एकही शख्स ने दायर की 9 हजार अपील
बीड के निंबालकर को खंडपीठ ने लगाई फटकार

* सूचना के अधिकार का उपयोग ब्लैक मेलिंग में?
अमरावती/दि.24-पारदर्शी प्रशासन के लिए लाए गए सूचना का अधिकार कानून का दुरुपयोग बडे प्रमाण में होने का खुलासा एक प्रकरण के बाद हुआ. बीड के एक व्यक्ति ने 9 हजार से अधिक अपील पुणे, छत्रपति संभाजीनगर, नाशिक खंडपीठ में दायर की. यह अपील नामंजूर करते हुए खंडपीठ ने अपीलकर्ता केशव साहेबराव निंबालकर को जमकर आडे हाथ लिया. सूचना के अधिकार कानून का दुरुपयोग की ब्लैक मेलिंग के प्रयास होने की शिकायतें बढने का दावा किया जा रहा है.
2005 में यह कानून बना था. शासकीय कार्यालयों की सार्वजनिक जानकारी मांगने का अधिकार कानून अंतर्गत प्राप्त है. जनहित में जानकारी मांगी जा सकती है. किंतु प्रदेश में फिरौती के लिए उक्त कानून का उपयोग किए जाने का आरोप कई बार लगाया गया है. घर बैठे बैठे आवेदन कर जानकारी मांगनेवाले एक शख्स को सूचना आयुक्त नाशिक ने फटकारा. उनका नाम केशव निंबालकर है. निंबालकर ने पुणे, नाशिक, अहिल्या नगर, जलगांव,धुले, नदुंरबार जिलों में विविध शासकीय कार्यालयों में अनेक आवेदन दायर किए. प्रथम अपील पर उपस्थित न रहते हुए सीधे दूसरी अपील पेश कर दी. 24 दिसंबर को नाशिक सूचना आयुक्त ने निंबालकर की 267 अर्जियों पर सुनवाई करते हुए मामले खारिज कर दिए. खंडपीठ ने देखा की अपिलार्थी सुनवाई के समय उपस्थित न रहते हुए सभी आवेदनों पर एकही तारिख की डाक की रजिस्टर पावती जोडी जाती है. सीधे द्वितीय अपील की जाती है. खंडपीठ ने आवेदनों में कही जनहित नजर नहीं आ रहा, यह कहते हुए नामंजूर किए.
केशव निंबालकर ने पुणे और नाशिक में अपील खारिज होने के बाद सूचना के अधिकार में अमरावती और नागपुर विभाग में ऐसे ही अपील दायर किए है. केवल सरकारी कार्यालयों को कठघरे में खडा करना ऐसा उनका उद्देश्य रहने का दावा कर इस प्रवृत्ति को तत्काल रोके जाने की आवश्यता भी बताई जा रही है. सूचना के अधिकार कानून का उपयोग जनहित से अधिक अपना हित साधने में होने का खुलासा हो रहा है.
निंबालकर ने पुणे खंडपीठ में 3342, छत्रपति संभाजीनगर खंडपीठ में 5466, नाशिक खंडपीठ में 1023 द्वितीय अपील दायर की थी. सभी शिकायतें अपील आयोग ने अस्वीकार कर दी हैं.





