मनपा में वही हो रहा, जो ‘मंडल’ ने कहा था
खोडके और राणा ने ‘गठबंधन’ हेतु ‘बीच का रास्ता’ खोजा

* खोडके कह रहे, सीएम ने कहा इसलिए साथ है
* राणा बोले, ‘दादा’ को श्रद्धांजलि देने एनसीपी को साथ रखा
अमरावती/दि.4 – इस समय अमरावती महानगर पालिका में लगभग वहीं हो रहा है, जिसका दैनिक ‘अमरावती मंडल’ ने मनपा चुनाव के निपटते ही कयास और अनुमान लगा दिया था. त्रिशंकू सदन अस्तित्व में आने और किसी भी पार्टी के पास स्पष्ट बहुमत नहीं रहने के मद्देनजर दैनिक ‘अमरावती मंडल’ ने चुनाव परिणाम घोषित होते ही अनुमान जताया था कि, राज्य सरकार की तर्ज पर अमरावती महानगर पालिका में भी भाजपा के नेतृत्व तले ‘ट्रिपल इंजीन’ वाली सरकार बनेगी. जिसमें 25 सदस्यों वाली भाजपा, 15 सदस्यों वाली युवा स्वाभिमान पार्टी और 11 सदस्यों वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का समावेश रहेगा और अब वाकई ऐसा ही हकीकत में साकार होने जा रहा है. क्योंकि मनपा में सत्ता स्थापित करने हेतु भाजपा के साथ गठबंधन में युवा स्वाभिमान पार्टी यानि विधायक रवि राणा और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानि विधायक संजय खोडके के गुट भी शामिल है. अब तक लगभग असंभव दिखाई देनेवाले इस गठबंधन को साकार करने के लिए दोनों विधायकों एक तरह से ‘बीच का रास्ता’ अपनाया है. जिसके तहत जहां विधायक संजय खोडके ने सीएम फडणवीस के निवेदन को मान देते हुए गठबंधन में शामिल होने को लेकर हामी देने की बात कही. वहीं विधायक रवि राणा ने विधायक खोडके के गठबंधन में शामिल होने को लेकर अपनी कोई भी आपत्ति नहीं रहने तथा राकांपा के साथ मिलकर काम करने को ‘दादा’ के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि रहने की बात कही.
बता दें कि, किसी समय भले ही एक-दूसरे के धूर प्रतिद्वंदी रहनेवाले राकांपा नेता व विधायक संजय खोडके एवं युवा स्वाभिमान पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष व विधायक रवि राणा के साथ आने को लेकर काफी हद तक संभ्रम देखा जा रहा था और खुद विधायक संजय खोडके ने यह स्पष्ट रुप से कहा था कि, जिस गठबंधन में विधायक रवि राणा व उनकी युवा स्वाभिमान पार्टी शामिल है, ऐसे किसी भी गठबंधन में वे यानि खोडके शामिल नही होंगे. लेकिन इसके बावजूद अब विधायक संजय खोडके ने भाजपा के साथ उस गठबंधन में शामिल होने को लेकर हामी भरी है, जिस गठबंधन में विधायक रवि राणा की युवा स्वाभिमान पार्टी भी शामिल है. जिसके लिए दोनों ही नेताओं ने एक तरह से बीच का रास्ता अपनाया है, ताकि मनपा में सत्ता स्थापना का रास्ता खुल सके.
बता दें कि, विधायक रवि राणा के साथ अपनी प्रतिद्वंदिता के चलते ही विधायक संजय खोडके ने मनपा चुनाव के समय युति में शामिल होने की बजाए ‘एकला चलो’ की भूमिका अपनाई थी और 87 में से 85 सीटों पर अपने प्रत्याशी खडे किए थे. जिसमें से 11 प्रत्याशी चुनाव जीतकर प्रत्याशी निर्वाचित हुए. वहीं दूसरी ओर मनपा 87 सदस्यीय मनपा के सदन में भाजपा ने सर्वाधिक 25 सीटें जीती. जबकि युवा स्वाभिमान पार्टी ने 15 सीटों पर जीत हासिल कर अपना दबदबा दिखाया. खास बात यह है कि, युवा स्वाभिमान पार्टी ने चुनाव से पहले और चुनाव के बाद ही भाजपा के लिए अनुकूल भूमिका दर्शाते हुए स्पष्ट किया था कि, मनपा में महापौर भाजपा का रहेगा और युवा स्वाभिमान पार्टी मनपा की सत्ता में भाजपा के साथ शामिल रहेगी. किंतु इन दोनों दलों की सदस्य संख्या को मिलाकर बहुमत के लिए आवश्यक संख्याबल पूरा नहीं हो पा रहा था. जिसके चलते भाजपा द्वारा शिंदे सेना के 3 व बसपा के 3 सदस्यों का भी समर्थन जुटाने की कोशिश की जा रही थी. क्योंकि विधायक संजय खोडके ने पहले ही विधायक रवि राणा को लेकर अपनी भूमिका स्पष्ट कर दी थी. परंतु इसी बीच राकांपा के पार्टी प्रमुख व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार का एक हवाई हादसे में निधन हो जाने के चलते विधायक संजय खोडके के लिए राजनीतिक स्थितियां एकदम ही उलट गई. जिसके बाद विधायक संजय खोडके ने मनपा में सत्ता स्थापित करने हेतु भाजपा के साथ उस गठबंधन में शामिल होने को लेकर हामी भरी, जिस गठबंधन में भाजपा के साथ युवा स्वाभिमान पार्टी भी शामिल है.
अचानक हुए इस उलटफेर को लेकर विधायक संजय खोडके द्वारा तर्क दिया गया कि, उनकी सीएम फडणवीस के साथ इस विषय को लेकर एक से अधिक बार चर्चा हुई है और उन्होंने सीएम फडणवीस के निवेदन को मान देते हुए मनपा में सत्ता स्थापित करने हेतु भाजपा के साथ गठबंधन में शामिल होने का निर्णय लिया है. वहीं दूसरी ओर युवा स्वाभिमान पार्टी के नेता व विधायक रवि राणा ने इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, उन्होंने पहले ही भाजपा को अपना समर्थन देने से संबंधित निर्णय घोषित कर दिया था. साथ ही इस गठबंधन में राकांपा के शामिल होने को लेकर उन्होंने अपनी ओर के कभी कोई आपत्ती भी नहीं जताई थी. विधायक राणा के मुताबिक उनके और अजीत पवार के बीच काफी अच्छे संबंध रहे है. साथ ही अजीत पवार के उन पर कई एहसान भी रहे है. ऐसे में वे अजीत दादा और उनकी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का विरोध करने के बारे में सोच भी नहीं सकते. इसके अलावा विधायक राणा ने यह भी कहा कि, यदि अजीत दादा के लिए उन्हें अपनी राजनीतिक भूमिका से दो कदम पीछे भी हटना पडा, तो वे इसके लिए भी हमेशा तैयार है. क्योंकि अब ऐसा करना ही अजीत दादा के लिए उनकी ओर से सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करने की तरह रहेगा.





