कब शुरु होगा राजकमल ब्रीज का काम? पूरा शहर पूछ रहा सवाल
व्यापारियों से लेकर सामाजिक कार्यकर्ता तक आंदोलन के मूड में

* सात महीनों से रोक रखी हैं टू विलर की भी आवाजाही
* क्षेत्र के दुकानदारों का व्यापार लगभग ठप
अमरावती/दि.24-शहर के बीचोबीच से गुजरते और लाइफ लाइन कहे जाते राजकमल रेलवे पुल के गत सात महीनों से बंद पडे होने और इसके मरम्मत और नवनिर्माण की दिशा में एक कदम भी न बढाया जाने से अब शहर के व्यापारी और सामान्य कार्यकर्ता आंदोलन के मूड में दिखाई दे रहे हैं. पुल अचानक बंद किए जाने से काफी लोगों की दिनचर्या के साथ-साथ व्यापार और व्यवहार पर बुरा असर पडा है. क्षेत्र के दुकानदारों का बिजनेस ठप हो गया तो कई लोगों को फेरा लेकर आना-जाना पड रहा है. लोगों को यह बात अधिक नागवार लग रही है कि सत्तापक्ष के साथ-साथ विपक्षी दल के राजनेता भी इस महत्वपूर्ण सब्जेक्ट पर चूं भी नहीं बोल रहे. पालक मंत्री आकर जाते हैं, वोट मांग जाते हैं, राजकमल रेलवे ब्रीज का मरम्मत या नवनिर्माण का जिक्र भी नहीं करते. सामान्य लोग जबकि भयानक परेशानी से जूझ रहे हैं.

व्यापार पडा ठप, लोग काफी नाराज
कैट के जिला अध्यक्ष और प्रसिद्ध अनाज शक्कर व्यापारी गोविंद सोमाणी ने तुरंत कहा कि, राजकमल रेलवे ब्रीज बंद पडने से छह माह से अधिक काल बीत गया है. शासन और प्रशासन कोई एक्शन नहीं ले रहा हैं. जबकि, राजकमल चौक और उस पार बेलपुरा-हमालपुरा के व्यापारियों का कारोबार ठप हो गया हैं. वे काफी नाराज है. शहर का प्रमुख ब्रीज तुरंत शुरु करना तो दूर, शासन और प्रशासन हर बार हाथ झटक रहा है. लगता है अब व्यापारियों को ही आंदोलन का मार्ग अपनाना पडेगा.

कम से कम रिपेयर करवा दें
महानगर चेम्बर के अध्यक्ष सुरेश जैन ने कहा कि, रेलवे ब्रीज पांच दशक पुराना हो गया. वह जर्जर हो सकता है. उसके अचानक बंद किए जाने के विरोध में जनप्रतिनिधि से भेंट कर निवेदन दिया था, गुजारिश की थी, ब्रीज के नवनिर्माण की बातें हो रही थी. व्यापारी संगठन के नाते हमारी इतनी गुजारिश हैं कि, ब्रीज नया नहीं कर सकते तो इसका कम से कम रिपेयर का काम करवा दीजिए. सुरेश जैन ने यह भी कहा कि, हर मामले में व्यापारी को ही बर्दाश्त करना पडता है. शहर का मध्य एरिया होने से कई प्रकार के व्यवसाय पर राजकमल ब्रीज ठप होने का बुरा प्रभाव देखा गया है. उससे भी बुरी बात यह है कि, अमरावती जैसे शहर में सत्तापक्ष या विपक्ष के राजनेता ध्यान नहीं दे रहे हैं. आश्चर्य की बात है कि, रेलवे ब्रीज दुरुस्त करने में तेजी के बजाय वहां दीवार खडी कर पैदल आने जानेवाले को भी रोक दिया गया है. जबकि, सभी ने देखा है कि अंबादेवी के नवरात्रि में हजारों श्रद्धालु इसी ब्रीज से होकर दर्शन के लिए आते जाते थे. अब तक प्रशासन ने नवनिर्माण या उसके मरम्मत के बारे में कोई निर्णय नहीं किया है, यह आश्चर्य के साथ-साथ असंतोष को बढावा देने वाली बात है.

