बारामती प्लेन क्रैश में ब्लैक बॉक्स को पहुंचा नुकसान
हवाई हादसे की जांच पर उठ रहे गंभीर सवाल

* नागरी उड्डयन मंत्रालय ने एएआईबी को सौंपी मामले की जांच
* डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर को रिकवर करने के प्रयास तेज
* प्लेन क्रैश में डिप्टी सीएम अजीत पवार सहित 5 लोगों की हुई थी मौत
* भतीजे रोहित पवार ने जताई किसी बडी साजिश की आशंका
* राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी हुआ तेज
मुंबई/दि.17- महाराष्ट्र के दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार की विमान दुर्घटना को लेकर रहस्य और गहरा गया है. दुर्घटना के बाद सामने आई जानकारी में ब्लैक बॉक्स के आग में क्षतिग्रस्त होने की बात कही गई थी, जिस पर विपक्ष और परिजनों ने सवाल उठाए. बढ़ते विवाद के बीच नागरिक उड्डयन मंत्रालय (भारत) ने आधिकारिक परिपत्र जारी कर जांच की स्थिति स्पष्ट की है. मंत्रालय के अनुसार 28 जनवरी 2026 को बारामती में लियरजेट-45 (वीटी-एसएसके) विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था. मामले की विस्तृत जांच एअरक्राफ्ट एक्सीडेंट इनवेस्टीगेशन ब्यूरो (एएआईबी) द्वारा की जा रही है. इसी बीच यह जानकारी आई है कि, उक्त विमान के ब्लैक बॉक्स को आग से नुकसान पहुंचा है. पर ब्लैक बॉक्स का डेटा सुरक्षित होने की उम्मीद जताई गई है. सरकारी बयान में कहा गया कि विमान में दो स्वतंत्र फ्लाइट रिकॉर्डर मौजूद थे. दुर्घटना के बाद लगी भीषण आग में दोनों रिकॉर्डर लंबे समय तक अत्यधिक तापमान के संपर्क में रहे, जिससे उन्हें नुकसान पहुंचा. हालांकि डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर को सफलतापूर्वक डाउनलोड कर लिया गया है. साथ ही कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर की तकनीकी जांच जारी है. इसके अलावा डेटा रिकवरी के लिए निर्माता विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है. नागरी उड्डयन मंत्रालय ने दावा किया कि जांच सभी तकनीकी प्रोटोकॉल के तहत निष्पक्ष और साक्ष्य-आधारित तरीके से की जा रही है तथा उचित समय पर जानकारी सार्वजनिक की जाएगी.
इसी बीच दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजीर पवार के भतीजे तथा शरद पवार गुट वाली राकांपा के विधायक रोहित पवार ने एक सनसनीखेज बयान देते हुए कहा कि, ब्लैक बॉक्स को बारिश, आग और विस्फोट तक से सुरक्षित रहने के लिए बनाया जाता है, लेकिन कई बार राजनीति से ब्लैक बॉक्स को भी सुरक्षित नहीं रखा जा सकता. उन्होंने इस मामले में किसी षडयंत्र की आशंका जताते हुए विस्तृत जांच की मांग की और दावा किया कि जल्द नए तथ्य सामने लाए जाएंगे.
वहीं केंद्र ने अफवाहों से बचने की अपील करते हुए कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर न पहुंचा जाए. आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही दुर्घटना के वास्तविक कारण स्पष्ट हो सकेंगे. केंद्र ने जानकारी देते हुए बताया कि, महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम रहे अजित पवार के प्लेन क्रैश की जांच विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो यानि एएआईबी को सौंपी गई है. मंगलवार को नागरिक उड्डयन मंत्रालय (डीजीसीए) ने इसकी जानकारी दी. मंत्रालय ने कहा- 28 जनवरी को महाराष्ट्र के बारामती में हुए विमान क्रैश की जांच एएआईबी कर रहा है. जो दुर्घटना और घटना जांच नियम, 2017 और इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के तहत की जा रही है. डीजीसीए ने बताया प्लेन में दो फ्लाइट रिकॉर्डर लगे थे, जो हादसे के दौरान लंबे समय तक आग और अत्यधिक गर्मी के संपर्क में रहे. डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर से सफलतापूर्वक डेटा डाउनलोड कर लिया गया है.
