्याप्त है.
इसके साथ ही पूर्व विधायक राजकुमार पटेल ने यह भी कहा कि, आगामी फरवरी-मार्च माह से होली एवं फाग उत्सव के लिए मेलघाट में स्थलांतरित आदिवासियों की बडे पैमाने पर वापसी होती है. जो मेलघाट वापिस आने के बाद अपने-अपने आराध्यों के दर्शन करने हेतु इन पांच प्रमुख देवस्थानों पर जरुर जाते है और वहां जाने के बाद पूजा-अर्चना करने के साथ ही अपनी कोई मुराद पूरी होने पर मन्नत भी अदा करते है. ऐसे समय यदि उन आदिवासियों को उनके देवस्थानों पर जाने से रोकने का प्रयास किया गया, तो उस समय निश्चित तौर पर प्रशासन और आदिवासियों के बीच तीव्र टकराव वाली स्थिति बनेगी तथा क्षेत्र में जबरदस्त जनआंदोलन भी शुरु होगा, इस बात की पूरी संभावना है. जिसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने उन देवस्थानों पर आने-जाने हेतु लगाए गए प्रतिबंध को समय रहते हटा लेना चाहिए.





