पराजय के बावजूद जनसेवा का व्रत जारी रहेगा

प्रभाग क्र. 21 में पराजित एमआईएम प्रत्याशी जाकिर जमाल का कथन

* जनता द्वारा खुद के प्रति दर्शाए गए भरोसे को ही बताया अपनी सबसे बड़ी जीत
अमरावती /दि.21 – राजनीति में आमतौर पर वही चेहरे याद रखे जाते हैं जो चुनाव जीतते हैं, लेकिन अमरावती महानगरपालिका चुनाव 2026 के प्रभाग क्रमांक 21 जुनी बस्ती बडनेरा ने इस धारणा को बदल कर रख दिया. मतगणना पूरी होने के बाद भले ही आधिकारिक जीत किसी और के खाते में गई हो, मगर जनमानस में असली विजेता के रूप में ज़ाकिर जमाल का नाम उभरकर सामने आया. जिन्होंने जनादेश को पूरी विनम्रता के साथ स्वीकार करते हुए कहा कि, चुनाव हार जाने के बावजूद भी वे जनसेवा के काम को बदस्तुर जारी रखेंगे. क्योंकि उनकी दावेदारी के प्रति प्रभागवासियों द्वारा दर्शाया गया भरोसा ही उनकी सबसे बडी जीत है.
उल्लेखनीय है कि, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन यानि एआईएमआईएम के प्रत्याशी ज़ाकिर जमाल ने प्रभाग क्र. 21 जुनी बस्ती बडनेरा में पूरे आत्मविश्वास और मजबूती के साथ चुनावी मुकाबला किया. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उन्होंने जिस प्रकार पारंपरिक वोट समीकरणों को चुनौती दी, उससे वार्ड नंबर 21 की राजनीति में नई हलचल पैदा हुई. बेहद कम वोटों से मिली हार ने उनकी राजनीतिक हैसियत को कम नहीं किया, बल्कि उन्हें एक जनप्रिय, भरोसेमंद और उभरते हुए नेता के रूप में और मजबूती से स्थापित कर दिया.
स्थानीय नागरिकों के अनुसार ज़ाकिर जमाल सिर्फ एक चुनावी उम्मीदवार नहीं, बल्कि हर परिस्थिति में मदद के लिए आगे रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता हैं. नतीजों के बाद भी लोगों की जुबान पर यही बात रही कि हमारे लिए वे आज भी हमारे प्रतिनिधि हैं, क्योंकि हमने उनमें अपना भाई और बेटा देखा है. जनता का यह विश्वास किसी भी औपचारिक जीत-हार से कहीं बड़ा और गहरा माना जा रहा है. जिसे ध्यान में रखते हुए जाकिर जमाल ने चुनाव हार जाने के बावजूद जनसेवा को लेकर अपनी जिम्मेदारी को आगे भी पूरा करने का मानस बनाया है.
चुनावी परिणाम घोषित होते ही ज़ाकिर जमाल का व्यवहार उनकी राजनीतिक परिपक्वता और नेतृत्व क्षमता को दर्शाता नजर आया. उन्होंने न तो किसी पर आरोप लगाया और न ही निराशा जताई, बल्कि खुले दिल से जनता के समर्थन को स्वीकार किया. इस अवसर पर ज़ाकिर जमाल ने कहा कि, चुनाव एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया है, सेवा मेरा उद्देश्य है. जिन लोगों ने मुझ पर भरोसा किया, मैं उनका आभारी हूं. पद मिले या न मिले, जनता के लिए मेरी सेवा और संघर्ष कभी नहीं रुकेगा. उनकी यह सोच और संयम यह सिद्ध करता है कि सच्चा नेता वही होता है जो हार में भी गरिमा, धैर्य और जिम्मेदारी निभाए.
विशेषज्ञों के अनुसार, ज़ाकिर जमाल की यह चुनावी यात्रा आने वाले समय में उनकी राजनीतिक भूमिका को और सशक्त बना सकती है. हार के बावजूद जनता का भरोसा कायम रहना यह संकेत देता है कि वे भविष्य में वार्ड की राजनीति में एक मजबूत विकल्प बनकर उभर सकते हैं. इस तरह, प्रभाग क्रमांक 21 का यह चुनाव यह संदेश देता है कि राजनीति में केवल जीत नहीं, बल्कि जनता का विश्वास और सम्मान ही असली सफलता होती है.

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