आंदोलनकारियों ने रतन इंडिया की कोयला ढोने वाली रेल रोकी
पांच दिनों के धरना आंदोलन के बाद उद्यमियों का निर्णायक रुख

अमरावती/दि.26 – अंबाई ब्रिक्स एंड ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (-छउ) की ओर से रतन इंडिया ऊर्जा प्रकल्प की कथित व्यवसाय-विरोधी नीतियों के विरोध में पिछले पांच दिनों से प्रकल्प के मुख्य प्रवेशद्वार पर धरना आंदोलन किया जा रहा है. प्रशासन द्वारा लगातार अनदेखी किए जाने और अब तक न्याय न मिलने से आक्रोशित आंदोलनकारियों ने आंदोलन को उग्र एवं निर्णायक मोड़ देते हुए रतन इंडिया की कोयला परिवहन करने वाली रेल को रोक दिया.
आंदोलनकारियों का आरोप है कि रतन इंडिया ऊर्जा प्रकल्प ने राख निविदा प्रक्रिया में नियमों की खुलेआम अनदेखी करते हुए जानबूझकर लघु एवं सूक्ष्म उद्यमियों को बाहर रखा है. इस अन्यायपूर्ण नीति के कारण भविष्य में स्थानीय ईंट-भट्ठा उद्यमियों और परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों के समक्ष रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा होने की आशंका है. इसी के विरोध में आंदोलनकारियों ने आंदोलन की दिशा बदलते हुए सीधे रतन इंडिया की कोयला ढोने वाली रेल को रोका. वाघोली स्थित रेलवे मार्ग पर आंदोलनकारी रेल पटरियों पर बैठ गए, जिससे कोयला परिवहन पूरी तरह ठप हो गया. घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है और स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है. इस अवसर पर बलवीर चव्हाण, राजू चिरडे, मोरेश्वर इंगले, सतिश तायडे, श्रीकांत सरोदे, तिरथदास खत्री, पवन रावते, प्रणय मेहरे, अक्षय देशमुख, नागेश भगत, विनोद डांगे, दिनेश दुबे, अनिल जाधव, उमेश भगत, कार्तिक इंगले, अनूज गणोरकर, सागर खराटे, मंगेश आखरे, निखिल तायडे, प्रफुल्ल साबले, किरण कुंभलकर, विजय धुमने, नंदू बरधे, रमेश प्रजापति समेत सैंकडो आंदोलक उपस्थित थे.
* स्थानीय उद्योजकों की दिशाभूल
रतन इंडिया उर्जा प्रकल्प से निर्माण होनेवाली राख यह 20 प्रतिशत स्थानीय उद्योजकों के लिए आरक्षित रहते हुए रतन इंडिया ने निविदा चलाते समय स्थानीय उद्योजकों की दिशाभुल की. यह हम पर अन्याय हैं. जब तक यह प्रक्रिया नए सीरे से चलाई नहीं जाती तब तक हम यहां से हटेंगे नहीं.
* बलवीर चव्हाण, स्थानीय उद्योजक





