उमेश कोल्हे हत्याकांड के आरोपी की जमानत याचिका खारिज
हाईकोर्ट ने कहा - डर फैलाने के उद्देश्य से की गई थी उमेश की हत्या

* कोल्हे हत्याकांड में धरे गए डॉ. युसूफ खान ने जमानत हेतु दायर की थी याचिका
मुंबई/दि. 21- अमरावती के दवा व्यापारी उमेश कोल्हे की वर्ष 2022 में हुई हत्या को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने बड़ा और सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि यह हत्या केवल व्यक्तिगत प्रतिशोध का मामला नहीं, बल्कि समाज में भय और आतंक का माहौल बनाने के उद्देश्य से की गई थी. इसी आधार पर न्यायालय ने इस मामले में आरोपी पशु चिकित्सक डॉ. यूसुफ खान की जमानत याचिका खारिज कर दी. न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति श्याम चांडक की खंडपीठ ने कहा कि ऐसे अपराध समाज की आत्मा और नैतिक चेतना को झकझोर देते हैं. इनसे नागरिकों में असुरक्षा की भावना बढ़ती है और लोग भय के साये में जीने को मजबूर होते हैं.
* क्या था मामला?
जून 2022 में अमरावती में दवा विक्रेता उमेश कोल्हे की निर्मम हत्या कर दी गई थी. आरोप है कि कोल्हे ने सोशल मीडिया पर पूर्व भाजपा नेता नूपुर शर्मा द्वारा धर्म विशेष के संदर्भ में की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी का समर्थन करने वाली पोस्ट साझा की थी. इसी बात को लेकर उन्हें निशाना बनाया गया और उनकी हत्या कर दी गई.
* आरोपी यूसुफ खान की दलील और अदालत का रुख
इस मामले में आरोपी पशु चिकित्सक डॉ. यूसुफ खान ने उच्च न्यायालय में जमानत के लिए आवेदन किया था. उनका कहना था कि वे हत्या में प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं थे और उन्होंने केवल अन्य डॉक्टरों से कोल्हे की दुकान से दवाएं न खरीदने की अपील की थी. हालांकि, अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट होता है कि यूसुफ खान के खिलाफ लगाए गए आरोप सत्य प्रतीत होते हैं. अदालत ने यह भी कहा कि आरोपियों ने मुख्य आरोपी के नेतृत्व में एक संगठित और आतंकी मानसिकता वाली टोली बनाकर इस अपराध को अंजाम दिया, ताकि आम जनता के मन में भय व्याप्त किया जा सके.
* अदालत की सख्त टिप्पणी
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि, आरोपित अपराध न केवल गंभीर है, बल्कि घृणास्पद भी है. यह समाज में भय और असुरक्षा की भावना फैलाने का प्रयास था. ऐसे मामलों में जमानत का अधिकार प्रयोग करना न्यायसंगत नहीं होगा. इसी आधार पर अदालत ने यूसुफ खान की जमानत याचिका खारिज कर दी.
* कब की गई थी हत्या
बता दें कि उमेश कोल्हे की 21 जून 2022 को रात करीब 9.30 बजे उस समय हत्या कर दी गई थी, जब वे अपनी स्कूटर से घर लौट रहे थे. जांच एजेंसियों के अनुसार, यह हत्या पूर्व नियोजित थी और इसका मकसद समाज में भय का माहौल पैदा करना था. पीड़ित पक्ष ने अदालत को बताया कि जिस व्हाट्सएप ग्रुप में नूपुर शर्मा के समर्थन में पोस्ट डाली गई थी, उसमें फार्मासिस्ट और मेडिकल प्रतिनिधि शामिल थे. उस ग्रुप में डॉ. युसुफ खान अकेले ही मुस्लिम सदस्य थे. 14 जून 2022 को उमेश कोल्हे ने नूपुर शर्मा की तस्वीर के साथ उनके बयान के समर्थन में एक संदेश साझा किया था. आरोप है कि खान ने उस पोस्ट का स्क्रीनशॉट लिया और उसे दूसरे व्हाट्सएप ग्रुप में साझा कर दिया, जिसके बाद कथित तौर पर हत्या की साजिश रची गई.
* एक आतंकी गिरोह का गठन किया
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री को देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपियों ने अपने धर्म के कथित अपमान का बदला लेने और आम जनता में दहशत फैलाने के उद्देश्य से एक आतंकी गिरोह का गठन किया था. अदालत ने यह भी कहा कि इस तरह के अपराध समाज की आत्मा को झकझोर देते हैं. लोगों को लगातार भय के माहौल में जीने के लिए मजबूर करते हैं. हाईकोर्ट ने माना कि मामले की गंभीरता, अपराध की प्रकृति और समाज पर पड़ने वाले इसके प्रभाव को देखते हुए आरोपी को जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता. इसी के साथ खान की अपील को खारिज कर दिया गया.





