भ्रष्टाचार के खिलाफ कडी भूमिका अपनाने की वजह से लाया गया अविश्वास प्रस्ताव

बाभुलखेडा गट ग्राम पंचायत के सरपंच मारोतराव भाकरे ने पत्रवार्ता में लगाया आरोप

अमरावती/दि.24 – वरुड तहसील के गट ग्राम पंचायत बाभुलखेड़ा में सरपंच मारोतराव भाकरे द्वारा ग्रापं में होनेवाले भ्रष्टाचार के खिलाफ कठोर व कडी भूमिका अपनाए जाने के चलते उपसरपंच सहित पांच सदस्यों ने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया है. ताकि सरपंच भाकरे पर दबाव डाला जा सके, इस आशय का आरोप आज यहां बुलाई गई पत्रवार्ता में खुद सरपंच मारोतराव भाकरे द्वारा लगाया गया. साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि, वे ऐसे किसी दबाव के आगे झुकनेवाले नहीं है.
इस पत्रवार्ता में सरपंच मारोतराव भाकरे ने बताया कि, वे बाभुलखेडा गट ग्रामपंचायत में चार बार निर्वाचित हो चुके है तथा उन्हें स्वच्छ व पारदर्शी कार्यशैली के लिए जाना जाता है. वर्ष 2022 में हुए चुनाव में वे सीधे जनता द्वारा निर्वाचित हुए थे, जबकि विरोधी पक्ष के सदस्य पैनल के माध्यम से चुने गए थे. पंचायत में कुल सात सदस्य और एक सरपंच हैं. वर्ष 2022 में पंचायत के अंतर्गत रोजगार सेवक मनोज विनायक राठौड़ द्वारा फर्जी कार्य कराकर मनरेगा के पैसों का गबन किया गया. सरपंच की शिकायत पर जांच हुई और जिला परिषद सीईओ ने संबंधित कर्मचारी को निलंबित किया. हालांकि, उपसरपंच व कुछ सदस्यों द्वारा ग्रामसभा में दबाव बनाकर दोषी कर्मचारी को पुनः बहाल कराने का प्रयास किया गया.
सरपंच भाकरे का कहना है कि महाराष्ट्र शासन के निर्णय (जीआर) के अनुसार दोषी कर्मचारी को हटाने या निलंबित करने का अधिकार ग्रामसभा को है, लेकिन उसे पुनः नियुक्त करने का अधिकार नहीं है. साथ ही, मामला न्यायालय में लंबित होने के कारण कर्मचारी को पुनः सेवा में नहीं लिया जा सकता. सरपंच मारोतराव भाकरे ने स्पष्ट किया, मैं कानून के दायरे में रहकर ही काम करूंगा और किसी भी भ्रष्ट व्यक्ति को संरक्षण नहीं दूंगा. अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर भी दोषी कर्मचारी को काम पर नहीं लूंगा. अब ग्रामसभा में दूसरी प्रक्रिया पूरी होगी. यदि ग्रामसभा में भी सरपंच को हटाने का प्रस्ताव पारित होता है तो वे पदमुक्त हो जाएंगे, अन्यथा वे अपने पद पर बने रहेंगे.

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