जेल में मोबाइल के आरोपी को जमानत नहीं

कोर्ट ने ठुकराई दस्तगीर गफूर की अर्जी

* अभी भी शुरू है तहकीकात
अमरावती/ दि.6- जिला मध्यवर्ती कारागार में दो माह पहले मोबाइल हैंडसेट बरामदगी के गंभीर प्रकरण के आरोपी दस्तगीर गफूर शा की जमानत अर्जी कोर्ट द्बारा खारिज कर दिए जाने का बडा समाचार मिल रहा है. यह प्रकरण भादंवि की धारा 188 और नये बीएनएस की धारा 223 अंतर्गत अपराध दर्ज किया गया है. सत्र न्यायालय द्बारा प्रकरण को गंभीरता से लिए जाने के चलते आरोपी दस्तगीर की जमानत याचिका नामंजूर किए जाने की जानकारी विधि सूत्रों ने अमरावती मंडल को दी. बता दें कि गंभीर प्रकरण की जांच अभी भी चल रही है. तत्कालीन सीपी अरविंद चावरिया ने अपराध शाखा को इस प्रकरण की जांच सौंप रखी है.
एक के बाद एक 8 हैंडसेट
जिला मध्यवर्ती कारागार में दो माह पहले एक मोबाइल हैंडसेट कैदी के पास बरामद होने से खलबली मची थी. इस संदर्भ में जेल अधिकारियों ने फ्रेजरपुरा थाने में शिकायत दी थी. किंतु घटना के कुछ दिनों बाद और एक हैंडसेट बरामद हुआ. इतना ही नहीं तो अंडासेल से भी मोबाइल फोन मिलने से मामला गुरू गंभीर हो गया. जेल में एक के बाद एक 8 मोबाइल हैंडसेट मिलने से खलबली मची. पुलिस ने जांच शुरू की.
तीन कैदी नामजद
हैंडसेट मिलने से जेल की सुरक्षा में गंभीर चूक की बात सामने आयी. प्रारंभिक पडताल पश्चात पुलिस ने तीन कैदियों को जेल में मोबाइल लाने के मामले में नामजद किया. जिसमें दस्तगीर गफूरशा, तरबेज खान और गणेश शिंदे शामिल रहे. तीनों ही आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं.
दोनों को भेजा वर्धा और अकोला
मध्यवर्ती कारागार की सुरक्षा खतरे में देख पुलिस ने आरोपी कैदी दस्तगीर गफूर शा को वर्धा और तरबेज खान को अकोला की जेल में ट्रांसफर किया. जबकि गणेश शिंदे पर अमरावती कारागार में ही कडी निगरानी रखी जाने लगी. उधर पुलिस ने आरोपियों के विरूध्द भादंवि धारा 188 और नई बीएनएस धारा 223 के मामले दर्ज किए थे. पुलिस की जांच लगातार शुरू रहने की जानकारी अधिकारी देते हैं.
अपराध शाखा को सौंपा जिम्मा
जेल की सुरक्षा का मसला होने से तत्कालीन पुलिस आयुक्त अरविंद चावरिया ने कारागार को भेंट दी. सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की. उसी प्रकार अपराध शाखा को इस पूरे गंभीर प्रकरण की तहकीकात की जिम्मेदारी दी. यह जांच दो माह से सतत चलने की जानकारी दी जा रही है.
दस्तगीर की जमानत खारिज
उधर दस्तगीर गफूर शा ने सत्र न्यायालय में जेल के मोबाइल हैंडसेट प्रकरण में नामजद होने से जमानत अर्जी दे रखी थी. सत्र न्यायालय ने हाल ही में आरोपी दस्तगीर की जमानत याचिका नामंजूर कर दी. विधि सूत्रों ने अमरावती मंडल को बताया कि ऐसे कैसेस में आम तौर पर जमानत अर्जी मंजूर हो जाती है. किंतु अमरावती जेल का उक्त प्रकरण गंभीर होने से सत्र न्यायालय ने भी आरोपी को जमानत नहीं दी है.

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