मराठी स्कूल बचे तो मराठी संस्कृति और विद्यार्थी भी बचेंगे – संदीप संघवई

अमरावती में मुख्याध्यापकों की जिला स्तरीय कार्यशाला संपन्न

अमरावती/दि.22 – यदि मराठी स्कूल जीवित रहेंगे तो राज्य मराठी परीक्षा बोर्ड बचेगा, बोर्ड बचेगा तो मराठी संस्कृति सुरक्षित रहेगी और मराठी माध्यम के विद्यार्थी प्रतिस्पर्धा में टिक पाएंगे. मराठी अनुदानित निजी विद्यालयों की गुणवत्ता बनाए रखना आवश्यक है और इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शिक्षकों पर है. यह विचार अमरावती विभागीय परीक्षा मंडल के अध्यक्ष संदीप संघवई ने व्यक्त किए.
वे स्थानीय सिपना कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के सभागृह में अमरावती विभागीय परीक्षा मंडल एवं जिला शिक्षा विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित मुख्याध्यापकों की जिला स्तरीय एकदिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे. कार्यशाला में शिक्षा उपसंचालक (अमरावती विभाग) निलिमा टाके-गुल्हाने, जिला माध्यमिक शिक्षा अधिकारी प्रिया देशमुख, सिपना शिक्षण प्रसारक मंडल के संचालक निलेश गुप्ता, डायट के व्याख्याता दीपक चांदुरे, उपशिक्षणाधिकारी रजनी शिरभाते एवं इमरान खान सहित अनेक अधिकारी एवं शैक्षणिक संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित थे.
सुबह 11.30 से शाम 5.15 बजे तक चली इस कार्यशाला में जिले के सभी माध्यमिक विद्यालयों के मुख्याध्यापक सहभागी हुए. आगामी दसवीं-बारहवीं बोर्ड परीक्षाएं, निपुण भारत अभियान, यू-डाइस पोर्टल, आधार वैधता, अपार आईडी अपडेट, ड्रॉपआउट, एनएमएमएस नवीनीकरण, राजीव गांधी विद्यार्थी दुर्घटना अनुग्रह योजना, 26 जनवरी सामूहिक परेड जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से मार्गदर्शन किया गया. उद्घाटन सत्र में संदीप संघवई ने कहा कि मराठी स्कूलों के शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को अभिभावकों का खोता हुआ विश्वास फिर से जीतना होगा. उन्होंने कहा कि संपन्न वर्ग के बच्चे भले ही महंगे स्कूलों में पढ़ें और विदेश चले जाएं, लेकिन देश का भविष्य सामान्य, किसान और श्रमिक वर्ग के बच्चों के हाथों में है, जिनके पास मराठी स्कूलों के अलावा कोई विकल्प नहीं है. यदि ये स्कूल कमजोर पड़े, तो इन बच्चों का भविष्य संकट में पड़ जाएगा. उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी बोर्ड परीक्षाएं नकलमुक्त और तनावमुक्त वातावरण में संपन्न होंगी, लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि उड़नदस्तों और सतर्कता दल की नजर इस बार और सख्त रहेगी. शिक्षण उपसंचालक निलिमा टाके-गुल्हाने ने निपुण भारत अभियान के तहत विद्यार्थियों की पढ़ने-लिखने और गणनात्मक क्षमताओं पर चिंता व्यक्त की. उन्होंने ‘स्कूल जोड़’ जैसी नई संकल्पना प्रस्तुत करते हुए तकनीक के माध्यम से विद्यालयों के बीच सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया. साथ ही करियर काउंसलिंग, श्रेणी सुधार योजना, परीक्षा केंद्र संबंधी लचीली व्यवस्थाओं और विद्यार्थियों के हित में बोर्ड द्वारा दी जा रही सुविधाओं की जानकारी दी. जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) प्रिया देशमुख ने मुख्याध्यापकोें को उनकी जिम्मेदारियों का स्मरण कराते हुए कहा कि शिक्षक की छोटी सी चूक भी एक पूरी पीढ़ी को नुकसान पहुंचा सकती है. उन्होंने राजीव गांधी विद्यार्थी दुर्घटना अनुग्रह योजना में बढ़ाए गए आर्थिक लाभ की जानकारी भी दी. कार्यशाला में विभिन्न अधिकारियों ने यू-डाइस, आधार सत्यापन, अपार आईडी, एनएमएमएस, निपुण भारत अभियान और बोर्ड परीक्षा की तैयारियों पर मार्गदर्शन किया. कार्यक्रम का संचालन एवं आभार प्रदर्शन संत कंवरराम विद्यालय की मुख्याध्यापिका मंजू अडवाणी ने किया.

Back to top button