कौन बनेगा अमरावती का 17 वां महापौर?
महापौर पद ‘सर्वसाधारण’ श्रेणी के लिए आरक्षित होने से सत्ता समीकरणों में हलचल

* किसी भी प्रवर्ग के महिला या पुरुष पार्षद के पास महापौर बनने का मौका, दावेदारों की संख्या में हो सकती है बढोत्तरी
अमरावती/दि.22 – अमरावती महानगरपालिका के महापौर पद के लिए गुरुवार को आरक्षण का ड्रॉ निकाला गया, जिसमें यह पद ‘सर्वसाधारण’ श्रेणी के लिए आरक्षित किया गया है. इससे अब 17 वें महापौर पद के लिए किसी भी जाति, वर्ग या लिंग के नगरसेवक के लिए रास्ता खुल गया है. राजनीतिक हलकों में इसे अमरावती के लिए ओपन ड्रॉ माना जा रहा है, जिससे सत्ता संघर्ष और भी रोचक हो गया है. इस बार महानगरपालिका चुनाव में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के कारण सत्ता गठन को लेकर विभिन्न दलों के बीच जोड़-तोड़ तेज हो गई है. महापौर चयन की प्रक्रिया शीघ्र शुरू होने की संभावना है और सभी दल अपने-अपने स्तर पर समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं.
* सदन की वर्तमान स्थिति
नवीनतम चुनाव परिणामों के अनुसार भाजपा ने सबसे अधिक 25 सीटें जीती हैं. युवा स्वाभिमान पार्टी और कांग्रेस को 15-15 सीटें मिली हैं, जबकि एमआईएम को 12, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) को 11, शिवसेना (शिंदे गुट) को 3, बहुजन समाज पार्टी को 3, शिवसेना (ठाकरे गुट) को 2 और वंचित बहुजन आघाड़ी को 1 सीट प्राप्त हुई है. 87 सदस्यीय सदन में महापौर पद जीतने के लिए 44 सदस्यों का समर्थन आवश्यक है. किसी भी दल के पास अकेले बहुमत न होने के कारण गठबंधन सरकार बनने की पूरी संभावना है.
* संभावित सत्ता समीकरण
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार भाजपा, युवा स्वाभिमान पार्टी और उनके सहयोगी दलों के साथ सत्ता स्थापना की संभावनाएं प्रबल मानी जा रही हैं. युवा स्वाभिमान पार्टी के अध्यक्ष विधायक रवि राणा पहले ही यह संकेत दे चुके हैं कि उनके समर्थन से भाजपा का महापौर चुना जा सकता है. वहीं कांग्रेस, राष्ट्रवादी और अन्य विपक्षी दल भी वैकल्पिक गठबंधन बनाने की कोशिशों में जुटे हैं.
* अब तक के महापौर
अमरावती महानगरपालिका के इतिहास में अब तक 16 लोग महापौर पद पर आसीन हो चुके हैं, जिनमें पांच महिलाएं शामिल हैं. इनमें डॉ. देविसिंह शेखावत, प्रभाकर सव्वालाखे, गोविंद अग्रवाल, विद्याताई देशपांडे, किरणताई महल्ले, प्रवीण काशीकर, नितीन वानखडे, विलास इंगोले, दीपाली गवळी, मिलिंद चिमोटे, अशोक डोंगरे, एडवोकेट किशोर शेळके, वंदना कंगाले, चरणजीत कौर नंदा, संजय नरवणे और चेतन गावंडे शामिल हैं.
* मनपा का इतिहास और पृष्ठभूमि
10 मार्च 1992 को अमरावती को पहला महापौर मिला था, जब डॉ. देविसिंह शेखावत इस पद पर विराजमान हुए. 1992 से 8 मार्च 2022 तक के 30 वर्षों में अमरावती महानगरपालिका को कुल 16 महापौर मिले हैं. 9 मार्च 2022 से अब तक निगम में प्रशासकीय राज लागू है. अब प्रशासकीय शासन समाप्त होने के बाद फिर से निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के हाथ में नगर की बागडोर आने वाली है.
* राजनीतिक महत्व
महापौर पद का ‘सर्वसाधारण’ श्रेणी में जाना अमरावती की राजनीति को नया मोड़ देने वाला माना जा रहा है. इससे सभी दलों को अपने-अपने सर्वश्रेष्ठ और सर्वाधिक स्वीकार्य उम्मीदवार सामने लाने का अवसर मिलेगा. साथ ही, गठबंधन राजनीति की भूमिका भी निर्णायक रहने वाली है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला केवल पद का चयन नहीं, बल्कि आने वाले पांच वर्षों में अमरावती महानगरपालिका की कार्यशैली, विकास की दिशा और सत्ता संतुलन को भी तय करेगा.





