डीपीएस में 8वें वार्षिकोत्सव -निर्मोचन का विहंगम दृश्य
अद्भुत, अविस्मरणीय रंगारंग प्रस्तुतियां

* संत गाडगे बाबा, तुकडोजी महाराज व सावित्रीबाई फुले को दी गई श्रध्दांजलि
* बडी संख्या में उपस्थित रहे अभिभावक
अमरावती/दि.22 – प्रतिभा जन्मजात (सहजा) या अर्जित (उत्पाद्या) हो सकती है, और यह ईश्वर का उपहार है जिसे कड़ी मेहनत और अभ्यास से निखारा जाता है ,क्षेत्र की अग्रणी शिक्षण संस्था दिल्ली पब्लिक स्कूल, अमरावती के बच्चों ने पुनःश्च साबित किया कि क्यों वे हर क्षेत्र में अग्रणी होने की ओर अग्रसर है. उन्होंने देश एवं महाराष्ट्र के स्वतंत्रता सेनानियों , समाज सुधारकों एवं संत पुरुषों आदि के जीवन तथा चरित्र को समर्पित प्रेरणादायक कार्यक्रम में संत गाडगे बाबा, लोकमान्य तिलक , सावित्रीबाई फुले एवं संत तुकडोजी महाराज को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए स्कूल के मुक्ताकाश में अत्यंत मनमोहक प्रस्तुतियां दी, जिसे देखकर सभी दंग रह गए. डीपीएस में विद्यमान विश्वस्तरीय सुविधायें एवं बच्चों की नैसर्गिक क्षमता देखकर उपस्थित गणमान्यों ने काफी प्रशंसा की.
इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में अमरावती की साहसी एवं निर्भीक पूर्व सांसद नवनीत रवि राणा, डॉ राजेंद्र सिंह अरोरा ( एमएस ) फाउंडर ऑफ़ सूजन सर्जिकल एंड कैंसर हॉस्पिटल , आरोग्यम मल्टी- स्पेशलिटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के डॉ रोहित करण हटगाओंकर एवं डॉ. अभिलाष बंसीलाल चव्हाण , शिक्षा विभाग की डिप्टी डायरेक्टर नीलिमा टांके ( गुल्हाने ) , डीपीएस के एसएमसी मेंबर्स , प्रो. वाईस चेयरमैन डोलेंद्र पाटिल तथा प्राचार्य हिमाद्रि सेखर देसाई विशेष रूप से उपस्थित थे. विद्यालय की छात्राओं ने चंदन तिलक लगाकर मुख्य अतिथि का स्वागत किया. सर्वप्रथम,उपस्थित सभी गणमान्यों द्वारा कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन माता सरस्वती तथा भगवान नटराज की प्रतिमा में संयुक्त रूप से माल्यार्पण कर तथा दीप प्रज्वलित कर किया गया. तत्पश्चात कार्यक्रम के आरंभ में विशिष्ठ तथा मुख्य अतिथियों को श्रीफल तथा डी.पी.एस. स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया.
कार्यक्रम के शुभारंभ में दिल्ली पब्लिक स्कूल के बच्चों ने विभिन्न संगीत वाद्य यंत्रो के द्वारा सरस्वती वंदना की तथा स्वागत गीत गाकर अतिथियों का स्वागत किया. इसके पश्चात कक्षा नर्सरी, एल-के.जी. व यू. के.जी. के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने भी ‘स्कूल चले हम, अग्गोबाई डग्गो बाई, ये जी बाई, सत्य शोधक, जीवन सार्थक करा’ गीत पर मनमोहक नृत्य कर कार्यक्रम को रोचक बना दिया. इस वार्षिकोत्सव की थीम ‘ हमारे संत महापुरुष ’ पर आधारित थी. जिसमें अलग-अलग स्थानों के पारंपरिक नृत्य व संगीत की झलक दिखी. कक्षा पहली तथा दूसरी के विद्यार्थियों के द्वारा संतों द्वारा शिक्षा के योगदान को नृत्य के माध्यम से व्यक्त किया गया, जिसे दर्शकों ने काफी सराहा . कक्षा तीसरी के विद्यार्थियों ने नृत्य-नाटिका के माध्यम से संत गाडगे महाराज द्वारा समाज में स्वच्छता की अलख जगाने की रीती को दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत कियाख इस तरह से संत तुकडोजी महाराज द्वारा दिए इंसानियत के सन्देश को कक्षा 8वीं के विद्यार्थियों द्वारा नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया. जीवन में सच्ची भक्ति के महत्व को भी कक्षा चौथीं के विद्यार्थियों द्वारा बहुत ही प्रेरणादायक रूप में प्रस्तुत किया गयाख इस तरह इन समाज सुधारक संतो द्वारा दी गई सीख व सन्देश को विभिन्न कक्षा के विद्यार्थियों द्वारा नृत्य-नाटिका के माध्यम से प्रस्तुत किया गया. विभिन्न वाद्ययंत्रों के वादन के द्वारा भी बच्चों ने माहौल में जान फूंक दी. आर्केस्ट्रा तथा रॉक-बैंड की धुनों का भी सभी ने लुत्फ़ उठाया. इस तरह एक बार फिर से बच्चों ने नृत्य एवं गीत के द्वारा अपनी प्रतिभा की चमक बिखेरी. समस्त कार्यक्रम में नर्सरी से कक्षा 12 तक के छात्र-छात्राएं सम्मिलित हुए . इस मौके पर विशिष्ठ अतिथि अतिथियों एवं अभिभावकों ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया. उन्होंने इस प्रयास की सराहना करते हुए बोला की बच्चों में बड़ों का आदर करने का गुण होना चाहिए साथ ही माता-पिता को मोबाइल के बजाय बच्चों के साथ ज्यादा समय बिताना चाहिए, समारोह को सफल बनाने के लिए छात्रों के प्रयासों की सराहना भी की और कहा कि बच्चों ने अद्मभुत कार्यक्रम प्रस्तुत किए. इस तरह के आयोजन में दिल्ली पब्लिक स्कूल विद्यार्थियों द्वारा एक से बढ़कर एक कार्यक्रम को देख सभी काफी उत्साहित हुए. इस दौरान वहां मौजूद अभिभावकों और शिक्षकों ने तालियां बजाकर बच्चों का उत्साह बढ़ाया. इस कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को प्रतीक चिह्न और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया. डीपीएस प्रांगण में पूरी भव्यता के साथ आयोजित इस समारोह का सभी ने खूब लुत्फ ख इस अवसर पर विद्यालय के सभी शिक्षक तथा शिक्षणेतर कर्मचारी उपस्थित रहे.





