छत्री तालाब की जैवविविधता खतरे में, पक्षियों ने फेरा मुंह
कभी शितकाल में दिखाई देते थे 50 प्रजातियों के स्थलांतरित पक्षी

* गहन चिंता की बात, इस वर्ष मात्र 10 प्रतिशत ही पक्षी आये
अमरावती/दि.23 – कभी शीतकाल के मौसम में पक्षी प्रेमियों और पर्यावरणविदों के लिए आकर्षक का केंद्र रहने वाला शहर का ऐतिहसिक छत्री तालाब आज गंभीर संकट के दौरान से गुजर रहा हैं. एक समय था जब यहां सर्दियों के आगमन के साथ देश विदेश से लगभग 50 प्रजातियों के स्थलांतरित पक्षी बडी संख्या में पहुंचते थे, लेकिन इस वर्ष स्थिति चिंताजनक हो गई है. पक्षी विशेषज्ञ डॉ. जयंत वडतकर के अनुसार इस बार महज 10 प्रतिशत ही पक्षियों का आगमन दर्ज किया गया है, जो तालाब की जैवविविधता पर मंडराते खतरे की ओर स्पष्ट संकेत करता हैं.
प्रशासन की बढती अनदेखी ने छत्री तालाब परिसर को डंपिंग यार्ड का स्वरूप आया है. पूरे तालाब परिसर में घरेलू निकासी का कचरा एमआईडीसी के वाहन कारखाने के वेस्टेज कांच के ढेर, सीमेंट के टूटे पाईप, टाईल्स, अविसर्जित मृर्तियों का प्लास्टर आदि फैला पडा हैं इसी कारण अब स्थलांतरित होकर आनेवाले विदेशी पक्षियों ने छत्री तालाब से मुंह फेर लिया हैं. स्थानीय पक्षी प्रेमियों का कहना है कि पहले नवंबर से फरवरी तक तालाब के किनारे साइबेरियन पक्षी बार हेडेड गूज, पिंटेल, शोवेलर, ग्रे लैग गूज, कॉमन टील, सहित कई दुर्लभ प्रजातियां देखी जाती थी. सुबह शाम पक्षियों की चहचहाहट से पूरा क्षेत्र जीवंत रहता था. लेकिन अब हालात यह है कि तालाब के आसपास सन्नाटा पसरा रहता हैं.
पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक जल प्रदूषण, अतिक्रमण, गाद जमना, जलस्तर में कमी और मानवीय हस्तक्षेप इसके प्रमुख कारण हैं. तालाब में गंदे नालों का पानी गिरने से जल की गुणवत्ता लगातार खराब होती जा रही हैं. वहीं आसपास हो रही निर्माण कार्य और शोरगुल ने भी पक्षियों को यहां से दूरी बनाने पर मजबूर कर दिया है. स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण संगठनों ने भी इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की हैं. उनका कहना है कि छत्री तालाब न केवल प्राकृतिक धरोहर है, बल्कि यह क्षेत्र के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं. यदि इसकी अपेक्षा जारी रही तो इसका दुष्प्रभाव आनेवाले पीढियों को भुगतना पडेगा. अब देखना यह है कि प्रशासन और संबंधित विभाग इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेते है और क्या छत्री तालाब की खोती हुई जैवविविधता को बचाने के लिए ठोस प्रयास किए जाते है या नहीं.
* नामोनिशान मिट सकता है
छत्री तालाब न केवल प्राकृतिक धरोहर है. बल्कि यह क्षेत्र के परिस्थिति संतुलन को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आनेवाले वर्षों में छत्री तालाब से स्थलांतरित पक्षियों का नामोनिशान मिट सकता हैं. प्रशासन तालाब की नियमित सफाई, जलस संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और शांत क्षेत्र (साइलेंट जोन) के नियमों का कडाई से पालन करें.
– डॉ. जयंत वडतकर,
वन्यजीव विशेषज्ञ





