न लोकल पुलिस की सहायता, न कोई जानकारी
डीआरआई दल पहले से अपडेट हैं पूरे मामले को लेकर

* अमरावती-बडनेरा शहर में डीआरआई की कडी नजर
* एमडी ड्रग्स नेटवर्क की जांच हुई तेज
* अब तक 10 से ज्यादा लोगों से पूछताछ
अमरावती/दि.5- एमडी ड्रग्स के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) की टीम अमरावती और बडनेरा के विभिन्न इलाकों में लगातार नजर बनाई है. खास बात यह है कि इस पूरी कार्रवाई में स्थानीय पुलिस की कोई मदद नहीं ली जा रही है, और न ही उनसे किसी प्रकार की जानकारी साझा की गई है.
सूत्रों के अनुसार, डीआरआई की टीम पूरी तैयारी और पुख्ता इनपुट के साथ रेड कर रही है. अमरावती और बडनेरा क्षेत्र में 10 से 15 लोगों से गहन पूछताछ की जा चुकी है. पूछताछ का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है, जिससे एमडी ड्रग्स के पूरे सरगना और नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है. डीआरआई से जुड़े सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में गिरफ्तारियों का आंकड़ा बढ़ सकता है. टीम को कई अहम सुराग हाथ लगे हैं, जिसके आधार पर ड्रग्स तस्करी से जुड़े बड़े नामों पर शिकंजा कसने की तैयारी है. बताया जा रहा है कि डीआरआई की यह कार्रवाई एमडी ड्रग्स के पूरे सिंडिकेट का भंडाफोड़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है. अमरावती शहर में इस कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज है और लोग इसे नशे के खिलाफ बड़ी सफलता के रूप में देख रहे हैं. डीआरआई की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है.
डीआरआई कैसे करती है कार्रवाई, एफआईआर को लेकर क्या है नियम?
डीआरआई भारत की एक प्रमुख केंद्रीय जांच एजेंसी है, जो तस्करी, नशीले पदार्थों की अवैध आवाजाही और सीमा शुल्क चोरी के मामलों पर कार्रवाई करती है.
डीआरआई के काम करने का तरीका
– खुफिया जानकारी जुटाना देश-विदेश में फैले मुखबिर नेटवर्क से गुप्त सूचनाएं.
– निगरानी संदिग्ध व्यक्तियों, वाहनों और नेटवर्क पर कड़ी नजर.
– छापेमारी व जब्ती: पुख्ता सबूत मिलने पर बिना सूचना रेड.
– पूछताछ: समन जारी कर बयान दर्ज किए जाते हैं.
* क्या डीआरआई एफआईआर दर्ज करती है?
– डीआरआई पुलिस की तरह एफआईआर दर्ज नहीं करती.
– कार्रवाई कस्टम एक्ट 1962 के तहत होती है.
– जब्ती मेमो और पंचनामा ही मुख्य कानूनी दस्तावेज होते है.
– गिरफ्तारी होने पर आरोपी को विशेष कस्टम न्यायाधीश के सामने पेश किया जाता है.
* पुलिस में एफआईआर कब होती है?
– जब मामला हत्या, जालसाजी या अन्य गंभीर अपराध से जुड़ा हो.
– या नशीले पदार्थों के मामलों में एनडीपीएस अॅक्ट के तहत
– ऐसे मामलों में डीआरआई केस को स्थानीय पुलिस या सीबीआई को सौंप सकती है.





