फसल निरीक्षण में सहायक की जान खतरे में, न बीमा न मुआवजा

ई-फसल निरीक्षण मानधन शुल्क में देरी

* शेष फसल निरीक्षण कब किया जाएगा
अमरावती/दि.5 – जिले में रबी मौसम के लिए ई-फसल सर्वेक्षण की समय सीमा 24 जनवरी को समाप्त हो गई और सहायक स्तर पर अगला फसल सर्वेक्षण 25 जनवरी से शुरू हो गया है. हालांकि, इस प्रक्रिया में खेतों में जाकर ऐप पर फसल की बुआई दर्ज करने वाले सहायकों को दिया जाने वाला मानदेय अभी तक प्राप्त न होने पर कड़ा असंतोष व्यक्त किया जा रहा है.
राज्य सरकार ने एकल फसलों के लिए ई-फसल निरीक्षण करने वाले सहायकों को प्रति प्लॉट 10 रुपये और मिश्रित फसलों के लिए 12 रुपये मानदेय देने का निर्णय लिया था. हालांकि, अधिकांश सहायकों को डेढ़ से दो साल से यह मानदेय नहीं मिला है. इस संबंध में शिकायतें सामने आ रही हैं. ई-फसल निरीक्षण के दौरान सहायकों को किसानों के खेतों में जाकर व्यक्तिगत रूप से जानकारी एकत्र करनी होती है. मोबाइल इंटरनेट, यात्रा खर्च और समय का बोझ स्वयं वहन करने के बावजूद, मानदेय न मिलने के कारण सहायक आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं. फिर भी, वे सरकार के आदेशों के अनुसार फसल निरीक्षण का कार्य कर रहे हैं. मानदेय में देरी के कारण सहायकों में असंतोष बढ़ रहा है और सरकार से मानदेय के तत्काल भुगतान की मांग की जा रही है. सहायकों को ईंधन, यात्रा, मोबाइल और इंटरनेट के खर्च स्वयं वहन करने पड़ते हैं और उन्हें कोई पारिश्रमिक नहीं मिलता, जिससे उनकी आर्थिक परेशानी और बढ़ गई है. गौरतलब है कि जंगली जानवरों के डर और दुर्घटनाओं के जोखिम के कारण ’फसल निरीक्षण’ की जिम्मेदारी सहायकों के लिए खतरनाक होती जा रही है.

* सहायक स्तर का ई-फसल निरीक्षण किया जाएगा
सहायक स्तर पर प्रक्रिया 25 यह प्रक्रिया जनवरी से शुरू हो चुकी है. उपजिलाधिकारी (राजस्व) ने इस संबंध में सभी तहसीलदारों को निर्देश दे दिए हैं. इसलिए, यह प्रक्रिया निर्धारित समय के भीतर पूरी हो जाएगी.

* कोई यात्रा खर्च नहीं!
निरीक्षण दोपहिया वाहन या सार्वजनिक परिवहन से ही करना होगा. हालांकि, ईंधन, यात्रा या रखरखाव खर्चों के लिए कोई मुआवजा नहीं दिया जाता है. इससे सहायकों में असंतोष फैल रहा है.

* कठिनाइयां क्या हैं?
फसलों की जांच के लिए उन्हें प्रतिदिन दूर-दराज के खेतों में जाना पड़ता है. समय की कमी, नेटवर्क की समस्याएं, किसानों की हताशा और प्रशासन की लगातार मांगें सहायकों पर मानसिक तनाव को बढ़ा देती हैं.

* डेढ़-दो साल से एक भी रुपया नहीं मिला!
कई सहायकों को पिछले डेढ़ से दो वर्षों से मानदेय के रूप में एक रुपया भी नहीं मिला है. सहायकों का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद, उन्हें केवल वादों से बहलाया जा रहा है.

* अपना मोबाइल, डेटा का भुगतान खुद करेंं!
फसल निरीक्षण के लिए सहायकों को स्मार्टफोन, इंटरनेट डेटा और बैटरी बैकअप का खर्च खुद उठाना पड़ता है. सहायकों ने बताया कि सरकार कोई उपकरण उपलब्ध नहीं करा रही है.

* जंगली जानवरों की दहशत!
कई क्षेत्रों में जंगली सूअर, सांप और बिच्छू काफी मात्रा में पाए जाते हैं. ऐसे में अकेले खेतों में जाकर निरीक्षण करने वाले सहायकों की जान को खतरा रहता है. बाघों और तेंदुओं की मौजूदगी के कारण कई क्षेत्रों में भय का माहौल बना हुआ है.

* जिले में सहायक और निरीक्षक के लिए इतना मानधन
सहायक कर्मचारी जिले में ई-फसल निरीक्षण का काम करते हैं. सरकारी निर्णय के अनुसार, एकल फसल के लिए प्रति प्लॉट 10 रुपये और मिश्रित फसलों के लिए 12 रुपये का पारिश्रमिक अपेक्षित है. यह पारिश्रमिक नियमित रूप से प्राप्त नहीं हो रहा है.

* कोई बीमा नहीं, कोई उपकरण नहीं
दुर्घटना, चोट या मृत्यु की स्थिति में कोई बीमा कवर नहीं है. सुरक्षा उपकरण, पहचान पत्र या सहायता प्रणाली जैसी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है. इसके बावजूद, सहायक कर्मचारी ईमानदारी से काम करते हैं.

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