वर्षों में तैयार होता है ऐसा दबंग नेतृत्व

डॉ. सुनील देशमुख ने राज्य मंत्री के दौर को किया याद

* अजीत दादा पवार के डेप्युटी के रुप में पांच वर्ष किया काम
* जनता के लिए अधिकारियों से भिड जाते थे दादा
अमरावती /दि.28 – जिले के पूर्व पालकमंत्री डॉ. सुनील देशमुख ने उपमुख्यमंत्री अजीत दादा पवार के डेप्युटी अर्थात वित्त राज्य मंत्री के रुप में साथ किए गए कार्य को बहुत शिद्दत से याद किया. पुराने स्मृतियों को ताजा करते हुए कांग्रेस नेता डॉ. देशमुख भी बिलख पडे थे. उनकी आंखों के पोर सजल हो गए थे. डॉ. सुनील देशमुख ने 2005 का वह दौर कल की घटना की तरह स्मरण किया और अनेक वाकयों के साथ अजीत दादा पवार को याद किया.
* मंत्रिमंडल बैठकें
डॉ. सुनील देशमुख ने कहा कि, अजीत दादा आज की तरह वित्त और नियोजन मंत्री थे. वे उसी विभाग में राज्य मंत्री थे. ऐसे में मंत्रिमंडल की अनेक बैठकों में तत्कालीन सीएम विलासराव देशमुख के साथ हम सभी सहभागी होते. कैबिनेट बैठक में निश्चित ही पूरे राज्य के मसले आते. कई विभागों से फंड की दरकार आती. अजीत दादा विचारपूर्वक और फंड की मांग लानेवाले नेताओं से काफी पूछताछ करते. उसके बाद ही कैबिनेट में फंड मंजूरी का प्रस्ताव लाते. किसी मंत्रिमंडल सहयोगी द्वारा उस पर कोई प्रश्न अथवा शंका उपस्थित करते तो उसका संपूर्ण समाधान करके ही अजीत दादा मानते.
* आंकडों का स्मरण विस्मयकारी
डॉ. सुनील देशमुख ने बताया कि, वित्त मंत्रालय वर्षों से संभालने का अनुभव अजीत दादा को रहा. लोग संख्या देखकर चकित रह जाते अथवा गफलत में आ जाते. किंतु अजीत दादा आंकडों के बेमिसाल बाजीगर कहे जा सकते हैं. किस हेड में किस काम के लिए कितना फंड मंजूर किया था, कितना यूज हुआ यह अजीत दादा को मुंह जबानी याद रहता. इतनी स्मरण शक्ति तो वह प्रोजेक्ट या काम लानेवाले नेता या कार्यकर्ता की भी न रहती. दादा ने मंत्रिमंडल की बैठक में कई बार अपने सहयोगी नेताओं के प्रश्नों के बेमिसाल उत्तर दिए हैं.
* जलसंपदा के किस्से
डॉ. सुनील देशमुख ने बताया कि, वित्त और जलसंपदा विभाग के अजीत दादा मंत्री थे. वे अर्थात सुनील देशमुख राज्य मंत्री. डॉ. देशमुख बताते हैं कि, जलसंपदा विभाग में भी विभिन्न प्रोजेक्ट के लिए तत्परता से फंड मंजूरी करते. उन्होंने बताया कि, अजीत दादा किसान हित पहले देखते. किसान और जनसामान्य के हितों की खातिर विभागों के सचिव, प्रधान सचिव और अन्य उच्चाधिकारियों से अजीत दादा टकरा जाते. कांग्रेस नेता ने कहा कि, अजीत दादा जनसामान्य का हित देखकर प्रोजेक्ट को तत्परता से मंजूर करते और उसका फालोअप भी लेते. अजीत दादा ने अल्पावधि में हम सभी का मन जीत लेने की प्रतिक्रिया भी कांग्रेस नेता डॉ. देशमुख ने व्यक्त की. डॉ. देशमुख ने अनेक कैबिनेट बैठकों को याद किया.
* बेजोड हास्यशिल्पी
डॉ. सुनील देशमुख ने बताया कि, अजीत दादा हाजिर जवाबी व्यक्तित्व थे. उसी प्रकार हास्य की गजब की समझ और शैली दिवंगत उपमुख्यमंत्री की रही. उन्होंने कई वाकए याद कर बताया कि, अपने विरोधी राजनेता पर ताना कसने से नहीं चूकते थे. किंतु हंसी-ठठ्ठा भी बडी मर्यादा में रहकर करते. उन जैसा दिलखुलास व्यक्तित्व उतने ही दिलखुलास सीएम विलासराव देशमुख की कैबिनेट में जंचता था.

 

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