सराफा को टैक्स घटने की बडी उम्मीद

तेजी मंदी पर कंट्रोल लाएं सरकार

* सोने और चांदी के दाम बढने से एंड यूजर हलकान
* बढ गया है दुकानदारी पर दबाव
अमरावती/ दि. 31- कल प्रस्तुत होने जा रहे देश के आम बजट को लेकर सभी क्षेत्र उत्सुक और आशंकित दोनों हैं. व्यापारी, उद्योग जगत से लेकर आम आदमी भी निर्मला सीतारामन के बजट को लेकर निगाहें गडाये हुए हैं. कल का रविवार छुट्टी का न होकर बैंकर, उद्योगपति, कर सलाहकार और सभी पक्षों के लिए अधिक काम एवं सावधानी का रहनेवाला है. ऐसे में अमरावती के सराफा व्यापारियों से चर्चा की तो उन्होंने मोटे तौर पर सोने तथा चांदी के बढते हुए दाम के कारण तीन प्रतिशत के जीएसटी में 80- 90 प्रतिशत कटौती की अपेक्षा व्यक्त की है.
अमरावती मंडल ने शहर के प्रमुख ज्वेलरी शोरूम संचालकों, उद्यमियों से चर्चा की तो उन्होंने टैक्स घटाने की मांग से लेकर पॉलिसी बदलने की डिमांड कर डाली. त्रिमूर्ति ज्वेलर्स के संचालक और ज्वेलर्स के राष्ट्रीय संगठन के पदाधिकारी अमित सोनी ने बिल्कुल नब्ज पर हाथ रखने के अंदाज में मोदी सरकार, वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन से पॉलिसी डिसीजन की अपेक्षा व्यक्त की है.

दुकानदार और एड यूजर को आधार वाली नीति चाहिए
जेम्स एंड ज्वेलरी असो. के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य तथा शहर के अग्रणी त्रिमूर्ति ज्वेलर्स के संचालक अमित सोनी ने दो टूक कहा कि वायदा बाजार को लेकर सरकार को बडा नीतिगत निर्णय लेने की घडी आ गई है. सोनी ने कहा कि आज वायदा बाजार पर कोई कंट्रोल नहीं होने से सटोरियों की बन आयी है. वे मार्केट को मनमाफीक चलाने का प्रयत्न कर रहे हैं. रोज 30- 40 % का उतार चढाव सामान्य ज्वेलरी दुकानदार और एंड यूजर ग्राहक को खत्म करने पर तुला है. इसके लिए शासन का हस्तक्षेप आवश्यक है. फ्यूचर ट्रेडिंग की सटोरियों की मूवमेंट का फिजिकल मार्केट पर असर नहीं होने देनेवाली पॉलिसी की नितांत आवश्यकता है. 30- 40 पर्सेंट का उतार चढाव ऐसे बाजार में कैसे चलेगा. जिसकी मार्जिन सब मिलाकर एक प्रतिशत से अधिक नहीं है. शासन के निश्चित ही सोचना होगा. ज्वेलरी इंडस्ट्री तभी खडे रह सकेगी. जब दुकानदार और ग्राहक दोनों सेफ होंगे. अन्यथा इतना बडा मार्केट धराशाही होने की पूरी आशंका अभी तो लग रही है. जेम्स एंड ज्वेलरी असो. के कार्यकारिणी सदस्य अमित सोनी ने 3 प्रतिशत जीएसटी को भी ताजा भाव को देखते हुए अन्याय जैसा कहा. उन्होंने कहा कि 1 लाख रूपए रेट पर 3% जीएसटी दिया जाता था. आज 4 लाख के रेट पर यह टैक्स 12 हजार रूपए हो रहा है. जो व्यापार के लिए हानिकारक है. सरकार को जीएसटी में 80-90 प्रतिशत छूट देनी ही होगी. उन्होंने यह भी कहा कि बेतहाशा बढे दाम से ग्राहकी नहीं जैसी हो गई है. ऐसे में माल बिकेेगा तभी तो कमाई होगी. व्यापार चलाने के लिए सरकार को बडा नीतिगत निर्णय करना ही पडेगा. वायदे बाजार का असर फिजिकल मार्केट पर न होने देने की नीति अपनानी होगी. अन्यथा ब्रांड की चमक दमक ने जिस प्रकार छोटे दुकानदारों, छोटे ज्वेलर्स को कगार पर ला दिया है, वैसे ही फ्यूचर ट्रेडिंग के भारी उतार चढाव से सूपडा साफ होने की नौबत आ गई है.

कस्टम और जीएसटी दोनों में मिलें राहत
शहर के अग्रणी ज्वेलरी शोरूम के संचालक और तेजी से आगे आते युवा उद्यमी समीर विजयराव कुबडे ने बजट को लेकर सोने और चांदी की कस्टम ड्यूटी एवं जीएसटी टैक्स रेट में रियायत की अपेक्षा व्यक्त की है. समीर कुबडे ने बडा स्पष्ट कहा कि हीरे और अन्य जेवरात लक्झरी की बात हो सकती है. किंतु भारतीय परिवेश में सोना मासपीपल का उपयोगी तथा निवेश का साधन है. उसके बढते दामों को देखते हुए शासन को निश्चित ही टैक्स रेट में रियायत देनी चाहिए. इससे लगभग सूने हो चले सराफा मार्केट को कुछ बूस्ट मिलने की उम्मीद रहेगी. शतक भर से अधिक पुरानी पेढी के संचालक समीर कुबडे ने कहा कि जनरल कॉस्टींग पहले ही दोगुनी हो चुकी है. उसमें टैक्स की रियायत सोने चांदी के ग्राहकों को कुछ प्रमाण में आकर्षित कर सकती है. इतने उंचे दाम पर सोना चांदी खरीदने वाले कम हो चले हैं. ऐसे में सरकार की ओर से टैक्स रियायत मार्केट को कुछ मजबूती प्रदान कर सकती है.

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