बजट में नहीं घटा टैक्स, सराफा निराश

पहले ही बढते दामों से प्रभावित है ग्राहकी

* सोने और चांदी पर कस्टम ड्यूटी के साथ जीएसटी भी
अमरावती/ दि. 3- देश की वित्त मंत्री द्बारा रविवार को संसद में प्रस्तुत बजट को लेकर जानकार सराहना कर रहे हैं. विकास परक बताकर प्रशंसा कर रहे हैं. किंतु सोने और चांदी पर लगाए गये टैक्स को कम करने का प्रस्ताव न होने से सराफा मार्केट निराश बताया जा रहा है. सराफा व्यापारियों को कस्टम ड्यूटी या जीएसटी में राहत की उम्मीद थी. उनकी दोनों ही उम्मीद वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन इस बजट में पूर्ण नहीं कर सकी है.
असो. ने दिए हैं निवेदन
सराफा व्यापारी असो. के पदाधिकारी बता रहे हैं कि राष्ट्रीय स्तर पर ज्वेलरी संगठनों ने केन्द्र सरकार विशेषकर वित्त मंत्रालय को इस बारे में ज्ञापन देकर अनुरोध किया है. सोने और चांदी पर 3% जीएसटी लागू है. उसी प्रकार आयातीत कीमती धातु पर भी 6% कस्टम डयूटी वसूली जाती है. ऐसे में असो. को बडी आशा थी कि बढते रेट के कारण मार्केट को संभालने के लिए वित्त मंत्री कृपा करेगी और टैक्स दरें कम की जायेगी.
बेतहाशा बढे रेट, ग्राहक सराफा से दूर
सोने और चांदी के भाव पिछले दो वर्षो में काफी बढे हैं. कई गुना हो गये हैं. सोने के रेट प्रति 10 ग्राम पौने दो लाख रूपए हो गये हैं.वहीं चांदी भी लगातार बढकर ढाई लाख रूपए किलो के रेट पर पहुंच गई है. ऐसे में सामान्य ग्राहक सराफा से दूर हो जाने की भावना अनेक व्यापारियों ने बोलकर बताई है. रेट बढने से ही सराफा की ग्राहकी ठप हो जाने की वजह से अब सरकार से ही व्यापारियों, ज्वेलर्स को कुछ उम्मीद थी. यह उम्मीद जीएसटी 3% से घटाने और कस्टम ड्यूटी में भी 2-3 प्रतिशत की राहत देने की थी. मगर बजट प्रस्तुत हो गया. बजट प्रावधानों को वित्त मंत्री ने पढकर सुनाया. जिसमें कीमती धातुओं के टैक्स रेट में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है. जिससे सराफा व्यापारी निराश बताए जा रहे हैं.

आशाओं पर फिरा पानी
सराफा व्यापारी असो. के अध्यक्ष राजेंद्र भंसाली ने कहा कि वित्त मंत्री महोदया ने देश के लाखों ज्वेलरी कारोबारियों की आशा पर तुषारापात किया है. टैक्स रेट में राहत मिलने से कुछ प्रमाण में ही सही किंतु ग्राहक सराफा मार्केट का रूख करते. अब तो विश्व बाजार में हो रही दामों की भारी घट- बढ को देखते हुए पता नहीं आगे व्यापार कैसे चलेगा ? भंसाली ने कहा कि अभी भी शासन को सोचना चाहिए. टैक्स रेट कम कर देना सराफा मार्केट, सुवर्ण और चांदी के कारीगरों के हित में रहेगा.

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