वरूड में नियम विरूध्द टेंडर प्रक्रिया पर रोक

उच्च न्यायालय की सख्त टिप्पणी

* जिला परिषद को शपथ पत्र देेने के आदेश
* 14 गांवों में कांक्रीट सडक का विषय
अमरावती / दि.13- वरूड तहसील अंतर्गत 14 गांवों में सीमेंट कांक्रीट की सडक निर्माण का काम क्लब कर एक साथ करवाने की टेंडर प्रक्रिया पर उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है. खबर है कि न्या. अनिल किलोर और न्या राज वाकोडे ने हाल ही में प्राथमिक रूप से पाया कि निविदा प्रक्रिया शासन के नियमों को दरकिनार कर अपनाई गई है. न्यायालय न े संबंधित सभी कार्यो पर रोक लगाने और बिलों का भुगतान न करने के आदेश भी दिए है. साथ ही कहा गया कि नागरिकों को अधूरे और खुदे हुए मार्ग से परेशानी न हो, इसके लिए ठेकेदार अपने खर्च से आवश्यक कार्य कर सकता है.
जिप ने लगाई थी रोक
सुनवाई दौरान यह भी सामने आया कि शासन और जिला प रिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्बारा स्थगनादेश होने के बावजूद भी कार्यकारी अभियंता ने कार्यारंभ आदेश जारी कर काम शुरू कराया. इस पर कोर्ट ने हैरानी व्यक्त की. जिला परिषद की ओर से इससे पहले दायर प्रतिज्ञा पत्र में कहा गया था कि 14 गांवों के सडक कार्य एक ही लाइन में स्थित है. ऐसे में कोर्ट ने नक्शे प्रस्तुत करने के निर्देश दिए.
याचिकाकर्ता की ओर से एड. चेतन शर्मा ने पक्ष रखा. याचिकाकर्ता का आरोप था कि मोर्शी विधानसभा क्षेत्र के जनप्रतिनिधि के कहने पर कार्यकारी अभियंता ने सभी कार्यो को एक साथ क्लब कर निविदा जारी कर दी थी. उन्होेंने आरोप किया था कि निविदा राशि बढाकर छोटे ठेकेदारो को टेंडर प्रक्रिया से दूर करने का उद्देश्य रहा. 14 गांवों के काम एक साथ किए जाने से लागत बढ गई और वरूड तहसील के छोटे ठेकेदार टेंडर में भाग नहीं ले सके.
जिला परिषद के वकील जेमिनी कासट ने कोर्ट को बताया कि यह सडके एक ही लाइन में नहीं है. इस पर न्यायालय ने शपथ पत्र प्रस्तुत करने का आदेश दिया. न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि किसी जनप्रतिनिधि के पत्र के आधार पर शासन नियमों को दरकिनार कर निविदा प्रक्रिया चलाई जाती है तो यह उचित नहीं है.

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