दो वर्षो में 10 से अधिक तेंदुओं की मौत

हादसों और शिकारी हमलों में हुई बडी क्षति

* वन्यजीव सुरक्षा पर उठ रहे सवाल
अमरावती/ दि. 17 – जिले में पिछले लगभग दो वर्षो के दौरान 10 से अधिक तेंदुओं की मौत ने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खडे कर दिए है. इनमें से अधिकांश मौते सडक और रेलवे हादसों, बिजली करंट जैसी घटनाओं से हुई है. जबकि दो तेंदुओं की जान शिकारी हमलों में गई. लगातार हो रही इन घटनाओं से जिले में जैव विविधता और वन्य संतुलन पर चिंता व्यक्त की जा रही है.
वन्यजीव संरक्षण विभाग के अनुसार करीब 8 तेंदुए विभिन्न दुर्घटनाओं का शिकार हुए है. तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आना, रेल पटरियों पर दुर्घटनाए तथा खुले विद्युत तारों का करंट प्रमुख कारण रहे हैं. वन्यजीव संरक्षण विभाग का कहना है कि अवैध शिकार की घटनाओं को रोकने के लिए कार्रवाई की जा रही है. किंतु मौजूदा परिस्थितियों में निगरानी और संरक्षण उपायों को और सख्त करने की आवश्यकता है.
वन्यजीव प्रेमीयों और विशेषज्ञों का मत है कि तेंदुओं के प्राकृतिक आवास सिकुडने से वे मानव बस्तियों और खेतोें की ओर आने को मजबूर हो रहे हैं. वन्य मार्गो पर ईको- क्रॉसिंग, चेतावनी संकेतक, स्पीड कंट्रोल उपाय और निगरानी कैमरों की संख्या बढाने की मांग की जा रही है. उनका कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गये तो वन्यजीवों की संख्या में और भी गिरावट आ सकती है. जिसका सीधा असर पर्यावरणीय संतुलन पर पडेगा. तेंदुआ खाद्य श्रृंखला में शीर्ष शिकारी माना जाता है.
इसकी उपस्थिति जंगलों के परिस्थितिक संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. ऐसे में लगातार हो रही मौते न केवल वन्यजीव संरक्षण की चुनौती को रेखांकित करती है. बल्कि पर्यावरण सुरक्षा के लिए भी चेतावनी है. जिले के जंगलों मेें मानव गतिविधियों और पालतू पशुओं की बढती आवाजाही से प्राकृतिक खाद्य श्रृंखला प्रभावित हो रही है. हिरण जैसे तृणभक्षी प्राणी भोजन की तलाश में खेतों और बस्तियों की ओर बढ रहे हैं. उनके पीछे- पीछे शीर्ष शिकारी तेंदुए भी आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं. इसी दौरान सडक और रेल हादसों का शिकार हो जाते हैं.

निजामपुर में मादा तेंदुए की मौत पर रहस्य बरकरार
अचलपुर शहर के समीप निजामपुर गांव में 13 फरवरी को मृत पायी गई मादा तेंदुए की घटना में दूसरे दिन भी वन विभाग की जांच जारी रही. लेकिन मौत के वास्तविक कारणेां को लेकर अब तक कोई अधिकारिक जानकारी सामने नहीं आयी है. इससे वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं. गौरतलब है कि निजामपुर गांव के पास सापन नदी के किनारे झाडियों में शुक्रवार सुबह 13 फरवरी को ग्रामीणों को मादा तेंदुआ मृत अवस्था में मिली थी. सूचना मिलते ही वन विभाग, पुलिस और चिकित्सक दल मौके पर पहुंचा था. डॉग स्कॉड की मदद से सबूत जुटाने का प्रयास किया गया तथा देर रात तक पंचनामा की प्रक्रिया चलती रही. सूत्राेंं के अनुसार तेंदुए के गले में तार का फंदा कसने से मौत होेने की प्राथमिक आशंका जताई जा रही है. हालांकि वन विभाग की ओर से इस संबंध में कोई अधिकृत पुष्टि नहीं की गई है. मृत तेंदुए के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजे जाने की जानकारी प्राप्त हुई है और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है. वन परिक्षेत्र अधिकारी दिनेश वालके अवकाश पर होने से उनका प्रभार अन्य अधिकारी को सौंपा गया है. किंतु उनसे संपर्क नहीं हो पाने की अधिकृत जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी.

गंभीर चिंता का विषय
यह स्थिति अमरावती के जंगलों और पर्यावरण संतुलन के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं.
नीलेश कंचनपुरे,
अध्यक्ष वॉर संस्था

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