गट प्रमुख के आदेश के विरुद्ध जाने पर जा सकता है नगरसेवक पद

गट में नाम दर्ज होते ही लागू होती है ‘दल-बदल विरोधी’ कार्रवाई

मुंबई/दि.22 – स्थानीय निकाय चुनाव के बाद यदि किसी नगरसेवक का नाम किसी राजनीतिक दल, आघाड़ी या गट में दर्ज हो जाता है, तो उस क्षण से उस पर दल-बदल विरोधी कानून लागू हो जाता है. इसके बाद यदि वह गट प्रमुख या पार्टी नेतृत्व के आदेश के विरुद्ध मतदान करता है या अलग भूमिका अपनाता है, तो उसका नगरसेवक पद भी जा सकता है. महाराष्ट्र स्थानीय प्राधिकरण सदस्य अपात्रता अधिनियम, 1986 और महाराष्ट्र स्थानीय प्राधिकरण सदस्य अर्हता नियम, 1987 के अनुसार, चुनाव परिणाम घोषित होने के 30 दिनों के भीतर सभी नगरसेवकों को अपने-अपने दल, आघाड़ी या गट के रूप में विभागीय आयुक्त के समक्ष अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होता है.
* पंजीकरण की प्रक्रिया क्या है?
नगरसेवकों को विभागीय आयुक्त के कार्यालय में दो प्रकार के आवेदन भरने होते हैं, पहले आवेदन में पार्टी या गट की ओर से निर्वाचित सभी नगरसेवकों की संयुक्त जानकारी तथा दूसरे आवेदन में प्रत्येक नगरसेवक की व्यक्तिगत जानकारी, जिसमें आधार कार्ड, फोटो पहचान पत्र और संबंधित निर्वाचित उम्मीदवार के हस्ताक्षर अनिवार्य होते हैं. इन दस्तावेजों की जांच के बाद विभागीय आयुक्त नियम 5 (1) के अंतर्गत प्रतिज्ञापत्र लेकर राजपत्र (गजट) में गट की औपचारिक नोंद करता है. इसके बाद वही गजट सूची महापालिका के भीतर समितियों के गठन, महापौर चुनाव और अन्य पदों के चुनावों के लिए अंतिम और मान्य सूची मानी जाती है.
* आदेश के विरुद्ध गए तो सदस्यता खतरे में
एक बार गट की नोंद हो जाने के बाद, उस गट के किसी भी नगरसेवक द्वारा गट प्रमुख के निर्देशों के विरुद्ध मतदान करना, मतदान से अनुपस्थित रहना या विपरीत भूमिका लेना, दल-बदल विरोधी कानून के अंतर्गत अपराध माना जा सकता है. ऐसी स्थिति में संबंधित नगरसेवक को अपात्र ठहराया जा सकता है और उसका पद समाप्त हो सकता है.
* गट पंजीकरण क्यों है जरूरी?
बृहन्मुंबई महानगरपालिका अधिनियम और महाराष्ट्र म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन एक्ट के तहत सभी नगरपालिकाओं में चुनाव के 30 दिनों के भीतर गट या आघाड़ी का पंजीकरण अनिवार्य है. यह पंजीकरण महापौर पद की चुनाव प्रक्रिया से पहले होना अत्यंत आवश्यक माना गया है, ताकि मत विभाजन, दलबदल और अस्थिरता को रोका जा सके. कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका में मनसे ने अपने पांच नगरसेवकों का अलग गट पंजीकृत कराया है. वहीं शिंदे गुट और मनसे की संयुक्त आघाड़ी की भी औपचारिक नोंद विभागीय आयुक्त के समक्ष की गई है. इसके चलते दोनों दलों के नगरसेवकों पर व्हिप लागू रहेगा.
उधर, मुंबई महानगरपालिका में उद्धव गुट के 65 में से 64 नगरसेवकों ने सामूहिक रूप से गट पंजीकरण कराया है, जबकि एक नगरसेवक अब तक पंजीकरण से बाहर है. उसे महापौर चुनाव से पहले पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा, अन्यथा उसके खिलाफ कार्रवाई संभव है.
* दल-बदल विरोधी कानून का उद्देश्य (1986-87)
इस कानून का मूल उद्देश्य स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं – जैसे महानगरपालिका, जिला परिषद, नगर परिषद आदि – में निर्वाचित सदस्यों के दलबदल को रोकना और राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना है.
* अपात्रता के प्रमुख आधार
नगरसेवक को निम्न परिस्थितियों में अपात्र ठहराया जा सकता है. स्वेच्छा से पार्टी या गट की सदस्यता छोड़ना. पार्टी या गट के आदेश के विरुद्ध मतदान करना या मतदान से जानबूझकर अनुपस्थित रहना. लाभ का राजनीतिक पद धारण करना.
* निर्णय और प्रक्रिया
अपात्रता संबंधी निर्णय आयुक्त या जिलाधिकारी द्वारा दिए जाते हैं. कानून के तहत समयबद्ध निर्णय (आमतौर पर 90 दिनों के भीतर) देने का प्रावधान है. अपात्र ठहराए जाने पर संबंधित सदस्य का पद समाप्त हो जाता है और निर्धारित अवधि (जैसे 6 वर्ष) तक वह किसी निर्वाचित पद के लिए अयोग्य घोषित हो सकता है.

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