वरूड में बाघ की मौत या हत्या ?
वन कर्मचारियों की गश्त पर पूछ रहे सवाल

* पखवाडे भर पहले हुई मृत्यु का पता न चला !
अमरावती/ दि. 6- वरूड वन परिक्षेत्र के वाइ सर्कल में गत 3 फरवरी को बाघ की लाश अत्यंत बुरी अवस्था में मिली थी. बाघ की दशा को देखते हुए कहा जा रहा है कि उसकी मौत 15 दिन पहले हो गई थी. यह प्राथमिक अंदाज रहने से वन विभाग की गश्त और हल चल पर प्रश्न उठाए जा रहे हैं. मोर्शी- वरूड के सहायक वन संरक्षक के अमरावती में बैठकर यहां का काम चलाने पर भी सवाल उपस्थित किए जा रहे हैं.
महेंद्री वन संवर्धन क्षेत्र अंतर्गत वाई सर्कल के पंढरी बीट में 3 फरवरी को तडके 3 बजे पट्टेदार बाघ का शव बरामद हुआ था. इस घटना के उजागर होने से अमरावती प्रादेशिक डीसीएफ अर्जुना केआर ने घटनास्थल पहुंचकर बाघ का पंचनामा किया. उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया. बाघ मृतावस्था में होने की जानकारी एक व्यक्ति ने वन कर्मचारी को बताई . जिसके बाद बाघ की मौत का प्रकरण उजागर हुआ. पशु मेडिकल ऑफीसर के अनुसार बाघ 4-5 वर्ष का हो सकता है. बाघ की मौत से जंगल और वन्यजीव सही में सुरक्षित है क्या ? यह संशोधन का विषय बताया जा रहा है. डीआईओ ने पहली बार बाघ की मौत के बारे में समाचार जारी किए.
बाघ आया कहां से ?
वरूड परिक्षेत्र में पट्टेदार बाघ आता और रहता है. फिर भी संबंधित अधिकारियों को इस बारे में कोई जानकारी नहीं रहती है. यह गंभीर मामला कहा जा रहा है. हकीकत यह है कि वरूड के जंगल में बाघों का संचार है. इस बारे में वरिष्ठ को कोई जानकारी नहीं दी जाती. न मॉनिटरिंग न जंगल में गश्त होती है. बाघ मर गया या मारा गया ? इस संदर्भ में डीएफओ को वरिष्ठों को उत्तर देना पडेगा.
सहायक वन संरक्षक अमरावती में
वरूड परिसर से गौण खनिज का अवैध उत्खनन और यातायात होता है. वन क्षेत्र में ईट भट्टे, नदी और नाले से रेत उत्खनन सदा की बात है. अब तो जंगल में बाघ मृतावस्था में मिला है. वरूड- मोर्शी के सहायक वन संरक्षक डॉ. मयूर भैलुमे की नियुक्ति के समय से ही वे अमरावती मुख्यालय से कामकाज चला रहे हैं. वरूड -मोर्शी में एसीएफ के रूप में उनकी नियुक्ति क्यों की गई, इस बारे में चर्चाएं सुनने मिलती है. अमरावती से वरूड का फासला देखते हुए जंगलों का संरक्षण किया जा सकता है क्या ? यह सवाल पूछा जा रहा है. वरूड में एसीएफ का निवासस्थान मौजूद है. कहा जा रहा है कि पारिवारिक कारण बताकर भैलूमे अमरावती में रहकर वरिष्ठ अधिकारियों की आंखोें में धूल झोंक रहे हैं. वन्यजीव प्रेमियों ने बाघ मृत्यु प्रकरण में दोषियों पर कडी कार्रवाई की मांग की है.