ज्ञात रहे कि, विगत 28 जनवरी की सुबह वीएसआर वेंचर्स कंपनी का लेयरजेट 45 प्लेन बारामती में क्रैश हुआ था. घटना में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार समेत 5 लोगों की मौत हुई थी. जिसके बाद मामले की जांच शुरु करते हुए डीजीसीए ने बताया प्लेन में दो फ्लाइट रिकॉर्डर लगे थे, जो हादसे के दौरान लंबे समय तक आग और अत्यधिक गर्मी के संपर्क में रहे. डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर से सफलतापूर्वक डेटा डाउनलोड कर लिया गया है. मंत्रालय ने कहा कि कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर की तकनीकी जांच अभी जारी है. डेटा निकालने में मदद के लिए उस देश के विशेषज्ञों की भी सहायता ली जा रही है, जहां यह उपकरण बनाया गया था. वहीं, एएआईबी ने कहा कि जांच पूरी तरह तकनीकी और प्रक्रियागत नियमों के अनुसार की जा रही है, ताकि निष्पक्ष और सबूत आधारित निष्कर्ष निकाला जा सके. ब्यूरो ने अपील की है कि जांच पूरी होने तक सभी लोग अटकलों से बचे रहें. जांच की डिटेल जल्द ही शेयर की जाएगी. उल्लेखनीय है कि, 28 जनवरी की सुबह वीएसआर वेंचर्स कंपनी का लेयरजेट 45 प्लेन बारामती में क्रैश हुआ था. इसका ब्लैक बॉक्स अगले दिन बरामद किया गया था. इसी में ब्लैक बॉक्स में फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर भी है.
* ब्लैक बॉक्स से संबंधित 6 जरूरी सवाल-जवाब
– 1. इसे ब्लैक बॉक्स क्यों कहते हैं?
ब्लैक बॉक्स नाम को लेकर कई बातें कही जाती हैं. एक मान्यता है कि पहले इसके अंदर का हिस्सा काला होता था, इसलिए इसे यह नाम मिला. दूसरी राय यह है कि हादसे के बाद आग से जलकर इसका रंग काला हो जाता है, इसलिए लोग इसे ब्लैक बॉक्स कहने लगे.
– 2. ब्लैक बॉक्स दिखता कैसा है?
ब्लैक बॉक्स असल में ऑरेंज रंग का होता है और बॉक्स जैसा नहीं दिखता. यह अलग-अलग आकार का हो सकता है-जैसे गोल, बेलनाकार या गुंबद जैसा. इसका आकार इतना बड़ा होता है कि प्लेन के मलबे में आसानी से मिल सके.
– 3. ब्लैक बॉक्स को हादसे के बाद कैसे खोजते हैं?
अगर विमान पानी में गिरता है तो ब्लैक बॉक्स का अंडरवाटर बीकन पानी छूते ही सिग्नल भेजना शुरू कर देता है. अगर हादसा जमीन पर होता है तो इसका चमकीला नारंगी रंग इसे ढूंढने में मदद करता है.
– 4. कैसे बचाता है डेटा?
ब्लैक बॉक्स को विमान के सबसे सुरक्षित हिस्से, आमतौर पर टेल सेक्शन में रखा जाता है. यह टाइटेनियम या स्टेनलेस स्टील से बना होता है. 1100 डिग्री सेल्सियस तापमान व समुद्र की गहराई में दबाव को झेल सकता है. पानी में गिरने पर यह 14,000 फीट गहराई तक से सिग्नल भेज सकता है.
– 5. ब्लैक बॉक्स मिलने में समय लग सकता है?
कुछ हादसों में ब्लैक बॉक्स ढूंढने में बहुत समय लगता है. कई बार ऐसा भी हो सकता है कि नहीं मिले. उदाहरण श्रीविजया एयर जेट (9 जनवरी 2021): करीब 3 दिन में मिल गया. एयर फ्रांस 447 (1 जून 2009): 699 दिन बाद मिला. मलेशिया एयरलाइंस 370 (8 मार्च 2014): अब तक नहीं मिला.
– 5. भारत में जांच कहां होती है?
दिल्ली में हाल ही में डीएफडीआर-सीवीआर लैब की शुरुआत हुई है, जहां ब्लैक बॉक्स से डाटा निकाला और एनालिसिस किया जा सकता है. यहीं पर इस ब्लैक बॉक्स की जांच भी की जाएगी.





