सडक निर्माण की निविदा अवैध, न्यायालय ने ठुकराया बिल

जिला परिषद के निर्माण विभाग को झटका

अमरावती /दि.17 वरुड तहसील में 14 गांव में मंजूर किए सीमेंट कांक्रीट मार्ग निर्माण की निविदा अलग-अलग न चलाते हुए एक साथ चलाए जाने से राज्य शासन ने इस काम को स्थगिती दी थी. लेकिन फिर भी जिला परिषद निर्माण विभाग के जरिए निविदा बुलाकर इस काम के लिए ठेकेदार नियुक्त किया गया. इस पर न्यायालय ने सवाल उठाए है. जिला परिषद यंत्रणा द्वारा आगामी आदेश तक ठेकेदार के बिल न देने के आदेश न्यायालय द्वारा दिए गए है. मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने 2 फरवरी को यह आदेश प्रस्तुत किए.
जिला परिषद निर्माण विभाग ने वरुड तहसील के 14 गांव के कांक्रीटीकरण के निर्माण का काम शासन द्वारा मंजूर किया गया था. इन सभी काम की निविदा नियमानुसार अलग-अलग निकालना आवश्यक था. लेकिन निर्माण विभाग ने राजनीतिक दबाव में और शासन के नियम को नजरअंदाज कर इन सभी कामों की निविदा एक साथ निकाल दी. सभी काम की निविदा एक साथ निकालकर अपने पसंदीदा ठेकेदार को काम दे दिया. इस कारण सभी निर्माण कार्य की कीमत काफी हो गई. ऐसा करने से अन्य ठेकेदारों को इस निविदा प्रक्रिया में सहभागी होते नहीं आ सका. इस कारण इसके विरोध में नरेंद्र पावडे ने मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ में याचिका दायर की.

* न्यायालय ने किया आश्चर्य व्यक्त
न्यायालय में हुई सुनवाई में इस काम को राज्य सरकार द्वारा स्थगिती दिए जाने के बावजूद सडक के निर्माण कार्य का काम शुरु है. यह देखकर न्यायालय ने आश्चर्य व्यक्त किया. इस कारण यह सभी निविदा प्रक्रिया शासन के नियम के मुताबिक नहीं, बल्कि नियमबाह्य रहने की बात न्यायालय ने दर्ज की. इस कारण यह सभी काम रोककर इसके बिल न देने के निर्देश दिए है. इसके अलावा जिला परिषद द्वारा अपने हफलनामे में 14 गांव के काम एक लाईन में रहने की बात कही रहने से वरुड तहसील का नक्शा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए. याचिकाकर्ता की तरफ से एड. चेतन शर्मा ने काम संभाला. जिला परिषद की तरफ से एड. जेमिनी कासट ने पक्ष रखा, जबकि शासन की तरफ से एड. एच. डी. मराठे ने तथा ठेकेदार की तरफ से एड. एस. डी. चोपडे ने काम संभाला.

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