राजस्थान में सरपंच प्रशासक होता है; महाराष्ट्र में क्यों नहीं?

सरपंच संगठना का सवाल

* ग्राम स्वराज पर दोहरी नीति के आरोप
* सरकार के नए निर्णय पर असंतोष
अमरावती/दि.27 – राजस्थान सरकार ने ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद केवल निवर्तमान सरपंचों को ही प्रशासक नियुक्त करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है. वहीं दूसरी ओर, महाराष्ट्र सरकार ने सरपंच संगठनों पर निर्वाचित सरपंचों की अनदेखी करते हुए सरकारी अधिकारियों को प्रशासक नियुक्त करने का आरोप लगाया है.
राजस्थान के ग्रामीण विकास और पंचायती राज विभाग द्वारा 16 जनवरी 2025 को जारी किया गया. अधिसूचना के अनुसार, यह निर्णय लिया गया है कि जिन ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 31 जनवरी 2025 को समाप्त हो रहा है और अपरिहार्य कारणों से चुनाव नहीं हो सकते, उनमें निवर्तमान सरपंच को प्रशासक नियुक्त किया जाएगा. इसके साथ ही, ग्राम प्रबंधन के लिए उपसरपंच और वार्ड पंचायतों से मिलकर एक प्रशासनिक समिति का गठन किया जाएगा. जन प्रतिनिधियों के मार्गदर्शन में इसे जारी रखने का निर्णय लिया गया है. हालांकि, महाराष्ट्र में 1 जनवरी 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक समाप्त होने वाली ग्राम पंचायतों में सरपंचों के स्थान पर ग्राम विकास अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी. ग्राम सेवकों और विस्तार अधिकारियों को प्रशासक के रूप में नियुक्त किया जाएगा.
अमरावती जिले में ऐसे 550 ग्राम पंचायतें हैं. इस बीच, सरकार के नवीनतम निर्णय ने लोकतंत्र को खतरे में डाल दिया है और ग्राम स्वराज और ग्रामीण विकास के लिए गंभीर परिणामों की आशंका है. इस संबंध में, राष्ट्रीय प्रधान मुखिया सरपंच संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल उके और राज्य अध्यक्ष प्रमोद सांगोले ने कड़े शब्दों में अपनी नाराजगी व्यक्त की है. उनका कहना है, ’राजस्थान सरकार जनता द्वारा चुने गए सरपंचों पर भरोसा करती है, तो महाराष्ट्र सरकार जनता के प्रतिनिधियों पर भरोसा क्यों नहीं करती? यह एक अलोकतांत्रिक निर्णय है और ग्राम स्वराज्य को कमजोर करता है.’ विशेषज्ञों के अनुसार, राजस्थान सरकार का यह निर्णय लोकतंत्र, विकेंद्रीकरण और ग्राम स्वशासन को मजबूत करता है और महाराष्ट्र के लिए भी एक आदर्श बन सकता है. इसी कारण संगठन ने अब राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है.

* ख़तरे में ’मुख्यमंत्री ग्राम समृद्धि योजना’!
यदि निर्वाचित सरपंचों की जगह प्रशासक नियुक्त कर दिए जाएं, तो मुख्यमंत्री की ग्राम समृद्धि और इसी तरह की महत्वाकांक्षी योजनाएं कागजों तक ही सीमित रह जाएंगी, गांवों का समग्र विकास बाधित होगा, और यदि प्रशासन ऐसे अधिकारियों को सौंप दिया जाए जो जमीनी हकीकत से अनजान हैं, तो ग्रामीण विकास की गति धीमी हो जाएगी. इसके विपरीत, यदि जिम्मेदारी निर्वाचित प्रतिनिधियों को दी जाए, तो गांवों में विकास कार्य, योजनाओं का क्रियान्वयन और जनता से संवाद अधिक प्रभावी होगा.

* संगठन ने राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन की चेतावनी
संगठन ने महाराष्ट्र सरकार से राजस्थान जैसी नीति अपनाने की प्रबल मांग है. इस बीच, यदि निर्वाचित सरपंचों को प्रशासनिक शक्तियां दी जाएं, इसलिए यदि मंजूरी नहीं दी गई, तो पूरे राज्य में जोरदार विरोध प्रदर्शन की चेतावनी भी दी गई है. ’राजस्थान में जो संभव है, वह महाराष्ट्र में असंभव क्यों है?’ संगठन ने दृढ़ रुख अपनाते हुए कहा है, ’लोकतंत्र का सम्मान करो, ग्राम स्वशासन की रक्षा करो.’

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