हमें उम्मीद है, सरकार डिमांड बढाने पर फोकस करेगी

केंद्रीय बजट से अमरावती के उद्यमियों, व्यापारियों की बडी अपेक्षाएं

* युवा उद्यमी श्रवण गट्टानी की अपेक्षा
अमरावती /दि.21 – देश की खजांची निर्मला सीतारामन आगामी 1 फरवरी को आम बजट प्रस्तुत करने जा रही है. साउथ ब्लॉक में बैठकों के दौर शुरु है. स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्थसंकल्प संदर्भ में वित्त मंत्री और राज्य मंत्री और अफसरान से महत्वपूर्ण विचार-विनिमय किया है. ऐसे में देश के उद्योग जगत और व्यापारियों की करों में राहत सहित नाना प्रकार की आशा-अपेक्षाएं बजट को लेकर व्यक्त हो रही है. इसी कडी में अमरावती मंडल ने अपनी व्यापार हितैषी परंपरा के अनुसार यहां के उद्योगपतियों, व्यापारियों, व्यापारी संगठनों के पदाधिकारियों से अर्थसंकल्प 2026-27 को लेकर उनकी आशा-अपेक्षाओं के विषय में चर्चा की, तो अनेक प्रकार की उम्मीदे सामने आई. खास कर निर्मला सीतारामन का पिछला अर्थसंकल्प अभूतपूर्व रहने के कारण कर सलाहकारों से लेकर व्यापार जगत तक बजट संबंधी अपेक्षाएं खुलकर सामने आ रही है. मार्केट आशा से लबालब है. विशेष कर अमेरिका द्वारा लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ के आलोक में मार्केट को कई नई सुविधाएं, रियायतें की उम्मीद जागी है. ‘अमरावती मंडल’ ने युवा से लेकर अनुभवी उद्यमियों से चर्चा की है.
* कौन हैं श्रवण गट्टानी?
अमरावती में पिछले दो दशकों में जेपीएस होंडा के माध्यम से टू-वीलर वितरण के कारोबार में लगे जुगलकिशोर गट्टानी परिवार के पवन गट्टानी के सुपुत्र श्रवण गट्टानी युवा और उर्जावान उद्यमी है. जेपीएस ग्रुप ने कालांतर में होंडा पश्चात बुलेट और अब अग्रणी कार निर्माता कंपनी किया की डीलरशिप प्राप्त की है. उसी प्रकार सेल में नितनए कीर्तिमान जेपीएस ग्रुप गढ रहा है. ऐसे में अपने दादा जुगलकिशोर जी, पिता पवन और चाचा पंकज के सानिध्य में युवा उद्यमी श्रवण गट्टानी जेपीएस ग्रुप के कारोबार को आगे बढा रहे हैं. नई उंचाई प्रदान करने प्रयासरत हैं.

* अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं इस बार का बजट
श्रवण गट्टानी ने बताया कि, एक कारोबारी के रुप में देखा जाए, तो आनेवाला केंद्रीय बजट भारत की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है. विशेषकर ऑटोमोबाइल सेक्टर, रिटेल, ई-कॉमर्स जैसे सेक्टर हेतु. श्रवण गट्टानी ने आशा जताई कि, सरकार डीमांड बढाने पर फोकस करेगी. जिसके लिए टैक्स में स्थिरता और आसान फाईनेंस आवश्यक है. इसका सीधा लाभ उपभोक्ता व कारोबार दोनों को प्राप्त होता है. अफोर्डेबिलिटी बहुत जरुरी है. श्रवण गट्टानी ने कहा कि, देश स्तर पर आम जनता को आनेवाले बजट से यह भी उम्मीद है कि, टैक्स सिस्टम आसान बनेगा, रोजगार बढाएगा, बेहतर अधोसंरचना और किफायती ट्रांसपोर्ट उपलब्ध कराएगा. एमएसएमई और डिजिटल इकॉनॉमी को मजबूत करने से नौकरियां बढेगी. खपत में सपोर्ट मिलेगा. श्रवण गट्टानी ने बताया कि, ऑटो और रिटेल सेक्टर के लिए जीएसटी को सरल बनाना, रिफंड प्रक्रिया गतिमान करना, कम्प्लायंस का बोझ कम करना आवश्यक है. एमएसएमई को बेहतर क्रेडीट सपोर्ट मिलने से टीयर-2 और टीयर-3 शहरों में बिझनेस का विस्तार तेज होगा. सडकों, अर्बन मोबिलिटी में निवेश से गाडियों की विक्री, रिटेल सप्लाइ चेन और ई-कॉमर्स की डिलेवरी तीनों को मजबूती मिलेगी. युवा उद्यमी श्रवण गट्टानी ने कहा कि, दुनिया के कई देशों ने डिमांड बढाने के लिए कई कदम उठाए हैं, जो सफल रहे हैं. जर्मनी और फ्रान्स में व्हीकल स्क्रैप पॉलिसी से ऑटो सेक्टर को सहारा मिला. वहीं चीन ने इवी और डिजिटल कॉमर्स को टार्गेटेड इंटेंसीव देकर तेजी से आगे बढाया. भारत भी इवी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल रिटेल को संतुलित सपोर्ट देकर बेहतर ग्रोथ प्राप्त कर सकता है. कुल मिलाकर आगामी 1 फरवरी के अर्थसंकल्प से उद्योग और सामान्य लोग उम्मीद कर रहे है कि, जो जमीन पर असर दिखाए, बिझनेस करना आसान बनाए और लंबे समय तक ग्रोथ को सपोर्ट करे, ऐसा बजट प्रस्तुत किया जाएं.
अब तो टैक्स कम होना ही चाहिए
सराफा व्यापारी असो. के अध्यक्ष राजेंद्र भंसाली ने कहा कि बजट से सराफा कारोबार को सबसे बडी उम्मीद टैक्स रेट कम करने की है. हमारे संगठन ने राष्ट्रीय स्तर पर अनेक बार वित्त मंत्रालय को इस बारे में निवेदन भी दिया है. 3 प्रतिशत जीएसटी सोने और चांदी के आज के भारी भरकम, ऐतिहासिक रेट को देखते हुए काफी है. इसे कम करना ग्राहकों के हित में रहेगा. जब सोने का रेट 30 हजार रूपए 10 ग्राम था, उस समय से 3 प्रतिशत टैक्स वसूला जा रहा है. जबकि आज 5 गुना रेट बढ गये हैं. टैक्स रेट 3 प्रतिशत रहने से उपभोक्ताओं को प्रति 10 ग्राम 4-5 हजार रूपए टैक्स लगता है. जिससे वे सोेने की खरीदारी बिल में करने से बचते ह््ैं आखिर सरकार का ही अपरोक्ष नुकसान होता है. दोनों कीमती धातुओं का वाल्युम बढने से अब वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन को सोचना ही होगा्. आखिर सोने और चांदी के बढते दामों से पहले ही ग्राहक सराफा मार्केट से दूर हो रहे हैं. टैक्स कम कर ग्राहकों को थोडी राहत दी जा सकती है. उसी प्रकार टैक्स कम होने से मार्केट में भी ग्राहकी की उम्मीद बढेगी. इसमें शक नहीं. राजेंद्र भंसाली ने यह भी कहा कि टैक्स सिस्टम को भी सरल बनाया जाना चाहिए. लोग टैक्स अदा करने के लिए तैयार हैं. उन्हें सिस्टम आसान लगना चाहिए. बार- बार अपने कर सलाहकार के पास जाने की आवश्यकता नहीं लगनी चाहिए. इसमें भी कारोबारियों का काफी वक्त जाया होता है. ऐसे में सरकार को टैक्स सिस्टम को सीधा सरल बनाना लक्ष्य होना चाहिए. सराफा व्यापारी असो. के अध्यक्ष भंसाली ने आयकर छूट सीमा बढाए जाने की उम्मीद व्यक्त की. उन्होंने तुरंत जोड दिया कि पिछली बार आयकर में बडी राहत दी गई थी. जो इस वर्ष से लागू होरही है. अर्थात व्यापारियों और सभी को इनकम टैक्स मेें अब जाकर राहत मिलनेवाली है. अभी भी आयकर का दायरा कम करने की जरूरत हैं. राजेंद्र भंसाली ने बताया कि टैक्स दरों में रियायत के लिए जैम्स एंड ज्वेलरी असो. के पदाधिकारियों ने वित्त मंत्रालय को कई बार डेप्युटेशन दिए हैं. वित्त मंत्रालय कई बातें और डिमांड पर ध्यान नहीं दे रहा है.

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