किसनराव हूंडीवाले हत्याकांड में 10 आरोपियों को उम्रकैद, 5 बरी
अकोला के बहुचर्चित मामले में विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने की पैरवी

अकोला/दि.21- जिले के चर्चित प्रॉपर्टी व्यवसायी और गवली समाज के प्रदेशाध्यक्ष किसनराव हूंडीवाले की हत्या के मामले में जिला सत्र न्यायालय ने मंगलवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 10 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है, जबकि सबूतों के अभाव में 5 आरोपियों को निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया गया है. इस मामले में विशेष सरकारी वकील के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता और सांसद उज्ज्वल निकम ने पक्ष रखा. यह हत्या 6 मई 2019 को अकोला के अशोक वाटिका चौक स्थित सार्वजनिक न्यास उपनिबंधक कार्यालय में दिनदहाड़े की गई थी, जो पुलिस अधीक्षक के सरकारी निवास के बिल्कुल पास है. घटना ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया था. अदालत ने साक्ष्यों, गवाहों के बयान और अभियोजन पक्ष की दलीलों के आधार पर 10 आरोपियों को दोषी मानते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई. वहीं, पर्याप्त प्रमाण न मिलने के कारण 5 आरोपियों को दोषमुक्त किया गया. फैसले के समय विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम स्वयं अदालत में उपस्थित थे.
* क्या था पूरा मामला?
6 मई 2019 को दोपहर करीब 12 बजे किसनराव हूंडीवाले सार्वजनिक न्यास कार्यालय में मौजूद थे. इसी दौरान हमलावरों ने उन पर लकड़ी के फर्नीचर और अग्निशमन सिलेंडर से हमला कर दिया. गंभीर चोटों के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई. इस हमले में उनके वकील नितिन धूत भी घायल हुए थे. हत्या का स्थान अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र में था, क्योंकि यह कार्यालय पुलिस अधीक्षक के सरकारी निवास के ठीक बगल में स्थित है. प्रारंभिक जांच में यह सामने आया था कि हत्या की वजह एक शैक्षणिक संस्था की संपत्ति को लेकर चला आ रहा विवाद था.
* प्रमुख आरोपी और राजनीतिक पृष्ठभूमि
इस हत्याकांड में मुख्य आरोपियों में अकोला की भाजपा की पहली महापौर सुमन गावंडे के परिवार के 5 सदस्य शामिल थे. इनमें उनके पति और सेवानिवृत्त पुलिस निरीक्षक श्रीराम गावंडे, पुत्र और तत्कालीन भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष विक्रम उर्फ छोटू गावंडे, रणजीत गावंडे, धीरज गावंडे, प्रल्हाद गावंडे सहित दिनेश राजपूत, प्रतीक तोंडे, विशाल तायडे, सतीश तायडे, मयूर अहिर और सूरज गावंडे शामिल हैं.
* कौन थे किसनराव हूंडीवाले?
अकोला के प्रसिद्ध प्रॉपर्टी ब्रोकर और व्यवसायी, कौलखेड और खडकी गवली समाज संगठन के प्रदेशाध्यक्ष रहनेवाले किसनराव हुंडीवाले की क्षेत्र मे राजनीति पर मजबूत पकड़ थी. साथ ही वे केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हंसराज अहिर के निकट रिश्तेदार भी थे. जिसके चलते उनकी दिनदहाडे हुई हत्या को एक बेहद हाईप्रोफाईल मामला माना गया था. ऐसे में अब हुंडीवाले हत्याकांड के मामले में अदालती फैसले का सामाजिक और राजनीतिक असर पडना स्वाभाविक है. इस फैसले से अकोला ही नहीं, बल्कि पूरे विदर्भ क्षेत्र में गहरी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है. वर्षों से लंबित इस मामले में न्याय मिलने से पीड़ित परिवार को राहत मिली है, वहीं राजनीतिक गलियारों में भी इसकी व्यापक चर्चा है. यह फैसला संगठित अपराध और प्रभावशाली आरोपियों के खिलाफ कानून की सख्ती का स्पष्ट संदेश माना जा रहा है.





