विद्यापीठ मेंं ह्दयविकार व सीपीआर तकनीक पर कार्यक्रम
डॉ. महेंद्र गुढे एवं डॉ. शैलेश जायदे ने दिया प्रशिक्षण

अमरावती/दि.10-संत गाडगे बाबा अमरावती विद्यापीठ के आरोग्य विभाग व प्राणिशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ह्दयविकार व कार्डिओपल्मोनरी रेस्क्युसिटेशन इस विषय पर एक स्पेशल ट्रेनिंग प्रोग्राम पूरा हुआ. कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरु डॉ. मिलींद बारहाते ने की. इस अवसर पर एक्सॉन हॉस्पिटल के ऑर्थोपेडिक और ट्रॉमा स्पेशलिस्ट डॉ. महेंद्र गुढे, कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. शैलेश जायदे, परीक्षा व मूल्यमापन मंडल के संचालक डॉ. नितिन कोली, आरोग्य अधिकारी डॉ. स्मिता थोरात, प्राणिशास्त्र विभाग प्रमुख डॉ. हेमलता नंदुरकर मौजूद थे.
इस मौके पर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. शैलेश जायदे ने ट्रेनिंग देते हुए हार्ट डिजीज के कारण बताए और कहा कि आज दुनिया में 17.5 मिलियन लोग मरते हैं. उन्होंने भविष्यवाणी की कि यह संख्या 2030 तक बढकर 23 मिलियन हो जाएगी. हृदय रोग के लिए वास्तव में क्या कारक जिम्मेदार हैं, दिल के दौरे के क्या कारण हैं, दिल के दौरे का खतरा क्या है, इस बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल, इसके प्रकार, तंबाकू, सिगरेट, मधुमेह, खराब आहार, व्यायाम की कमी, अत्यधिक शराब का सेवन जोखिम कारक हैं. बदली हुई जीवनशैली और प्रदूषण के कारण, यह देखा गया है कि आज स्कूली छात्रों में दिल के दौरे की दर बढ़ गई है, इसलिए छात्रों को अठारह वर्ष की आयु के बाद अपने रक्तचाप की जांच करने की आवश्यकता है. साथ ही, तीस साल की उम्र के बाद नियमित रूप से मधुमेह की जांच करने की आवश्यकता है. जो लोग चलते समय थोडी सी भी सांस फूलते हैं, तो वे दिल के दौरे के लक्षण हैं. इसलिए, छात्रों से लेकर वयस्कों तक सभी को नियमित रूप से अपने स्वास्थ्य की जांच करनी चाहिए और संतुलित जीवनशैली बनाए रखनी चाहिए, उन्होंने यह भी कहा.
कुलगुरु डॉ. मिलींद बारहाते ने कहा, आज की युवा पीढी में हार्ट अटैक की दर देखी जा रही है. यह बहुत चिंता की बात है. हम अपने पूर्वजों के बताए गए खान-पान के उलट खाना खा रहे हैं. हवा, पानी और अनाज में प्रदूषण कंट्रोल से बाहर हो गया है. इसके अलावा उन्होंने कहा कि व्यसन विकार भी बढ रहे हैं, छात्रों को मार्गदर्शन करते हुए उन्होंने आगे कहा, दोनों वैद्यकिया अधिकारियों ने हमें दिल की बीमारी और उसके कारणों, सीपीआर देने के तरीके के बारे में बहुत ही आसान और सरल भाषा में डिटेल में जानकारी दी. इसलिए सभी को फास्ट फूड नहीं खाना चाहिए, और जितना हो सके एक्सरसाइज करनी चाहिए, उन्होंने यह भी कहा. यह खास तौर पर जरूरी है कि हमारे विद्यापीठ का परिसर प्रदूषण-मुक्त हो.
कार्यक्रम का संचालन श्रविका देवडे ने किया. आभार डॉ. के.वी.नागले ने माना. प्रस्तावना डॉ. हेमलता नांदुरकर ने रखी. कार्यक्रम में उपकुलसचिव डॉ. दादाराव चव्हाण, जनसंपर्क अधिकारी डॉ. विलास नांदुरकर, असिस्टेंट ग्रंथपाल डॉ. विशाल बापटे आदि उपस्थित थे.





