आज के सशक्त युवा ही राष्ट्र के भविष्य के निर्माता
ग्राम गीताचार्य हनुमंत ठाकरे का कहना

धामनगांव रेलवे/दि.22 – डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विश्वविद्यालय अकोला, श्री संत शंकर महाराज आश्रम ट्रस्ट पिंपलखुटा से संबद्ध श्री संत महाराज कृषि महाविद्यालय पिंपलखुटा, तालुका धामनगांव रेलवे जिला. अमरावती राष्ट्रीय सेवा योजना विशेष श्रम एवं संस्कृति शिविर दत्तक ग्राम मंगरुल दस्तगीर संत लहानुजी महाराज जन्मस्थान पर आयोजित किया जा रहा है और इन कार्यक्रमों में विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं.
राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर के युवाओं के लिए एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के मुख्य मार्गदर्शक ग्राम गीतचार्य मौली दास हनुमंत ठाकरे थे. प्रोफेसर दीपक बोंद्रे और पवन शिवरकर भी उपस्थित थे. श्री संत लहानुजी महाराज और मौली दास हनुमंत ठाकरे के जन्मस्थान पर आयोजित इस कार्यक्रम में ग्राम गीताचार्य ने अपने व्याख्यान में कहा कि राष्ट्र का सशक्त युवा ही राष्ट्र का भाग्य है. आज राष्ट्र को सशक्त बनाने के लिए युवाओं का सुसंस्कृत होना समय की मांग है. लेकिन हम देखते हैं कि आज का युवा व्यसनों में डूबा हुआ है. मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग और विभिन्न व्यसनों के कारण आज वह अपने परिवार से दूर हो गया है. आज विभिन्न स्थानों पर वृद्धाश्रमों की संख्या बढ़ रही है. इसका कारण यह है कि आज का युवा दिशाहीन है. उसे अच्छे-बुरे का ज्ञान नहीं है. अनेक युवाओं ने नशे की लत के कारण अपनी जान गंवाई है. आज उन्हें सशक्त बनाने के लिए संतमय और अच्छे विचारों की आवश्यकता है. इसीलिए राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज के अनुसार, चाहे हाथी हो, घास की रस्सी हो, चींटी हो, बाघ हो, शेर हो, जंगली कुत्ता हो, संगठन हो, उन्होंने संगठन के महत्व को बताया. ठीक वैसे ही जैसे डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने कहा था कि युवा का सहारा तो कोई नहीं देगा, लेकिन अच्छे युवाओं का संगठन हो तो चाहे काम कितना भी कठिन क्यों न हो, वह पूरा हो जाएगा. माता-पिता की सेवा करने वाले, नशे से दूर रहने वाले, राष्ट्र के स्तंभों के रूप में जागरूक, सशक्त युवाओं की आवश्यकता है ताकि एक मजबूत समाज का निर्माण हो सके. युवा सशक्त होकर ही समाज की सेवा कर सकता है. किसान जगत का स्वामी है. वे कृषि में कड़ी मेहनत करके अनाज उगाते हैं और उसे राष्ट्र को अर्पित करते हैं, यही कारण है कि पूज्य राष्ट्रीय संत तुकडोजी महाराज ने ग्राम गीता को ग्रामनाथ अर्थात् इस किसान को समर्पित किया है. उन्होंने अपने प्रवचन में कहा कि हम सब किसान की संतान हैं और केवल किसानों के लिए ही काम करेंगे, इसलिए आज के कृषि सेवकों को तन, मन और धन से किसान का सहयोग करना चाहिए, तभी हमें अपने जन्म का सार्थक अर्थ समझ आएगा. संत गाडगे महाराज, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर, स्वामी विवेकानंद, बाबा आमटे, सावित्रीबाई फुले, साधनाताई आमटे, सिंधुताई सपकाल, ग्राम गीताचार्य मौली दास जैसे विभिन्न समाजसेवकों के उदाहरण देते हुए हनुमंत ठाकरे ने अपने भाषणों के माध्यम से आज के युवाओं को जीवन में आदर्श स्थापित करने का संदेश दिया. कार्यक्रम के अंत में गाडगे बाबा गीत का समापन हुआ. मंगरुल दस्तगीर के दत्तक गांव में विद्यार्थियों ने सामाजिक जागरूकता, नशाखोरी, ग्राम स्वच्छता, शिक्षा, दहेज त्याग, समाज के लिए युवाओं की उपयोगिता, नशे से दूर रहने के उपाय, समाज को मजबूत बनाने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं जैसे विभिन्न विषयों पर नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किए. इसके लिए आज के युवाओं ने राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर के माध्यम से मंगरुल दस्तगीर गांव के चौराहों में संदेश पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है. गांव के युवाओं ने शिविर में भाग लिया और शिविर में युवाओं के समन्वय से कार्यक्रम को अनुकरणीय तरीके से संपन्न किया गया. कार्यक्रम का समापन हम तरूं-ही हिंद के खेलते हैं अंगर से लड़ते हैं तलवार से मगर जीते हैं प्यार से मगर जीते हैं प्यार से नारे के साथ हुआ.