लगता है सत्ताधारी आंदोलन चाहते हैं
अमरावती के जाने माने समाजसेवी डॉ. गोविंद कासट ने कहा कि, राजकमल रेलवे ब्रीज का बंद होना अमरावती की लाइफ लाइन को दबाने जैसा है. वर्षों से लोगों की इस ब्रीज से गुजरने की आदत इतनी रही की कई दिनों तक लोग वेहिकल लेकर पुल के पास पहुंच जाते और तब जाकर ध्यान आता कि ब्रीज बंद है. उन्हें दूसरा रास्ता लेना पडता. सात माह बीत गए है. चुनावी आचारसंहिता भी खत्म हो गई हैं. अब तो रेल्वे ब्रीज को सुधारने या नया बनाने का काम शुरु होना चाहिए. लगता है सत्ताधारी चाहते हैं कि, अमरावती के लोग आंदोलन करें. तभी वे इस महत्वपूर्ण ब्रीज को ठीक करने या नया बनाने के बारे में सोचविचार करेंगे. गोविंद कासट ने यह भी कहा कि, आप और हमारे जैसे लोगों को एकत्र होकर आंदोलन खडा करना पडेगा. शासन और प्रशासन तो कुछ करता नजर नहीं आ रहा. वे लोग राजकमल ब्रीज की हालत चित्रा चौक उडान पुल जैसी कर रहे है, जो 7-8 वर्षों से निर्माणाधीन पडा है. लोगों के घरों में मिट्टी और धूल उड रही है. हमारे कर्णधार हम लोगों की सहनशीलता की परीक्षा लेने पर तुले हैं.

मरम्मत का काम तो शुरु कीजिए
बैंकर दीपक उपाध्याय ने आश्चर्य जताया कि, सात महीने बीत जाने पर भी शहर के महत्वपूर्ण राजकमल रेलवे ब्रीज का कार्य शुरु नहीं किया गया है, जबकि सभी लोगों को बडी परेशानी हो रही है. सत्तापक्ष इस दिशा में कुछ भी कहने से क्यों बच रहा है, यह सोचनीय बात है. ब्रीज का मरम्मत का काम तो जल्द शुरु हो ही सकता है. उसमें भी क्यों विलंब हो रहा है, यह समझ से परे हैं. उपाध्याय ने कहा कि, बडनेरा रोड की ओर तथा शहर के पुराने परकोटे के भीतर रहने वाले लोगों को बसस्टैंड या कैम्प एरिया में जाने के लिए लंबा फेरा लेकर जाना पड रहा हैं. उन्होंने यह भी कहा कि, ब्रीज कम से कम टू विलर के लिए शुरु रखा जा सकता है. इसकी कंडिशन इतनी तो ठीक दिखाई दे रही है कि, पैदल यात्रा वहां से गुजर सकें. रेल्वे ब्रीज के अलावा रेल लाइन को पार करने का कोई विकल्प नहीं है. हैरत है की अधिकारियों के ध्यान में यह बात क्यों नहीं आती?

व्यापारी, विद्यार्थी, वरिष्ठ सभी को परेशानी
साहित्यकार और होलसेल दवा व्यापारी पवन जायसवाल ने कहा कि, रेल्वे ब्रीज 6 माह हो गए बंद पडा है. कोई जनप्रतिनिधि आवाज नहीं उठाता. मनपा चुनाव भी हो गए. अब तो आचारसंहिता की कोई दिक्कत नहीं है. ब्रीज का काम फौरन शुरु किया जाना चाहिए. क्योंकि बहुत बडे क्षेत्र के व्यापारी, विद्यार्थी, वरिष्ठ नागरिक सभी परेशान है. लोगों का एकदूसरे के यहां जाना भी रेलवे पुल बंद होने के कारण प्रभावित हुआ है. बेलपुरा-हमालपुरा के दुकानदारों का लाखों का कारोबार ठप पडा है. अचानक ऐन त्योहारों के समय रेल्वे पुल बंद कर देने से राजकमल चौक आने जाने की सभी की दिक्कत बढ गई थी. यह अब तो शोचनीय है कि, अमरावती के नुमाइंदे यह ब्रीज नया बनवा रहे या मरम्मत कर रहे है. जल्दी डिसीजन क्यों नहीं ले रहे है.





